देशभर में अपराधों की बाल की खाल निकालेंगे ये 3221 अफसर, दी गई खास ट्रेनिंग

प्रतीकात्मक फोटो-एफएसएल घटनास्थल से सबूत जमा कर उनकी गहन जांच करती है.
प्रतीकात्मक फोटो-एफएसएल घटनास्थल से सबूत जमा कर उनकी गहन जांच करती है.

कहते हैं कि अपराध करने वाला कितना भी चालक क्यों न हो वो कोई न कोई सबूत छोड़ ही जाता है. अब ऐसे ही छोड़े गए सबूत के बाल की खाल निकालने के लिए तीन हजार से अधिक अफसर और कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी गई है.

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  • Last Updated: August 2, 2019, 10:28 AM IST
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अपराधी कितनी भी चालाकी से अपराध कर ले, लेकिन अब उसका बचना नामुमकिन है. कहते हैं कि अपराध करने वाला कितना भी चालक क्यों न हो वो कोई न कोई सबूत छोड़ ही जाता है. अब ऐसे ही छोड़े गए सबूत के बाल की खाल निकालने के लिए गृहमंत्रालय की पहल पर तीन हजार से अधिक अफसर और कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी गई है. यह सभी अफसर और कर्मचारी देशभर की फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) और केन्द्रीय फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (सीएफएसएल) में तैनात किए जाएंगे.

इसलिए तैयार की गई एक्सपर्ट की टीम

अक्सर देखा जाता है कि किसी भी केस की सुनवाई के दौरान सबूतों के अभाव में या कमजोर सबूत होने के चलते पुलिस को कोर्ट की फटकार सुननी पड़ती है. वहीं कमजोर सबूत होने पर अपराधी भी इसका फायदा उठाकर छूट जाते हैं या कम सजा होती है.



गृहमंत्रालय ने अपराधों से जुड़े सबूतों पर गंभीरता दिखाते हुए कई कदम उठाए हैं. सबूतों की गहन जांच हो और घटनास्थल से सबूतों को इकट्ठा करते वक्त कोई छेड़छाड़ न हो इसके लिए देशभर के 3221 फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट को खास ट्रेनिंग दी गई है.
प्रतीकात्मक फोटो- एफएसएल की रिपोर्ट बताी है कि घटना कब हुई या गोली किस हथियार से चली.


यौन अपराध के सबूतों के लिए उठाया यह कदम

यौन अपराधों की जांच और उससे जुड़े सबूतों के साथ सावधानी बरतने के लिए भी ठोस कदम उठाए गए हैं. गृहमंत्रालय का मानना यौन अपराध में बिना सबूत या कमजोर सबूतों के किसी भी अपराधी को सजा दिला पाना बहुत ही मुश्किल काम है. इसलिए घटनास्थल से सबूत उठाते वक्त गलती की कोई गुंजाइश नहीं रहे और सभी सबूत इकट्ठा हो जाएं इसके लिए देशभर की एफएसएल और सीएफएसएल को 3120 किट दी गई हैं. इस किट की सहायता से एक्सपर्ट सभी सबूतों को इकट्ठा कर सकेंगे.

फाइल फोटो- इस तरह से एफएसएल घटनास्थल पर बिखरे हुए सबूतों को जमा करती है.


डीएनए यूनिट के लिए राज्यों को दिए 131 करोड़ रुपये

किसी भी अपराध में डीएनए की जांच के गहन एनॉलिसिस के लिए अभी तक देशभर में चण्डीगढ़ की सीएफएसएल के पास ही एक यूनिट है. यह डीएनए की जांच के लिए एक अलग यूनिट है. केन्द्र सरकार ने इसके निर्माण पर करीब 99.76 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. वहीं देश के 13 अन्य राज्यों की एफएसएल को इस तरह की यूनिट तैयार करने के लिए 131 करोड़ रुपये जारी किए हैं.

प्रतीकात्मक फोटो- एफएसएल के एक्सपर्ट घटनास्थल से मिले एक बाल से भी किसी की जानकारी जुटा लेते हैं. .


140 फॉरेंसिक एक्सपर्ट ही पास कर पाए यह टेस्ट

देश क सबसे बड़े एल.एन.जेपी. राष्ट्रीय अपराध शास्त्र एवं विधि विज्ञान संस्थान द्वारा अखिल भारतीय फॉरेंसिक एप्टीट्यूड एंड कैलिबर टेस्ट (एफएसीटी) टेस्ट आयोजित किया गया था. देशभर में आयोजित किए गए इस टेस्ट को सिर्फ 140 फॉरेंसिक एक्सपर्ट ही पास कर पाए हैं. जल्द ही यह एक्सपर्ट राज्य और केन्द्र की एफएसएल में तैनात किए जाएंगे.

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