दशहरा पर रावण जलाया तो होगी FIR! श्रीकृष्ण के मथुरा में बनेगा रावण महाराज का मंदिर

मथुरा में हर साल यमुना किनारे रावण की पूजा की जाती है. अब जल्द ही इस जगह पर मंदिर बनाने की तैयारी हो रही है.
मथुरा में हर साल यमुना किनारे रावण की पूजा की जाती है. अब जल्द ही इस जगह पर मंदिर बनाने की तैयारी हो रही है.

पुलिस (Police)-प्रशासन के दखल के बाद एफआईआर दर्ज कराने का फैसला वापस ले लिया है. लेकिन रावण (Ravan) का पुतला जलाने का विरोध जारी रहेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 23, 2020, 5:03 PM IST
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नई दिल्ली. दशहरा (Dussehra) पर रावण का पुतला जलाया तो एफआईआर (FIR) हो सकती है. अगर एफआईआर के बाद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो मामला कोर्ट में भी जा सकता है. यह कहना था एडवोकेट ओमवीर सारस्वत का. उनका कहना है कि रावण महाराज का पुतला जलाए जाने से हमारी आस्था आहत होती है. हम रावण (Ravan) की पूजा करते हैं. उनके इस ऐलान से पुलिस (Police)-प्रशासन सकते में आ गया था. बातचीत के बाद ओमवीर एफआईआर दर्ज न कराने की बात पर तो मान गए, लेकिन रावण जलाए जाने का विरोध जारी रहेगा.

मथुरा के ओमवीर ने कही थी एफआईआर दर्ज कराने की बात
मथुरा के रहने वाले एडवोकेट ओमवीर सारस्वत का कहना है कि हम लोग रावण महाराज के गौत्र से हैं. इसी आस्था के चलते हम उनकी पूजा करते हैं. वो एक महान ज्ञानी और तपस्वी थे. लेकिन कुछ लोग कुप्रथा के चलते हर साल रावण महाराज का पुतला दहन करते हैं. लेकिन पुतला दहन करने से क्या होता है और इसके पीछे मकसद क्या है, जब ऐसे लोगों से यह पूछो तो उनके पास कोई जवाब नहीं होता है. इसीलिए हमने एफआईआर दर्ज कराने का निर्णय लिया था.

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मथुरा में यमुना किनारे बनवाएंगे रावण का मंदिर


ओमवीर सारस्वत ने बताया कि हम जल्द ही यमुना किनारे पर रावण महाराज के मंदिर की स्थापना करने जा रहे हैं. बेशक यह मंदिर छोटी सी जगह पर होगा, लेकिन यहां रोज रावण महाराज की पूजा होगी और यह एक शुरुआत होगी. इसके लिए लोगों से जनसंपर्क किया जा रहा है. ओमवीर के मुताबिक मथुरा में रावण महाराज को मानने वालों की संख्या भी हज़ारों में है.

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पुतला जलाने पर एफआईआर दर्ज कराने की बात कहने वाले एडवोकेट ओमवीर सारस्वत रावण महाराज का आर्शीवाद लेते हुए.


रावण की पूजा करने के पीछे बताते हैं यह वजह
एडवोकेट ओमवीर सारस्वत का कहना है कि रावण महाराज प्रकांड विद्वान थे. उनकी विद्वता उनकी योग्यता उनके तप और उनकी युद्ध नीति उनकी चिकित्सा नीति और उनकी धर्म परायण नीति को हम विभिन्न धर्मों से संबंधित ग्रंथों में आज भी देख रहे हैं. रावण का पुतला दहन करना ब्राह्मणों का अपमान है. और स्वयं भगवान राम का भी अपमान है. अगर हम भगवान राम के भक्त हैं तो हमें भगवान राम के आचार्य रावण का पुतला दहन नहीं करना चाहिए.

हम पुतला दहन का विरोध करते हैं. राम अगर भगवान हैं तो रावण भी महान हैं. इस संबंध में विगत वर्षों की भांति मथुरा में यमुना की तलहटी में यमुना किनारे भगवान महादेव के मंदिर में रावण की भी पूजा अर्चना और महा आरती होगी. और संसार भर के लोगों को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की जाएगी, जिससे इस कुरीति से बच सकें.
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