तिहाड़ जेल की विदेशी महिला कैदियों को सताने लगा कोरोना का डर, पैरोल की मांग
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तिहाड़ जेल की विदेशी महिला कैदियों को सताने लगा कोरोना का डर, पैरोल की मांग
सहायक अधीक्षक ने 22 मई को आम्रपाली अस्पताल में खुद चैकअप कराया जिनकी 24 मई को रिपोर्ट पॉजिटिव आई.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर्ड कमेटी (HPC) ने कोरोनावायरस (Coronavirus) के चलते दिल्ली की जेलों के अंडर ट्रायल कैदियों की पैरोल के मानदंड आसान कर दिए हैं. विदेशी कैदियों को इस छूट से बाहर रखा गया है.

  • News18India
  • Last Updated: April 13, 2020, 11:07 AM IST
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नई दिल्ली: तिहाड़ जेल (Tihar jail) में बंद 54 विदेशी महिला कैदियों ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए पैरोल की शर्तों को आसान बनाने की मांग की है. यह मांग कोरोनावायरस (Coronavirus) के मद्देनजर की गई है. इन 54 महिलाओं ने इस बारे में हाई पावर्ड कमेटी (एचपीसी) को पत्र लिखा है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद गठित की गई थी. पत्र में कहा गया है कि कोविड-19 (Covid-19) आने के बाद भारतीय कैदियों के लिए पैरोल और अंतरिम जमानत के मानदंड आसान कर दिए गए हैं, लेकिन विदेशियों के लिए ऐसा नहीं किया गया है.

विदेशी महिला कैदियों ने अपने पत्र में कहा है, ‘हम निवेदन करते हैं कि इस महत्वपूर्ण समय पर हमारे साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए. पैरोल, अंतरिम जमानत या छूट का लाभ हम सभी को दिया जा सकता है. हम भी इंसान हैं और हमें भी कोविड -19 का संक्रमण होने का खतरा है.’ यह पत्र जस्टिस हेमा कोहली की अध्यक्षता वाली हाई पावर्ड कमेटी (High Powered Committee) को भेजा गया है.

‘द हिंदू’ के मुताबिक इन महिलाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेट अजय वर्मा ने बताया कि कई विदेशी महिलाएं बीमार हैं. ऐसे में उन्हें कोरोना के संक्रमण का गंभीर खतरा है. उन्होंने हाई पावर्ड कमेटी (HPC) से आग्रह किया कि वे जोखिमों के मद्देनजर अंतरिम रिहाई या आपातकालीन पैरोल के मानदंडों को शिथिल करने पर विचार करें.



एचपीसी ने पिछले दिनों दिल्ली की जेलों के अंडर ट्रायल कैदियों की रिहाई के मानदंड में ढील दी थी. एचपीसी ने साथ ही सिफारिश की कि अंडर ट्रायल कैदियों को, जो विदेशी नागरिक हैं, उन्हें छूट नहीं दी जाएगी. एचपीसी के ये निर्देश सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय के बाद आए थे. कोर्ट ने कोविड-19 वायरस के खतरे को देखते हुए जेलों के बारे में चिंता व्यक्त की थी.
एडवोकेट वर्मा ने एचपीसी को लिखे पत्र में कहा कि विदेशी राष्ट्रीय महिलाएं यह जानने के बाद डरी हुई हैं कि उन्हें पैरोल और अंतरिम जमानत के मानदंडों की आसान शर्तों से बाहर रखा गया है. इसके बाद उन्होंने यह मामला कमेटी के सामने रखने का निर्णय लिया. पैरोल के मानदंड आसान किए जाने के बाद जेल में कैदियों की संख्या 17,552 से घटकर 16,179 रह गई है. इस संख्या में और कमी आ सकती है.

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