2014 के बाद कितनी बढ़ी किसानों की इनकम बताती क्यों नहीं सरकार: हरीश रावत
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2014 के बाद कितनी बढ़ी किसानों की इनकम बताती क्यों नहीं सरकार: हरीश रावत
पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री हरीश रावत ने किसानों की आय को लेकर सरकार से सवाल किया है

पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यूपीए ने अपने दस साल के कार्यकाल में किसानों की आय तीन गुना कर दी थी, बीजेपी सरकार ने छह साल में कितना किया बताती क्यों नहीं?

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  • Last Updated: March 18, 2020, 2:22 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री हरीश रावत (Harish Rawat) ने कहा है कि अगर मोदी सरकार में किसानों की आय (Farmers Income) बढ़ी है तो सरकार उसे बताती क्यों नहीं. सांसद लोकसभा और राज्यसभा में किसानों की आय के बारे में सवाल पूछते रहते हैं लेकिन सरकार बताती नहीं. मौजूदा सरकार भी उसी 2013 के आंकड़े से काम चलाती है जो कांग्रेस के समय आया था. दरअसल, किसानों की स्थिति खराब होती जा रही है, उनकी इनकम बढ़ी नहीं है इसलिए सरकार बता नहीं पा रही है और न ही इस बारे में कोई सर्वे करवा रही है. न्यूज18 हिंदी से बातचीत करते हुए रावत ने यह बात कही.

रावत ने कहा कि मनमोहन सरकार ने कृषि परिवारों के आर्थिक स्थिति का 2013 में जो मूल्यांकन करवाया था उसमें प्रति किसान परिवार औसत मासिक आय 6426 रुपये हो गई थी. जबकि 2003 में यह सिर्फ 2115 रुपये ही थी.  हम इसे संतोषजनक नहीं मानते लेकिन हम ये कहते हैं कि हमने यूपीए के 10 साल के कार्यकाल में किसानों की आय तीन गुना कर दी थी और बीजेपी पिछले छह साल में दोगुना भी नहीं कर पाई. हमने कुछ छिपाया नहीं, जितनी आय थी उसे बताया. अगर बीजेपी ने किसान की आय बढ़ाई है तो उसे बताना चाहिए.

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किसानों की आय पर सरकार कोई साफ जवाब नहीं दे पा रही है (प्रतीकात्मक फोटो)




रावत ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी होना पूरी तरह संभव है लेकिन उसके लिए कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाना होगा. रिसर्च बढ़ाना होगा. रिसर्च कैसे बढ़ेगा जब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research) में वैज्ञानिकों के 6543 में से 1365 पद खाली हैं. पूर्व कृषि मंत्री ने कहा कि आज सरकार कुछ फसलों का दाम लागत से डेढ़ गुना देने का दावा कर रही है लेकिन असली सवाल ये है कि उपज कितने किसानों की खरीदी जा रही है. जब खरीद ही नहीं होगी तो फिर दाम बढ़ाने से क्या फायदा.
50 किलो यूरिया वाली बोरी अब 45 किलो की 

रावत उत्तराखंड के पूर्व सीएम भी रह चुके हैं. उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में काफी हेरफेर की जा रही है. इससे किसान ठगे जा रहे हैं. इसका बड़ा नमूना खाद है. कांग्रेस के समय जितने दाम में यूरिया का 50 किलो का पैकेट मिलता था अब उतने में सिर्फ 45 किलो मिल रहा है. किसी को विश्वास न हो तो देख ले यूरिया की बोरी अब 45 किलो की हो गई है.

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