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आखिर GNCT बिल में क्‍या है, जिससे बढ़ेगी दिल्ली के उपराज्यपाल की ताकत?

दिल्‍ली के राज्‍यपाल के पास किसी भी राज्‍य के मुख्‍यमंत्री के बराबर का अधिकार होगा.

दिल्‍ली के राज्‍यपाल के पास किसी भी राज्‍य के मुख्‍यमंत्री के बराबर का अधिकार होगा.

2019 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपने फैसले में एलजी (Lieutenant Governor) और दिल्ली सरकार (Delhi Government) की भूमिकाओं और अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट किया. अब गवर्नमेंट ऑफ नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली एक्ट में संशोधन किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 25, 2021, 8:10 AM IST
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नई दिल्ली. दिल्‍ली (Delhi) में लेफ्टिनेंट गवर्नर (Lieutenant Governor) और मुख्यमंत्री के अधिकारों को स्पष्ट करने वाले गवर्नमेंट ऑफ नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली (अमेंडमेंट) बिल 2021 (Government of National Capital Territory of Delhi (Amendment) Bill, 2021) को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिल गई है. राज्‍यसभा में भारी हंगामे के बीच इस बिल को मंजूरी दे दी गई. अब राष्‍ट्रपति के दस्‍तखतक के साथ ही ये बिल कानून बन जाएगा. आखिर सवाल उठता है कि इस बिल में ऐसा क्‍या है जिससे दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री की ताकत कम होगी और लेफ्टिनेंट गवर्नर के जरिए केंद्र को वीटो पावर देता है.

दिल्‍ली में अधिकार को लेकर मुख्‍यमंत्री और एलजी के बीच जंग हमेशा से चर्चा का विषय रही है. जब से दिल्‍ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है तब से मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल और एलजी के बीच किसी न किसी बात पर विवाद होता ही रहा है. हालात यहां तक बिगड़े कि अधिकार की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई. 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में एलजी और दिल्ली सरकार की भूमिकाओं और अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट किया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सीएम और एलजी के बाद विवाद कम तो हुआ लेकिन खत्‍म नहीं हुआ. दिल्‍ली में पिछले काफी समय से चले आ रहे इस विवाद को दूर करने के लिए गवर्नमेंट ऑफ नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली एक्ट में संशोधन लाई है. संसद के दोनों सदनों में पास हो चुके इस बिल के बाद अब एलजी का अधिकार क्षेत्र काफी विस्तृत हो गया है. बिल में प्रावधान है कि राज्य कैबिनेट या सरकार किसी भी फैसले को लागू करने से पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर की 'राय' लेगी.

इस बिल में राज्‍यपाल को किसी भी राज्‍य के मुख्‍यमंत्री के बराबर का अधिकार होगा. इस बात को आसान भाषा में समझना हो तो दिल्‍ली विधानसभा में बनाए गए किसी भी कानून में सरकार से मतलब एलजी से होगा. एलजी को सभी फैसलों, प्रस्‍तावों और एजेंडों के बारे में पहले से जानकारी देना आवश्‍यक होगा. अगर किसी मुद्दे पर मुख्‍यमंत्री और एलजी के बीच मतभेद पैदा होते हैं तो उस मामले को राष्‍ट्रपति के पास भेजा जा सकता है. यही नहीं, एलजी विधानसभा से पारित किसी ऐसे बिल को मंजूरी नहीं देंगे जो विधायिका के शक्ति-क्षेत्र से बाहर हैं. इस तरह के बिल को भी राष्‍ट्रपति के पास भेजा जा सकता है. वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही उसे राज्‍य में लागू किया जा सकेगा.
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सरकार के अधिकार हो जाएंगे सीमित
गवर्नमेंट ऑफ नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली एक्ट के तहत दिल्‍ली में चुनी हुई सरकार के अधिकार सीमित किए गए हैं. इस बिल के आ जाने के बाद दिल्ली विधानसभा खुद ऐसा कोई नया नियम नहीं बना पाएगी जो उसे दैनिक प्रशासन की गतिविधियों पर विचार करने या किसी प्रशासनिक फैसले की जांच करने का अधिकार देता हो. इस बिल के बाद के बाद अधिकारियों को काम की आजादी मिलेगी. इससे उन अधिकारियों का डर खत्‍म होगा जिन्‍हें समितियों की तरफ से तलब किए जाने का डर रहता था.
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