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Air Strike: ये हैं वो चार खास पॉइंट जिन पर टिकी होती है एयर स्ट्राइक

फाइल फोटो- इंडियन एयरफोर्स का विमान

फाइल फोटो- इंडियन एयरफोर्स का विमान

अगर किसी भी एक पाइंट पर चूक हुई तो समझो ऑपरेशन के साथ-साथ पायलट की जिदंगी भी खतरे में पड़ जाती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 27, 2019, 3:30 PM IST
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दुश्‍मन के हवाई क्षेत्र में जाना, ऑपरेशन को अंजाम देना और फिर तय वक्त के साथ वापस लौटना. ये कुछ ऐसे पॉइंट होते हैं जिन पर किसी भी एयर स्ट्राइक की कामयाबी टिकी होती है. ये वो खास पॉइंट होते हैं जिसके आधार पर पायलट एयर स्ट्राइक को कामयाब बनाते हैं.

अगर किसी भी एक बिन्‍दु पर चूक हुई तो समझों ऑपरेशन के साथ-साथ पायलट की जिंदगी भी खतरे में पड़ जाती है. लेकिन यही हमारे पायलट की खासियत है कि वो इन सभी पॉइंट पर काम करते हुए हर छोटे-बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हैं.

विंग कमांडर रिटायर्ड एके सिंह बताते हैं कि जिस तरह एयर स्ट्राइक को पीओके में अंजाम दिया गया है वो हमारे पायलट की एक खास पहचान है. इस तरह के ऑपरेशन के लिए हमारे पायलट चार बिन्‍दूओं पर काम करते हैं. वो चार बिन्‍दु हैं लक्ष्‍य निर्धारण, टाइम, लीडरशिप और सबसे अहम जो हमें हर परिस्‍थिति में लड़ने लायक बनाती है, वो है हिम्‍मत. एक पायलट सिर पर कफन बांधकर दुश्‍मन के क्षेत्र में घुसता है बिना यह सोचे-समझे की मैं लौटकर आऊंगा भी या नहीं.



लक्ष्‍य निर्धारण- विंग कमांडर रिटायर्ड एके सिंह का कहना है कि जहां भी ऑपरेशन करना होता है सबसे पहले वहां की सटीक जानकारी ली जाती है. सिर्फ टीम लीडर ही नहीं पूरी टीम को टारगेट के चप्‍पे-चप्‍पे से वाकिफ कराया जाता है. इसका जरिया फोटो या वीडियो कुछ भी हो सकता है. समय होने पर 24 से 48 घंटे तक टारगेट की निगरानी की जाती है.
समय- इस तरह के ऑपरेशन में समय बहुत महत्‍व रखता है. टीम में शामिल हर पायलट को समय के हिसाब से मिले हुए काम को अंजाम देना होता है. अगर ऐन वक्त पर किसी टेक्निकल कमी के चलते या किसी और वजह से कोई एक पायलट अपना काम नहीं कर पाता है तो उसके काम को दूसरा पायलट अंजाम देता है. क्‍योंकि किसी एक पायलट की वजह से अगर समय गड़बड़ाता है तो पूरे ऑपरेशन के खतरे में पड़ने की आशंका खड़ी हो जाती है. जिससे टीम भी खतरे में आ जाती है. खास बात यह है कि ऐसे ऑपरेशन 20 मिनट से लेकर 30 मिनट तक के होते हैं. खास बात ये है कि तय वक्त में ही अपने देश की सीमा में भी लौटना होता है.

लीडरशिप- लीडर पर ही पूरा ऑपरेशन और ऑपरेशन में लगे पायलटों की जिम्‍मेदारी होती है. टीम लीडर को समय रहते, सीमित संसाधन और अपने पायलटों की हिफाजत करते हुए ऑपरेशन को अंजाम देना होता है.  अच्‍छी बात यह है कि पीओके वाले ऑपरेशन में भी कुछ ऐसा ही हुआ है. इसीलिए हमारे किसी भी पायलट के घायल होने या किसी एयरक्राफ्ट को नुकसान पहुंचने की कोई खबर नहीं है.

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हिम्‍मत- हर तरह के फाइटर एयरक्राफ्ट, हथियार और हैलीकॉप्‍टर रखे रह जाते हैं जब जवान के दिल में जोश-जुनून और हिम्‍मत न हो. यह पता होते हुए कि हम दुश्‍मन के क्षेत्र में जा रहे हैं जिंदा लौटेंगे या मर कर इस बात का भी कोई पक्‍का पता नहीं होता है. लेकिन बावजूद इसके हमारे पायलट ऐसे ऑपरेशनों को अंजाम देते हैं.

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