देश के इतिहास में किसानों को पहली बार मिलेगा पद्मश्री, 2013 में उठी थी आवाज

सांकेतिक तस्वीर

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मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला. कृषि प्रधान देश में पहली बार 11 किसानों को मिलेगा पद्म सम्मान.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 9, 2019, 5:14 PM IST
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आजादी के 72 साल बाद किसी सरकार ने अन्नदाताओं को भी पद्म पुरस्कार लायक समझा है. खेती-किसानी करने वाले 11 लोगों को देश का चौथा बड़ा नागरिक सम्मान पद्मश्री के लिए चयनित किया गया है. भारत सरकार की ओर से आम तौर पर सिर्फ कला, शिक्षा, उद्योग, साहित्य, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा के क्षेत्र में ही यह पुरस्कार दिया जाता रहा है. लेकिन इस बार किसानों को भी "अन्य" श्रेणी में पुरस्कार के लिए चयनित किया है. सबसे पहले 2013 में किसानों को पद्म सम्मान देने की मांग उठी थी और इस संबंध में आरटीआई के तहत सूचना मांगी गई थी. (ये भी पढ़ें: किसानों का अब सहारा बनेगा 'कालिया', हर साल करेगा 10 हजार की मदद!)



कृषि क्षेत्र में योगदान देने वालों को पहले पद्मश्री मिलता रहा है , लेकिन किसानों को कभी नहीं मिला. 'हरित क्रांति' के जनक कहे जाने वाले एमएस स्वामीनाथन को साइंस व इंजीनियरिंग क्षेत्र से और वर्गीज कुरियन को ट्रेड व इंडस्ट्री क्षेत्र से पद्मश्री मिला था. अब भी सरकार ने एग्रीकल्चर के लिए कोई श्रेणी नहीं बनाई है, लेकिन अन्य श्रेणी के जरिये ही एक नई शुरुआत हो गई है. कृषि के जानकार बता रहे हैं कि इससे खेती-किसानी में इनोवेटिव काम करने की स्पर्धा बढ़ेगी.



प्रतीकात्मक तस्वीर






एग्रीकल्चर इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर साकेत कुशवाहा के मुताबिक, कृषि प्रधान देश में इसकी शुरुआत तो पहले ही हो जानी चाहिए थी. किसानों के लिए यह खुश होने का मौका है कि वो अब पद्म अवॉर्ड से वंचित नहीं रहेंगे. जो नई तकनीक से खेती-किसानी में अच्छा करेगा उसके लिए संभावना तो बनी. यह अन्नदाता का सम्मान है. सरकार को एक इसके लिए बकायदा एग्रीकल्चर कैटेगरी बनाना चाहिए. ताकि भविष्य में भी इसे जारी रखा जा सके.
9.2 करोड़ किसान परिवारों को साधने की कोशिश



सियासी जानकारों का कहना है कि साल 2014 में सरकार बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने किसानों के मसलों को सबसे ऊपर रखा था, लेकिन अब खेती-किसानी से जुड़े सवालों पर खुद मोदी सरकार घेरी जा रही है. देश में 9.2 करोड़ किसान परिवार हैं. इसका मतलब करीब 45 करोड़ लोग. वे लोग जो गांवों में रहते हैं और सबसे ज्यादा वोट करते हैं. किसानों को पद्मश्री देना इस वोटबैंक को साधने के लिए एक बड़ा दांव हो सकता है.



(सांकेतिक तस्वीर)




आमतौर पर सरकार के खिलाफ विरोध का झंडा उठाए रखने वाले भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने पद्मश्री वाली पहल का स्वागत किया है. टिकैत ने कहा, सरकार के इस कदम का स्वागत किया जाना चाहिए कि आजादी के सात दशक बाद किसी ने उन्हें इसके लायक समझा. इससे किसान नए-नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित होंगे.



सम्मान के लिए चयनित हुए ये किसान



जिन किसानों को पद्म सम्मान के लिए चयनित किया गया है उनमें हरियाणा के कंवल सिंह चौहान, बिहार की राजकुमारी देवी, गुजरात के वल्लभभाई वासराभाई मारवानिया,  राजस्थान के जगदीश प्रसाद पारिख, हुकुमचंद पाटीदार, ओडिशा की कमला पुझारी, उत्तर प्रदेश के भारत भूषण त्यागी, रामशरण वर्मा, आंध्र प्रदेश के वेंकटेश्वर राव यदलापल्ली और मध्य प्रदेश के बाबूलाल दहिया शामिल हैं. एक अवॉर्ड एग्रीकल्चर साइंस के लिए बलदेव सिंह ढिल्लन को दिया जाएगा. वो पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के वीसी हैं.



इस तरह लिया गया फैसला?



केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने न्यूज18हिंदी को बताया कि किसानों के लिए पद्म अवॉर्ड की मांग उठने के बाद हमने तय किया कि अन्नदाता को जरूर यह सम्मान मिलना चाहिए, क्योंकि वो देश का पेट भरता है. मैंने इस मसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाया. उन्होंने इसे बहुत संजीदगी से लिया. फिर किसानों की सूची बननी शुरू हुई. ये तय हुआ कि विशुद्ध किसान का ही चयन किया जाएगा. हजार से अधिक किसानों ने एंट्री की थी. उसमें से उन्हें चयनित किया गया जिन्होंने खेती में कुछ नया किया है. आगे भी हम इसे जारी रखेंगे.



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