Ghaziabad: जिले के कोविड 19 टैली में मार्च से इन छह इलाकों का योगदान 49 फीसद

गाजियाबाद जिले के छह इलाके ऐसे हैं, जहां मार्च से अक्टूबर अंत तक 1000-1000 से ज्यादा केसों का पता चला है. (सांकेतिक तस्वीर)
गाजियाबाद जिले के छह इलाके ऐसे हैं, जहां मार्च से अक्टूबर अंत तक 1000-1000 से ज्यादा केसों का पता चला है. (सांकेतिक तस्वीर)

गाजियाबाद में अक्टूबर तक कोरोना संक्रमण के जितने केस सामने आए हैं, उनमें इन छह इलाके का योगदान 49.12 फीसदी है. ये छह इलाके हैं - इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा, राजनगर, कविनगर और साहिबाबाद.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 7, 2020, 5:26 PM IST
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गाजियाबाद. गाजियाबाद (Ghaziabad) के छह आवासीय इलाकों (residential segments) में जुलाई महीने से कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले में लगातार इजाफा हो रहा है. आलम यह है कि पूरे गाजियाबाद जिले में अक्टूबर तक कोरोना संक्रमण के जितने केस सामने आए हैं, उनमें इन छह इलाके का योगदान 49.12 फीसदी है. ये छह इलाके हैं - इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा, राजनगर, कविनगर और साहिबाबाद. इन इलाकों में बड़ी संख्या में व्यापारी और कारोबारी के अलावा कामकाजी मध्यवर्गीय लोग रहते हैं.

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, गाजियाबाद जिले में 31 अक्टूबर तक कोरोना संक्रमण के कुल 18713 केस सामने आए हैं. इनमें छह इलाके - इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा, राजनगर, कविनगर और साहिबाबाद - ऐसे हैं, जहां मार्च से अक्टूबर अंत तक 1000-1000 से ज्यादा केस का पता चला है. प्रतिशत के लिहाज से यह पूरे जिले के कोरोना संक्रमण के मामले का 49.12 फीसद (9191 कुल केस) है.

गाजियाबाद के जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने कहा 'शुरू में हमने लोनी, खोड़ा और वैशाली जैसे इलाकों में बचाव के कई उपाए अपनाए और इनके बेहद सकारात्मक नतीजे सामने आए. इन छह इलाकों में बहुत ज्यादा संख्या में लोग रहते हैं, जिनमें से बहुत से लोग अपने व्यवसाय के अलावा रोजाना दिल्ली आते-जाते हैं. ये वे लोग हैं जो ज्यादा यात्रा करते हैं और प्रतिदिन ज्यादा संख्या में लोगों के संपर्क में रहते हैं. '



जिलाधिकारी ने कहा कि नवंबर की कार्ययोजना के तहत हम स्थानीय पार्षदों और प्रतिनिधियों के साथ बैठकें करेंगे और आने वाले समय में मामलों की संख्या को कम करने के लिए परीक्षण, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, निगरानी और जागरूकता तेज करने की योजनाएं बनाएंगे. त्योहारी सीजन के दौरान बाजारों में भीड़ होती है. ऐसे में लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना चाहिए और मास्क पहनना चाहिए.
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के पूर्व एपिडेमियोलॉजी और कम्यूनिकेबल डिजिजेज के हेड डॉक्टर ललित कांत ने कहा कि ऐसे इलाकों में कोरोना संक्रमण का मामला ज्यादा तेजी से इसलिए फैल रहा है कि यहां के लोग अपने व्यवसाय के कारण एक-दूसरे के संपर्क में ज्यादा रहते हैं. हालांकि ऐसे इलाके में रहनेवाले लोगों को सर्दियों के इस मौसम में ज्यादा सतर्कता बरतनी चाहिए. क्योंकि इस मौसम में लोग अमूमन घर पर रहते हैं और संक्रमित लोग अपने घर के लोगों में यह बीमारी अनजाने में फैला सकते हैं. हमें यह समझने की जरूरत है कि इस त्योहारी मौसम में इस संक्रमण के ज्यादा पसरने की आशंका है.

ललित कांत ने यह भी कहा कि अभी इस बीमारी से लड़ने के लिए हमें वैक्सिन नहीं मिली है और अगर यह मिल भी जाती है तो उसके सक्सेस रेट पर चीजें निर्भर करेंगी. फिलहाल सबसे जरूरी तो यह है कि लोग बिना मास्क के न निकलें और सोशल डिस्टेंसिंग के मानदंड का पालन करें. इसे लागू करवाना बेहद जरूरी है.
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