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गाजियाबाद की पूर्व डीएम निधि केसरवानी के अलावा एक और पूर्व डीएम पर हो सकती है कार्रवाई, जानें पूरा मामला

जांच में दूसरे पूर्व डीएम का भी है नाम.

जांच में दूसरे पूर्व डीएम का भी है नाम.

दिल्‍ली-मेरठ एक्‍सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की गयी जमीन का चार गुना अधिक मुआवजा दिलाने के मामले पर गाजियाबाद की पूर्व डीएम निधि केसरवानी को निलंबित कर दिया गया है. आरोप है कि मुआवजा अपने रिश्‍तेदारों को दिलवाया था. इनके साथ गाजियाबाद के पूर्व डीएम विमल कुमार शर्मा को दोषी पाया गया था, उन पर भी कार्रवाई हो सकती है. शर्मा सेवानिवृत्‍त हो चुके हैं.

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    गाजियाबाद. दिल्‍ली-मेरठ एक्‍सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की गयी जमीन का चार गुना अधिक मुआवजा दिलाने के मामले पर गाजियाबाद की पूर्व डीएम निधि केसरवानी को निलंबित कर दिया गया है. आरोप है कि मुआवजा अपना रिश्‍तेदारों को दिलवाया था. आईएएस अधिकारी निधि केसरवानी वर्तमान में केंद्र सरकार में डिप्टी सेक्रेटरी नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर में तैनात हैं. इनके साथ गाजियाबाद के पूर्व डीएम विमल कुमार शर्मा को दोषी पाया गया था, उन पर भी कार्रवाई हो सकती है. शर्मा सेवानिवृत्‍त हो चुके हैं.

    यह एक्सप्रेसवे 82 किलोमीटर लंबा है. एक्सप्रेसवे का 31.77 किमी हिस्सा गाजियाबाद में है. गाजियाबाद में भूमि अधिग्रहण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा-3ए की अधिसूचना आठ अगस्त 2011 को जारी हुई. इस धारा के तहत भूमि अधिग्रहण का इरादा जताया गया. वहीं, धारा-3डी के तहत भूमि को अधिगृहीत किए जाने की अधिसूचना 2012 में जारी की गई. अधिगृहीत की जाने वाली भूमि का अवार्ड 2013 में घोषित हुआ था.

    अवार्ड के खिलाफ गाजियाबाद के चार गांवों-कुशलिया, नाहल, डासना और रसूलपुर सिकरोड़ के किसानों ने आर्बिट्रेशन वाद दाखिल किए. 2016 और 2017 में तत्कालीन जिलाधिकारी/आर्बिट्रेटर ने नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत जमीन के डीएम सर्किल रेट के चार गुना की दर से मुआवजा देने के निर्णय किए. मामले की शिकायत होने पर तत्कालीन आयुक्‍त डॉ. प्रभात कुमार ने इसकी जांच कराई. अपनी जांच रिपोर्ट में उन्होंने धारा-3डी की अधिसूचना के बाद जमीन खरीदने, आर्बिट्रेटर द्वारा प्रतिकर की दर बढ़ाने और बढ़ी दर से मुआवजा दिए जाने को गलत ठहराया.

    चार गुना अधिक मुआवजा

    जांच के दायरे में आने वाले चार गांवों की अर्जित भूमि (क्षेत्रफल 71.1495 हेक्टेयर) का शुरू में जब अवार्ड घोषित हुआ था, तब मुआवजे के लिए कुल 111 करोड़ रुपये का आकलन किया गया था. आर्बिट्रेशन के तहत प्रतिकर की दरें बढ़ाए जाने से यह रकम तब 486 करोड़ रुपये हो गई थी.

    ये है आरोप

    आरोप है कि इस घोटाले में अधिकारियों ने शुरुआत में किसानों से सस्ते रेट पर जमीन खरीद ली और फिर उसे अपने रिश्तेदारों को खरीदवाकर सरकार को चार गुना रेट पर बिकवा दी गई थी. आयुक्‍त ने जांच में गाजियाबाद के तत्कालीन डीएम विमल कुमार शर्मा और निधि केसरवानी समेत कई अधिकारियों-कर्मचारियों को दोषी पाया था. इस वजह से आशंका व्‍यक्‍त की जा रही है कि विमल कुमार शर्मा के साथ अन्‍य अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है.

    Tags: Ghaziabad News, Land scam

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