BJP के पूर्व सांसद बोले-ऐतिहासिक गौरव की स्थापना योजना बना रही मोदी सरकार, प्रसंगों को मिलेगा महत्व

इतिहास के उन गौरवशाली प्रसंगों को महत्व दिया जाएगा जिनको अभी तक किन्हीं कारणों से विस्मृत किया गया है.

इतिहास के उन गौरवशाली प्रसंगों को महत्व दिया जाएगा जिनको अभी तक किन्हीं कारणों से विस्मृत किया गया है.

मोदी सरकार (Modi Government) ऐतिहासिक गौरव की स्थापना की योजना बना रही है. उसके तहत इतिहास के उन गौरवशाली प्रसंगों को महत्व दिया जाएगा जिनको अभी तक किन्हीं कारणों से विस्मृत किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 14, 2021, 7:00 PM IST
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नई दिल्ली. भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय ने कहा है कि मोदी सरकार (Modi Government) ऐतिहासिक गौरव की स्थापना की योजना बना रही है. उसके तहत इतिहास के उन गौरवशाली प्रसंगों को महत्व दिया जाएगा जिनको अभी तक किन्हीं कारणों से विस्मृत किया गया है.

उन्होंने कहा कि भारतीय समाज और संस्कृति को एक दौर में भयानक संत्रास का सामना करना पड़ा है. ऐसे में अपने धर्म पर टिके रहना बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य था. इस दौर में ऐसे बहुत से महापुरुष ऐसे हुए  जिन्होंने अपने समाज और संस्कृति को बचाने के लिए अपने प्राणों तक की बलि दे दी. ऐसे महान व्यक्तित्व  को इतिहास में यथोचित महत्व नहीं दिया गया.

शिवाजी की पुत्रवधू ताराबाई भोंसले, बाबा बघेल सिंह हो या चोल, चेर वंश की जानकारी हो या बंदा सिंह बहादुर या महाराज आनंदपाल हों या मराठा वंश आदि अनेक ऐतिहासिक प्रसंग और शख्सियत हैं जिनको इतिहास लेखन के समय यथोचित महत्व नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि अपने गौरव और सम्मान के लिए इतिहास की सही जानकारी होना जरूरी है.

पूर्व राज्यपाल डॉ ओ पी कोहली ने कहा कि हिंदू पंचांग पूर्णता वैज्ञानिक है. लेकिन दुर्भाग्य है कि उसे  गौरवशाली स्थान नहीं प्रदान किया गया है. आज इस गौरव को स्मरण करने का अवसर है. भारत में विविधता है और विविधता में एकता है. वर्ष प्रतिपदा को देश में अलग-अलग नामों से जाना जाता है और मनाया जाता है. कहीं उगादि पर्व, कहीं गुड़ी पड़वा, कहीं चेरोबा तो कहीं नवरेह आदि अलग-अलग नामों से, अलग-अलग क्षेत्रों में मनाया जाता है. इससे  विविधता में एकता ही सिद्ध होती है.
बताते चलें कि नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (NDTF) के द्वारा वैशाखी और हिंदू नव वर्ष चैत्र शुक्ल वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर आक्रमणों की गर्त में विस्मृत हिंदू विरासत विषय पर आयोजित परिचर्चा में वयक्त किए.

फ्रंट के अध्यक्ष डॉ ए के भागी ने कहा कि एनडीटीएफ टीचर्स के काम के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और उसके गौरव की प्रतिष्ठा के लिए भी वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध संगठन है. आने वाले समय में संगठन की ओर से शिक्षकों के स्थायित्व को लेकर हर संभव प्रयास किया जाएगा.

एनडीटीएफ का प्रयास होगा कि शिक्षक स्थाई होकर विश्वविद्यालय को आगे लेकर जाएं. उन्होंने बताया कि प्रमोशन को लेकर हमने सक्रियता से कार्य किया है. इसका परिणाम यह हुआ है कि दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) में लगभग 4000 के करीब शिक्षकों के प्रमोशन संभव हो पाए हैं.



राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) पर उन्होंने कहा कि सरकार के वित्त पोषण और विश्वविद्यालय की संरचना एवं प्रबंधन को लेकर किसी तरह का समझौता संभव नहीं है.

किरोड़ीमल महाविद्यालय की डॉ शोभा कौर ने इस अवसर पर वैशाखी और उससे जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि यह पर्व स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का पर्व है. वैशाखी पीड़ित जनता में वीरता का संचार करने वाला पर्व है.

संगठन के महासचिव डॉ बीएस नेगी ने कहा के चैत्र शुक्ल वर्ष प्रतिपदा और वैशाखी राष्ट्रीय मूल्यों और सांस्कृतिक मूल्यों से ओतप्रोत करने वाले पर्व है. इस कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के सैकड़ों शिक्षकों ने हिस्सेदारी की.
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