Gautam Buddha Nagar : रेप पीड़ितों में जीने की लालसा भरेगी पुलिस सखी सेवा

रेप पीड़ित अक्सर अवसाद के शिकार हो जाते हैं. पुलिस सखी सेवा ऐसे लोगों को अवसाद से बाहर लाने का काम करेगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
रेप पीड़ित अक्सर अवसाद के शिकार हो जाते हैं. पुलिस सखी सेवा ऐसे लोगों को अवसाद से बाहर लाने का काम करेगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

रेप पीड़ितों को पुलिस समझाएगी कि अपराध से बड़ा है जीवन. इसके लिए जनपद की डीसीपी महिला सुरक्षा वृंदा शुक्ला के नेतृत्व में 20 महिला पुलिसकर्मियों की टीम गठित की गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 26, 2020, 7:05 PM IST
  • Share this:
नोएडा. रेप (Rape) की वारदात से बदरंग हुए जीवन में रंग भरने के लिए आज से नोएडा पुलिस (Noida Police) ने एक पहल की है. इस पहल को नाम दिया है पुलिस सखी सेवा (Ploice Sakhi Seva). पुलिस सखी सेवा के जरिए जनपद गौतम बुद्ध नगर (Gautam Buddha Nagar) में रेप पीड़ित बच्चों और युवतियों को नए सिरे से जीवन जीने को प्रेरित किया जाएगा. पुलिस उन्हें समझाएगी कि अपराध से बड़ा है जीवन. इसके लिए नोएडा महिला पुलिस ने पूरी तैयारी कर ली है. जनपद की डीसीपी महिला सुरक्षा वृंदा शुक्ला के नेतृत्व में 20 महिला पुलिसकर्मियों की टीम गठित की गई है. आज कमिश्नरेट ऑडिटोरियम में मनोचिकित्सक विशेषज्ञों ने इस टीम को प्रशिक्षित किया और उन्हें बताया कि रेप के की वारदात से अवसादग्रस्त हुए बच्चे या युवतियों को पुनः मुख्यधारा से कैसे जोड़ना है.

गौतमबुद्ध नगर में नई पहल

दरअसल देखा जाए तो हैवानों की हैवानियत के बाद बहुत से बच्चे मानसिक तनाव में चले जाते हैं और उन्हें वापस मुख्यधारा में लाना बड़ा मुश्किल होता है. खास कर गरीब, निम्न या मध्यवर्गीय परिवार के रेप विक्टिम बेहतर काउंसलर नहीं मिलने की वजह से अवसाद में चले जाते हैं. ऐसे ही अवसादग्रस्त रेप पीड़ितों को मुख्यधारा में लाने की पहल पुलिस ने की है. डीसीपी महिला सुरक्षा शुक्ला ने कहा कि जनपद गौतमबुद्ध नगर में यह एक नई पहल है.



पुलिस सखी सेवा की टीम
पुलिस सखी सेवा इस टीम में 20 महिला पुलिसकर्मी हैं, जिनमें 15 उपनिरीक्षक हैं और 5 काउंसलर. आज इन सभी को मनोचिकित्सक ने प्रशिक्षण दिया है. इसके बाद जनपद में जो घटनाएं घटी हैं, खासकर जो बच्चे अवसाद में चले गए हैं, उन्हें चिन्हित कर टीम उनके परिवार के पास जाएगी और जो पीड़ित बच्चे, युवतियां को अवसाद से बाहर निकालेगी.

हाल के केस हाथ में लें

मनोचिकित्सकों ने पुलिस टीम से कहा कि इस मामले में पुराने केस को हमलोग नहीं ले सकते हैं. क्योंकि वारदात के दो-चार दिन बाद काउंसलिंग शुरू हो जानी चाहिए. ऐसे में अगस्त के बाद की जो घटनाएं हैं उन पर फोकस करेंगे. पुलिस के आला अधिकारियों ने इस टीम से कहा कि मनोचिकित्सक की जो टीम यहां आई हुई है उससे आप केस बाई केस निशुल्क डिस्कशन कर सकते हैं. हमलोगों को मनोचिकित्सकों से सकारात्मक सपोर्ट मिल रही है और हमें पूरा विश्वास है कि जिस सोच के साथ यह पहल की गई है, आनेवाले समय में उसमें हमलोग सफल होंगे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज