दिल्ली सरकार के 12 कॉलेजों में गहराया वित्तीय संकट, चार माह से टीचर्स को नहीं मिली सैलरी!

दिल्ली सरकार से सम्बद्ध 12 पूर्ण वित्त पोषित कॉलेजों की ग्रांट तुरंत रिलीज करने की मांग की है.

दिल्ली सरकार से सम्बद्ध 12 पूर्ण वित्त पोषित कॉलेजों की ग्रांट तुरंत रिलीज करने की मांग की है.

दिल्ली सरकार के पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों के हजारों शैक्षिक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों और उनके परिवारों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. एक तरफ कोविड 19 (COVID 19) महामारी और दूसरी तरफ उन्हें नवम्बर-दिसम्बर महीने से वेतन का भुगतान न होना है. बहुत से अतिथि, एडहॉक और कंट्रक्चुअल कर्मचारियों को हर महीने मकान का किराया, ईएमआई ,मकान की किस्त, गाड़ी की किस्त, बच्चों की फीस आदि भरनी पड़ती है. दिल्ली सरकार से अभी तक इस संदर्भ में कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 10, 2021, 10:51 AM IST
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नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के शिक्षक संगठन दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (DTA) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) से दिल्ली सरकार (Delhi Government) से सम्बद्ध 12 पूर्ण वित्त पोषित कॉलेजों की ग्रांट तुरंत रिलीज करने की मांग की है.




उन्होंने बताया है कि पिछले तीन-चार महीने से सैलरी ना मिलने से स्थायी, तदर्थ, अतिथि शिक्षकों व संविदा पर काम कर रहे कर्मचारी भयावह आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. ग्रांट रिलीज कराने की मांग को लेकर डीटीए पिछले दो सप्ताह से उच्च शिक्षा विभाग व संबंधित अधिकारियों से मिल रहा है. शिक्षकों द्वारा अपने-अपने कॉलेजों में धरना प्रदर्शन भी किया जा रहा है, लेकिन अभी तक उन्हें सैलरी नहीं मिली है.



टीचर्स एसोसिएशन के प्रभारी व अकेडमिक काउंसिल के पूर्व सदस्य प्रोफेसर हंसराज 'सुमन' ने बताया है कि दिल्ली सरकार के पूर्ण वित्त पोषित 12  कॉलेजों के हजारों शैक्षिक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों और उनके परिवारों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. एक तरफ कोविड 19 (COVID 19) महामारी और दूसरी तरफ उन्हें नवम्बर-दिसम्बर महीने से वेतन का भुगतान न होना है.






उन्होंने बताया है कि इनमें बहुत से अतिथि, एडहॉक और कंट्रक्चुअल कर्मचारियों को हर महीने मकान का किराया, ईएमआई ,मकान की किस्त, गाड़ी की किस्त, बच्चों की फीस आदि भरनी पड़ती है. उन्होंने बताया  है कि दिल्ली सरकार द्वारा ग्रांट रिलीज ना करने पर डीटीए के नेतृत्व में ग्रांट रिलीज कराने की मांग को लेकर सांसद सुशील गुप्ता, कैबिनेट मंत्री गोपाल राय से लेकर कॉलेज चेयरपर्सन से मिल चुके हैं. मगर अभी तक इस संदर्भ में कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला.




उन्होंने बताया है कि डीटीए प्रभारी प्रोफेसर हंसराज सुमन, उपाध्यक्ष प्रोफेसर नरेंद्र कुमार पाण्डेय व सचिव डॉ. मनोज कुमार सिंह के नेतृत्व में पिछले दिनों उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों से एक प्रतिनिधि मंडल मिला था. उनका कहना है कि उन्होंने कॉलेजों को शैक्षिक व गैर शैक्षिक कर्मचारियों से संबंधित एक फॉर्मेट कॉलेजों को भेजा था जिसमें शिक्षकों /  कर्मचारियों के स्वीकृत पद, कितने भरे गए, किस श्रेणी से, कितने खाली हैं, आदि का ब्यौरा मांगा गया था. लेकिन अभी तक वह फॉर्मेट भरकर नहीं आया है. दो-तीन कॉलेजों द्वारा यह फॉर्मेट भरकर भेजा गया है.




प्रोफेसर सुमन का कहना है कि 12 कॉलेजों की ग्रांट रिलीज ना होने से इससे न केवल वेतन भुगतान प्रभावित हुआ है बल्कि चिकित्सा बिल, सेवानिवृत्ति लाभ और अन्य विकास व्यय भी लंबित हैं. उनका कहना है कि अगले सप्ताह से डीयू में परीक्षाएं शुरू हो रही है. उसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) का नया शैक्षिक सत्र 2021-22 शुरू हो जाएगा जिसमें छात्रों के प्रवेश, ओबीसी कोटे के अंतर्गत सेकेंड ट्रांच की शिक्षकों की नियुक्तियां, गैर शैक्षिक कर्मचारियों की नियुक्ति के अलावा परीक्षा और उसका मूल्यांकन आदि में ग्रांट की आवश्यकता पड़ेगी.




प्रोफेसर सुमन, प्रोफेसर पाण्डेय व डॉ. सिंह का कहना है कि दिल्ली सरकार के 28 कॉलेजों में से अधिकांश कॉलेजों में सरकार की गवर्निंग बॉडी है. उनका यह भी कहना है कि 13 मार्च से इन कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी का कार्यकाल समाप्त हो रहा था लेकिन डीटीए के प्रयासों से विश्वविद्यालय प्रशासन ने तीन महीने का एक्सटेंशन दे दिया है.




उन्होंने संकट की इस घड़ी में डीटीए ने पुनः मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि दिल्ली सरकार द्वारा 12 पूर्ण वित्त पोषित कॉलेजों को धनराशि जारी करने में बिना किसी और देरी के मदद करें ताकि इस अत्यंत कठिन और तनावपूर्ण समय में शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन और अन्य बकाया का भुगतान किया जा सके.



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