दिल्ली में अब नहीं होगा किसी भी बाहरी व्यक्ति का इलाज! जानें कारण...
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दिल्ली में अब नहीं होगा किसी भी बाहरी व्यक्ति का इलाज! जानें कारण...
दिल्‍ली के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री सतेंद्र जैन ने बीते दिनों पांच डॉक्‍टरों की कमेटी का गठन किया था. (फाइल फोटो)

दिल्ली सरकार की ओर से गठित कमेटी ने सौंपी अपनी रिपोर्ट, कहा- राजधानी के अस्पतालों में बाहरी मरीजों को लिया तो तीन दिन में भर जाएंगे सभी बेड.

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 नई दिल्ली. कोरोना वायरस COVID-19) के बढ़ते संक्रमण के बीच अब संभावना है कि दिल्ली के अस्पतालों में सिर्फ स्‍थानीय लोगों का ही इलाज हो. ऐसा इसलिए क्योंकि दिल्ली सरकार की ओर से गठित पांच डॉक्टरों की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को दे दी है और उन्होंने राजधानी में उपलब्‍ध स्वास्‍थ्य सुविधाओं का इस्तेमाल दिल्लीवासियों के लिए ही किए जाने की बात कही है. ऐसे में अब बाहर से इलाज के लिए दिल्ली आने वाले लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है. कमेटी ने सरकार को कहा है कि दिल्ली के अस्पतालों में यदि बाहरी मरीजों को इलाज के लिए आने दिया गया तो यहां पर मौजूद सभी बेड 3 दिन के अंदर भर जाएंगे. साथ ही चिकित्सकीय ढांचा भी इस भार को नहीं उठा सकेगा.


बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 1 जून को राजधानी के बॉर्डर सील करने को लेकर दिल्ली की जनता से सुझाव मांगे थे. वहीं 2 जून को उन्होंने विशेषज्ञों की कमेटी का गठन किया था.


मरीजों का इलाज नहीं होगा
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार ने अगर इस कमेटी की रिपोर्ट को लागू किया तो संभव है कि आने वाले दिनों में दिल्ली में बाहर से आने वाले कोरोना मरीजों का इलाज नहीं हो पाएगा. साथ ही अन्य बीमारियों के ‌इलाज के लिए आने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं किया गया है कि कोरोना पीड़ितों के अलावा किसी बीमारी के इलाज के लिए आने वाले मरीज को भी इसी श्रेणी में रखा जाएगा या नहीं. दिल्ली सरकार ने पिछले सप्ताह ही डॉ. महेश वर्मा की अध्यक्षता में पांच डॉक्टरों की कमेटी गठित की थी.










सीएम ने लगाया निजी अस्पतालों पर आरोप
इससे पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने दोटूक लहजे में कहा कि दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों (Private Hospital) को कोरोना मरीजों का इलाज करना ही होगा. उन्होंने चेतावनी दी कि इलाज से इनकार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों द्वारा मरीजों को एडमिट करने के नाम पर पैसा वसूली के मामले सामने आने के बाद सीएम ने ये चेतावनी दी है. सीएम ने कहा कि ऐसे कुछ ही अस्पताल हैं, जो इस तरह के काले कारोबार में लगे हैं. अधिकतर निजी अस्पताल सही तरीके से काम कर रहे हैं.

हर प्राइवेट अस्पताल में नियुक्त होगा दिल्ली सरकार का एक प्रतिनिधि
दिल्ली सरकार का एक प्रतिनिधि हर प्राइवेट अस्पताल में नियुक्त किया जाएगा, जो वहां उपलब्ध बेड के बारे में जानकारी सरकार को देगा. अगर किसी अस्पताल ने बेड के बारे में लोगों को गलत जानकारी दी तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. सीएम ने यह भी कहा कि कोरोना संदिग्ध मरीज के इलाज से भी अस्पताल इनकार नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि अगर कोई अस्पताल जांच के नाम पर मरीजों के इलाज से इनकार करता है. मरीजों को खुद ही टेस्ट कराने को कहता है, तो इस पर कार्रवाई होगी. अगर कोरोना का संदिग्ध मरीज प्राइवेट अस्पताल पहुंचता है, तो उसका टेस्ट कराने और इलाज करने की जिम्मेदारी भी अस्पताल की ही होगी. कोई भी निजी अस्पताल अपनी इस जिम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकता.



ये भी पढ़ेंः सीएम केजरीवाल का आरोप- बेड की 'कालाबाजारी' कर रहे हैं प्राइवेट हॉस्पिटल

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