लाइव टीवी

भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को सरकारें संसद में मानती हैं शहीद, दस्तावेज में नहीं
Delhi-Ncr News in Hindi

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: March 23, 2020, 5:41 PM IST
भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को सरकारें संसद में मानती हैं शहीद, दस्तावेज में नहीं
आजादी के 73 साल बाद भी सरकारी रिकॉर्ड में 'शहीद' नहीं हैं भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु

भारत की जनता भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु को शहीद-ए-आजम मानती है लेकिन सरकार नहीं, इसीलिए आजादी के 73 साल बाद भी किसी सरकार ने क्रांतिकारियों को दस्‍तावेजों में यह दर्जा नहीं दिया

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2020, 5:41 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. अपनी सुविधाओं और वेतन-भत्तों को बढ़वाने के लिए पार्टी लाइन से ऊपर उठकर एकजुटता दिखाने वाले नेताओं को आजादी के 73 साल बाद भी उन क्रांतिकारियों के लिए वक्त नहीं मिला जिनकी बदौलत भारत को अंग्रेजी गुलामी की बेड़ियों से मुक्ति मिली. हम बात कर रहे हैं भगत सिंह (Bhagat singh), सुखदेव (Sukhdev) और राजगुरु (Rajguru) की, जिनकी शहादत को आज 89 साल हो चुके हैं. 23 मार्च 1931 को उनके साथी राजगुरु व सुखदेव के साथ लाहौर जेल में अंग्रेजों ने फांसी दे दी थी. जब संसद में 'शहीद' का मुद्दा उठता है तो जो भी पार्टी सत्ता में रहती है उसकी सरकार इन क्रांतिकारियों को शहीद मान लेती हैं लेकिन दस्तावेजों में ऐसा नहीं लिखती.

शहीद-ए-आजम के प्रपौत्र यादवेंद्र सिंह ने न्यूज18 हिंदी से बातचीत में कहा, 'गरम दल यानी क्रांतिकारियों के प्रति जो नजरिया अंग्रेजी हुकूमत का था आजाद भारत की सरकारों का रवैया उससे ज्यादा अलग नहीं है. वरना क्या अपने लहू से भारत को आजाद करवाने वालों को अब तक शहीद का दर्जा तक नहीं मिलता? कैबिनेट में एक प्रस्ताव लाकर सभी गरम दल वालों को आफीशियल रिकॉर्ड में शहीद घोषित किया जा सकता है. लेकिन इसके लिए सांसदों, मंत्रियों के पास शायद वक्त नहीं है. हम कोई रुपया पैसा नहीं मांग रहे. हम वो मांग रहे हैं जिस स्टेटस के क्रांतिकारी हकदार थे. ये दुर्भाग्य है कि अपने नायकों को किसी भी सरकार ने ऑफीशियल रिकॉर्ड में शहीद नहीं माना.' संधू इस मुद्दे को लेकर आंदोलन चला रहे हैं.

Shaheed Diwas, bhagat singh, sukhdev and rajguru, शहीद दिवस, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, martyrs day special, rti of bhagat singh martyr status, भगत सिंह को शहीद का दर्जा पर आरटीआई, yadvinder sandhu, यादवेंद्र संधू, parliament, संसद, भगवंत मान, Bhagwant Mann, aap, आम आदमी पार्टी
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत को आज 89 साल हो चुके हैं.


इसलिए जरूरी है शहीद का दर्जा?



दिल्ली यूनिवर्सिटी में पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाई जाने वाली 'भारत का स्वतंत्रता संघर्ष' नामक किताब में शहीद भगत सिंह को जगह-जगह क्रांतिकारी आतंकवादी कहा गया था. जम्मू यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर एम. ताजुद्दीन ने दिसंबर 2018 में भगत सिंह को कथित रूप से ‘आतंकी’ कहा था. हालांकि बाद में उन्होंने अपने बयान पर सफाई देते हुए माफी मांग ली थी. संधू का कहना है कि सरकार अगर अपनी गलती सुधार ले तो ऐसी घटनाएं बंद हो जाएंगी. फिलहाल, तो आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद भगवंत मान ने भगत सिंह को शहीद का दर्जा देने की मांग की है.

संसद में माना, आरटीआई में क्यों नहीं?

2013, 2016 और 2018 में डाली गई आरटीआई (RTI) में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जवाब नहीं दिया कि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को सरकार ने शहीद का दर्जा दिया है या नहीं या कब दिया. 19 अगस्‍त 2013 को तत्कालीन राज्‍यसभा सांसद केसी त्‍यागी ने  सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा था कि कि गृह मंत्रालय के जो लेख और अभिलेख हैं उनमें भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को शहीद का दर्जा देने का काम नहीं हुआ. इस पर कुसुम राय, जय प्रकाश नारायण सिंह, राम विलास पासवान, राम गोपाल यादव, शिवानंद तिवारी, अजय संचेती, सतीश मिश्र और नरेश गुजराल सहित कई सदस्‍यों ने त्‍यागी का समर्थन किया था.

तब वर्तमान उप राष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू ने बीजेपी नेता के रूप में कहा था कि ‘सरकार को इसे बहुत गंभीरता से लेना चाहिए. वह यह देखे कि भगत सिंह का नाम शहीदों की सूची में सम्‍मलित किया जाए. वे जिस सम्‍मान और महत्‍व के हकदार हैं उन्‍हें प्रदान किया जाए. क्‍योंकि वे स्‍वतंत्रता सेनानियों के नायक थे. देश के युवा उनसे प्रेरित होते हैं’

Shaheed Diwas, bhagat singh, sukhdev and rajguru, शहीद दिवस, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, martyrs day special, rti of bhagat singh martyr status, भगत सिंह को शहीद का दर्जा पर आरटीआई, yadvinder sandhu, यादवेंद्र संधू, parliament, संसद, भगवंत मान, Bhagwant Mann, aap, आम आदमी पार्टी
सिर्फ 23 साल की उम्र में आजादी के लिए फांसी पर झूल गए थे भगत सिंह


तब के संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा था कि ‘सरकार उन्हें बाकायदा शहीद मानती है और अगर सरकारी रिकार्ड में ऐसा नहीं है तो इसे सुधारा जाएगा. सरकार पूरी तरह से उन्‍हें शहीद मानती है और शहीद का दर्जा देती है’. लेकिन ताज्‍जुब यह है अब तक सरकार ने इस बारे में रिकॉर्ड नहीं सुधारा.

2016 में अनुराग ठाकुर ने उठाया था मुद्दा

अनुराग सिंह ठाकुर ने 24 अप्रैल 2016 को संसद में कहा, ‘दिल्ली विश्वविद्यालय में एक किताब जिसका टाइटल 'इंडियाज स्ट्रगल फॉर इंडिपेंडेंस’ है, जिसमें भगत सिंह को रेवोल्यूशनरी टेररिस्ट, आतंकवादी के रूप में दिखाने की कोशिश की गई है....भगत सिंह ने इस देश को आजाद किया तब जाकर हम लोग इस सदन में बैठे हैं...आप भगत सिंह को आतंकवादी नहीं कह सकते.’ उन्होंने इस पुस्तक के बहाने कांग्रेस और लेफ्ट को घेरने की कोशिश की थी. हालांकि, अब तक यूपीए सरकार ने भी भगत सिंह को सरकारी रिकॉर्ड में शहीद घोषित नहीं किया है.

 

ये भी पढ़ें:

भगत भारत-पाकिस्तान दोनों के साझा हीरो हैं भगत सिंह!

Exclusive: देखिए, भगत सिंह की हैंडराइटिंग और जेल डायरी के असली पन्ने

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए दिल्ली-एनसीआर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: March 23, 2020, 4:36 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर