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Batla House : इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को शहादत के 12 साल बाद गैलेंट्री अवॉर्ड

बटला हाउस एनकाउंटर के दौरान इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा अपनी टीम के साथ. (फाइल फोटो)

बटला हाउस एनकाउंटर के दौरान इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा अपनी टीम के साथ. (फाइल फोटो)

गृह मंत्रालय (Home Ministry) ने शहीद इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित करने की घोषणा की है. इस बार देशभर के 215 पुलिसकर्मियों को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है, जिनमें कई नाम शहीद बहादुरों के भी हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 14, 2020, 4:57 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा (Inspector Mohan Chand Sharma) को उनकी शहादत के 12 साल बाद गैलेंट्री अवॉर्ड (Gallantry Award) दिए जाने की घोषणा की गई. बटला हाउस एनकाउंटर में मोहन चंद शर्मा शहीद हो गए थे. वे दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल में कार्यरत थे. गृह मंत्रालय (home Ministry) ने शहीद इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा और उनकी टीम के इंस्पेक्टर कैलाश सिंह बिष्ट (फिलहाल स्पेशल सेल में), देवेंद्र मलिक और धर्मेंद्र समेत स्पेशल सेल के 6 बहादुरों को इस बार गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित करने की घोषणा की है. गृह मंत्रालय के मुताबिक, इस बार देशभर के 215 पुलिसकर्मियों कोगैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है, जिनमें कई नाम शहीद बहादुरों के भी हैं.

स्पेशल सेल को मिली थी आतंकियों के छुपे होने की सूचना

2008 में हुए बटला हाउस एनकाउंटर की चर्चा होते ही जो नाम सबसे प्रमुखता से उभर कर सामने आता है, वह है इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा का. इस एनकाउंटर की कहानी 13 सितंबर 2008 को दिल्ली के करोल बाग, कनॉट प्लेस, इंडिया गेट और ग्रेटर कैलाश में हुए सीरियल बम ब्लास्ट से शुरू होती है. उस रोज दिल्ली दहल गयी थी. उस सीरियल ब्लास्ट में 26 लोग मारे गए थे, जबकि 133 घायल हो गए थे. दिल्ली पुलिस ने जांच में पाया था कि बम ब्लास्ट को आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन ने अंजाम दिया था. इस ब्लास्ट के बाद 19 सितंबर को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल को सूचना मिली कि इंडियन मुजाहिद्दीन के पांच आतंकी बटला हाउस के एक मकान में मौजूद हैं. इसके बाद पुलिस टीम अलर्ट हो गई. इस टीम की अगुवाई कर रहे थे इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा.



बटला हाउस के लिए रवाना हुए
19 सितंबर 2008 की सुबह आठ बजे इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की फोन कॉल स्पेशल सेल के लोधी कॉलोनी स्थित ऑफिस में मौजूद एसआई राहुल कुमार सिंह को मिली. उन्होंने राहुल को बताया कि आतिफ एल-18 में रह रहा है. उसे पकड़ने के लिए टीम लेकर वह बटला हाउस पहुंच जाएं. राहुल सिंह अपने साथियों एसआई रविंद्र त्यागी, एसआई राकेश मलिक, हवलदार बलवंत, सतेंद्र विनोद गौतम आदि पुलिसकर्मियों को लेकर प्राइवेट गाड़ी से बटला हाउस के लिए रवाना हो गए.

अंदाजा नहीं था कि मिशन इतना खतरनाक है

इस टीम के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा डेंगू से पीड़ित अपने बेटे को नर्सिंग होम में छोड़ कर बटला हाउस के लिए रवाना हो गए. वह अब्बासी चौक के नजदीक अपनी टीम से मिले. सभी पुलिस वाले सादे कपड़ों में थे. उस वक्त पुलिस टीम को यह पूरी तरह नहीं पता था कि बटला हाउस की बिल्डिंग नंबर एल-18 के फ्लैट नंबर 108 में दिल्ली में सीरियल ब्लास्ट को अंजाम देने वाले आतंकवादी छुपे हैं. उनका इरादा महज इतना था कि यह टीम उस फ्लैट में मौजूद लोगों को पकड़ कर पूछताछ के लिए ले जाएगी.

सादे कपड़ों में पहुंचे थे पुलिसवाले

सुबह 10:55 बजे थे. बटला हाउस पहुंचे एसआई धर्मेंद्र कुमार सेल्समैन का लुक बनाए हुए थे. वह चमड़े का जूता पहने और टाई लगाए हुए थे. खुद को फोन कंपनी का एग्जेक्यूटिव बताते हुए वह फ्लैट का दरवाजा खटखटाने लगे. बाकी पुलिस वाले नीचे इंतजार कर रहे थे. इसी बीच इंस्पेक्टर शर्मा सीढ़ियां चढ़कर ऊपर पहुंच गए. उनके साथ कुछ और पुलिसकर्मी भी थे. इस फ्लैट में दो गेट थे. पुलिसकर्मियों ने बाईं ओर वाला दरवाजा अंदर की ओर धकेल दिया. वे अंदर घुस गए. उनके अंदर घुसते ही उनपर फायरिंग होने लगी. तब पुलिसवालों ने भी जवाबी फायरिंग की. कमरे के अंदर पांच लड़के थे. पुलिस की ओर से चली गोली से दो मौके पर ही ढेर हो गए, जबकि तीन लोग फरार होने में कामयाब हुए. मारे गए लड़कों की पहचान आतंकी आतिफ अमीन और साजिद के रूप में हुई, जबकि जो तीन आतंकी फरार हुए उनके नाम आरिज, शहजाद पप्पू और सैफ बताए गए. इसी बीच भागते 3 आतंकियों में से 2 को नीचे खड़ी पुलिस ने दबोच लिया था.

15 मिनट तक होती रही थी फायरिंग

बटला हाउस के इस कमरे में दोनों ओर से तकरीबन पंद्रह मिनट तक फायरिंग होती रही थी. दो आतंकी तो जरूर मार गिराए गए थे पर इस एनकाउंटर में इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को भी दो गोलियां लगी थीं. हवलदार बलवंत के हाथ में भी गोली लगी. गोलियां चलने की आवाज सुन ओवेस मलिक नामक एक शख्स ने 100 नंबर पर फोन करके फायरिंग की खबर दी. पीसीआर से जामिया नगर पुलिस चौकी को इस एनकाउंटर की खबर मिली. मेसेज फ्लैश कर दिया गया था. महज 10 मिनट के अंदर इस गोलीबारी की खबर इलाके में फैल गई. इस मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई. पुलिस भी भारी तादाद में पहुंच गई. उस फ्लैट को सील कर दिया गया.

ज्यादा खून बह जाने से हुई थी इंस्पेक्टर शर्मा की मौत

बुरी तरह जख्मी हो गए मोहन चंद शर्मा को होली फैमिली हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां 8 घंटे चले इलाज के बाद उनकी मौत हो गई. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें पेट, जांघ और दाहिने हाथ में गोली लगी थी. उनकी मौत खून बहने के कारण हुई. पुलिस ने उनकी मौत के लिए शहजाद को जिम्मेदार ठहराया. इंस्पेक्टर शर्मा ने अपनी 21 साल की पुलिस की नौकरी में 60 आतंकियों को मार गिराया था, जबकि 200 से ज्यादा खतरनाक आतंकियों और अपराधियों को गिरफ्तार किया था.
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