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सावधान! 20 साल पहले पेड़ काटने वालों को इस वजह से वन विभाग भेज रहा नोटिस, भरना पडे़गा लाखों रुपये का जुर्माना

विभाग ने निरीक्षण के बाद ये कदम उठाया है.

विभाग ने निरीक्षण के बाद ये कदम उठाया है.

Forest and Wildlife Department: दिल्‍ली के वन एवं वन्‍यजीव विभाग ने करीब 20 साल पहले पेड़ काटने के बाद जुर्माना नहीं भरने वाले या फिर उसके लिए प्रतिपूरक वृक्षारोपण (Tree Plantation) नहीं करने वालों के खिलाफ सख्‍त कदम उठाया है.

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    नई दिल्‍ली. देश की राजधानी दिल्‍ली के वन एवं वन्‍यजीव विभाग (Forest and Wildlife Department) ने पेड़ काटने वालों के खिलाफ सख्‍त कदम उठाया है. विभाग अब ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, जिन्‍होंने करीब दो दशक पहले पेड़ काटने का जुर्माना जमा नहीं किया या फिर उसके लिए प्रतिपूरक वृक्षारोपण (Plantation) नहीं किया था. इस बाबत विभाग लोगों को नोटिस भेजकर जुर्माना भरने के लिए कह सकता है.

    बहरहाल, दिल्‍ली के वन एवं वन्यजीव विभाग ने वर्ष 2002 से लेकर 2010 तक दक्षिण संभाग में होने वाले उल्लंघनों के लिए अब तक नोटिस जारी कर वर्ष 2002 से बकाया वसूलने के लिए एक अभियान शुरू किया है. इनमें एक पेड़ काटने के लिए राशि का भुगतान न करना या फिर पौधे के प्रतिपूरक रोपण या अनिवार्य वृक्षारोपण नहीं करने के लिए पर जुर्माना लगाया गया है.

    वन विभाग के सीनियर अधिकारी ने कहा कि पेड़ काटने पर जुर्माना 34500 रुपये से लेकर कई लाख रुपये तक हो सकता है. इसके साथ कहा कि कई वर्षों से बकाया राशि की वसूली के लिए अभियान शुरू किया गया है, जिसमें सात साल बाद कटाई करने की अनुमति देने के बाद साइट पर अनिवार्य निरीक्षण किया गया था. इस दौरान काफी संख्‍या में लोगों ने वन विभाग से किया गया अपना वादा पूरा नहीं किया.

    ऐसे तय होता है जुर्माना
    वन विभाग के अधिकारी ने बताया है कि अगर कोई व्यक्ति पेड़ काटना चाहता है तो उसे दो विकल्प दिए जाते हैं. पहला, सुरक्षा जमा राशि एकत्र की जाती है, जोकि पेड़ गिरने की वास्तविक राशि होती है. इसमें पौधरोपण और पांच साल तक पौधे के रख-रखाव के लिए जो पैसा खर्च होता है उसे भी शामिल किया जाता है. वहीं, प्रत्येक पेड़ को काटे जाने के लिए 10 पौधे लगाने और पांच वर्षों तक उसकी देखभाल करने का नियम भी है. साथ ही अधिकारी ने कहा कि कुछ मामलों में लोग कहते हैं कि वे प्रतिपूरक वृक्षारोपण स्वयं करेंगे, लेकिन वे ऐसा नहीं करते हैं. इस वजह से विभाग को ये कदम उठाना पड़ा है.

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