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VIDEO: मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कार्यक्रम में हंगामा, मंच पर मौजूद थे संघ नेता इंद्रेश कुमार
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Updated: January 16, 2020, 5:22 PM IST
VIDEO: मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कार्यक्रम में हंगामा, मंच पर मौजूद थे संघ नेता इंद्रेश कुमार
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के एक कार्यक्रम में प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने सीएए और एनआरसी के खिलाफ नारे लगाए.

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (Muslim Rashtriya Manch) के कार्यक्रम में प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने सीएए (CAA) और एनआरसी (NRC) के खिलाफ नारे लगाए.

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  • Last Updated: January 16, 2020, 5:22 PM IST
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नई दिल्ली. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (Muslim Rashtriya Manch) के कार्यक्रम में हंगामा होने की खबर है. प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (National Register of Citizenship) के खिलाफ नारे लगाए और पोस्टर दिखाए. इस दौरान मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार (Indresh Kumar) भी मौजूद थे.

इस मामले में इंद्रेश कुमार ने बताया कि 7-8 लोग थे. शैतान के रूप में प्रदर्शन किया. मक्का मदीना में जब मुसलमान हज करने जाता है तो उनकी सबसे बड़ी सेरेमनी पत्थर मारने की होती है. ये मानकर कि शैतान है. किन पार्टियों के उकसाने पर ये आए ? लोगों ने उनको जाने को कहा. वो चले गए. आरएसएस नेता ने कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से जुड़ा कोई नहीं था.





क्या है CAA
केंद्र सरकार नागरिकता अधिनियम, 1955 में बदलाव करने हेतु संसद में नागरिकता संशोधन बिल लेकर आई. दोनों सदनों में इस बिल के बहुमत से पास होने के बाद 12 दिसंबर को राष्ट्रपति ने इस पर अपनी मुहर लगा दी. जिसके करीब एक महीने बाद सरकार ने अधिसूचना जारी कर इसे पूरे देश में लागू कर दिया है. इस कानून के मुताबिक अब पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हुए हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दे दी जाएगी. कानून लागू होने से पहले इन्हें अवैध शरणार्थी माना जाता था.

क्यों हो रहा है CAA और NRC को लेकर विरोध प्रदर्शन
सीएए को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों का मानना है कि यह कानून भारत के संविधान के खिलाफ है. प्रदर्शनकारियों का मानना है कि ये भारत के संविधान की सेक्युलर संरचना पर हमला करता है. लोगों का मानना है कि इस कानून के दायरे में पड़ोसी देशों में पीड़ित मुसलमानों को भी शामिल करना चाहिए. उनका यह भी आरोप है कि जब देश में एनआरसी लागू होगा तो दस्तावेजों के अभाव में लाखों लोगों को नागरिकता साबित करने में मुश्किल आएगी या फिर डिटेंशन सेंटर में जाना पड़ेगा.

(इनपुट- नीरज कुमार)

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First published: January 16, 2020, 3:30 PM IST
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