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क्या है Green Hydrogen, क्यों पड़ी इसके लिए पॉलिसी बनाने की जरूरत, विस्तार से जानें पूरा मामला...

क्या है Green Hydrogen, क्यों पड़ी इसके लिए पॉलिसी बनाने की जरूरत, विस्तार से जानें पूरा मामला...

इस पॉलिसी के तहत ग्रीन हाइड्रोनज के मैन्युफैक्चरर्स पॉवर एक्सचेंज से रिन्यूएबल पावर खरीद सकते हैं.

इस पॉलिसी के तहत ग्रीन हाइड्रोनज के मैन्युफैक्चरर्स पॉवर एक्सचेंज से रिन्यूएबल पावर खरीद सकते हैं.

Green Hydrogen Policy: गुरुवार को पॉवर मिनिस्ट्री (Power Ministry) ने ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी पेश की थी. इस पॉलिसी के तहत ग्रीन हाइड्रोनज के मैन्युफैक्चरर्स पॉवर एक्सचेंज से रिन्यूएबल पावर (Renewable Power) खरीद सकते हैं.

दिल्ली. ग्रीन अमोनिया पॉलिसी (Green Ammonia Policy)  जिसे ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी (Green Hydrogen Policy) भी कहा जाता है. इसके बारे में पिछले साल नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi)ने इसका स्वतंत्रता दिवस पर जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि इस पॉलिसी के लॉन्च होने के बाद ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन में बढ़ावा मिलेगा. गुरुवार को पॉवर मिनिस्ट्री (Power Ministry) ने ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी पेश की थी. इस पॉलिसी के तहत ग्रीन हाइड्रोनज के मैन्युफैक्चरर्स पॉवर एक्सचेंज से रिन्यूएबल पावर (Renewable Power) खरीद सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि ग्रीन हाइड्रोजन क्या है और इस पॉलिसी से भविष्य में किस तरह का फायदा होगा.

हाइड्रोजन के इस्तेमाल से पॉल्यूशन नहीं होता
ग्रीन हाइड्रोज एनर्जी एक स्रोत है. पानी से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग करके ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाता है. इस प्रोसेस के लिए इलेक्ट्रोलाइजर का प्रयोग किया जाता है और इलेक्ट्रोलाइजर रिन्यूएबल एनर्जी का प्रयोग करता है. इस प्रोसेस में सोलर और विंड दोनों तरह की एनर्जी शामिल है. केमिकल, आयरन, स्टील, ट्रांसपोर्ट, हीटिंग और पॉवर सभी सेक्टर्स में हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जा रहा है. खास बात यह है कि हाइड्रोजन के इस्तेमाल से पॉल्यूशन नहीं होता. आंकड़ों के अनुसार इलेक्ट्रोलाइजर्स की कम सप्लाई के कारण ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन में समस्या हो रही है. यही कारण है कि लगातार इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार हर चीज के लिए बिजली का उपयोग नहीं किया जा सकता. ऐसे में इंडस्ट्रियल प्रोसेस और हेवी ट्रांसपोर्टेशन के लिए गैस का यूज हो सकता है. बता दे कि सरकार ने इंडिया को ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने का लक्ष्य रखा है. सरकार 2030 तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना चाहती है.

ये सब है पॉलिसी में
इस पॉलिसी के बारे में पॉवर मिनिस्ट्री का कहना है मैन्युफैक्चरर्स चाहें तो खुद रिन्यूएबल एनर्जी फैसिलिटी लगा सकते हैं. मिनिस्ट्री के अनुसार आवेदन प्राप्त होने के 15 दिन के अंदर ओपन एक्सेस जारी कर दिया जाएगा. इसके साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन के मैन्युफैक्चरर्स अपने रिन्यूएबल पावर को डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी को 30 दिन तक रख सकते हैं. जरूरत पड़ने पर वे इसे वापस ले सकते हैं. पॉलिसी में ग्रीन हाइड्रोजन के मैन्युफैक्चरर्स को ‘इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन चार्ज’ से भी छूट दी गई है. यह छूट 25 साल के लिए दी जाएगी लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि प्रोजेक्ट्स 30 जून 2025 से पहले चालू हो जाने चाहिए. ​यदि वे इंटरेस्ट दिखाते हैं तो उन्हें प्रायोरिटी बेसिस पर ग्रीड कनेक्टिविटी मुहैया करवाई जाएगी. इसका उपयोग ग्रीन अमोनिया स्टोर करने लिए किया जाएगा. जानकारी के लिए बता दें कि ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी देश में ग्रीन हाउस गैस के इमिशन में कमी लाने में फायदेमंद साबित होगी.

Tags: Green House Emission, Hydrogen

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