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दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020: BJP के सामने पांच बड़ी चुनौतियां!
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ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: January 22, 2020, 12:19 PM IST
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020: BJP के सामने पांच बड़ी चुनौतियां!
क्या दिल्ली बीजेपी का सियासी वनवास खत्म करवा पाएंगे मोदी-शाह?

बीजेपी दिल्ली की सत्ता के लिए बीते दो दशक से संघर्ष कर रही है, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली है, इस बार के विधानसभा चुनाव में भी उसकी चुनौतियां कम नहीं हैं

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  • Last Updated: January 22, 2020, 12:19 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election 2020) में आम आदमी पार्टी (AAP) के हौसले बुलंद दिखाई दे रहे हैं. इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) अपने काम की बदौलत सरकार का लाइसेंस रिन्यू करवाने के लिए जनता के बीच हैं. जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी (BJP) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) के चेहरे की बदौलत चुनाव लड़ रही है. वो केंद्र सरकार के कार्यों के भरोसे है. लेकिन क्या मोदी-शाह के नाम पर बीजेपी का 21 साल पुराना सियासी वनवास खत्म होगा? जबकि आम आदमी पार्टी ने एजुकेशन, बिजली और पानी जैसे जमीनी मुद्दों पर काम किया है और यही उसका ट्रंप कार्ड है.

हालांकि, यह चुनाव है और उसमें समीकरण कब पलट जाएं, पता नहीं. हमने राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई और आलोक भदौरिया से पूरे माहौल को लेकर बातचीत की. उन्होंने दिल्ली में बीजेपी के सामने पांच बड़ी चुनौतियां गिनवाईं.

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क्या अरविंद केजरीवाल को तीसरी बार दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने से रोक पाएगी बीजेपी?


बीजेपी के सामने चुनौतियां

>>पार्टी के पास कोई स्थानीय स्ट्रांग पर्सनैलिटी नहीं है. जैसे कभी मदनलाल खुराना हुआ करते थे. बिना चेहरे के चुनाव.

>>पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल दिल्ली के बड़े स्थानीय नेता हैं लेकिन इस बार के चुनाव में उनकी सक्रियता नजर नहीं आ रही.

>>अकाली दल के साथ बीजेपी का 21 साल पुराना गठबंधन टूट गया है. इससे सिख मतदाताओं पर असर पड़ सकता है.>>CAA-NRC पर विरोध के चलते बीजेपी को मिलने वाला मुस्लिम वोट उससे छिटक सकता है. इन प्रदर्शनों में सिखों की भी मौजूदगी दिख रही है. CSDS के एक सर्वे के मुताबिक 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी को सात फीसदी मुस्लिम वोट मिले थे.

>>बीजेपी के रणनीतिकारों को उम्मीद थी कि CAA से हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण होगा, लेकिन पार्टी को इससे कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है.

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क्या दिल्ली के विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल-बीजेपी का गठबंधन टूटने का फर्क पड़़े़े़े़गा? (फाइल फोटो)


पार्टी के लिए सकारात्मक बात

>>कश्मीरी पंडित और 370 को पार्टी भुनाने की कोशिश करेगी. यह पार्टी के पुराने हथियार हैं, जिन्हें अब और धार मिली है.

>>नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव होने से भितरघात की संभावना कम है. पिछले साल मोदी के नाम पर ही लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने दिल्ली की सभी सातों सीटों पर जीत हासिल की.

>>कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने का दांव आम आदमी पर असर डालेगा. इससे फायदा मिलने की उम्मीद है.

बीजेपी अपना एजेंडा बता रही है, केजरीवाल की पोल भी खोल रही
दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता नवीन कुमार का कहना है कि हम दिल्ली की जनता के बीच अपने विकास मॉडल को लेकर जा रहे हैं. साथ में आम आदमी पार्टी की पोल भी खोल रहे हैं. हम जनता को बता रहे हैं कि बिजली फ्री नहीं है बल्कि आम जनता के टैक्स का पैसा बिजली कंपनियों को सब्सिडी के रूप में लुटाया जा रहा है. पिंक टिकट के नाम पर पैसों का हेरफेर किया जा रहा है. हमारे सामने कोई चुनौती नहीं है. इस बार हमारा सियासी वनवास जरूर खत्म होगा.

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First published: January 22, 2020, 12:00 PM IST
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