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गुजरात चुनाव: वो 180 मिनट, जब कांग्रेस जीत गई थी

प्रतीकात्मक तस्वीर.

प्रतीकात्मक तस्वीर.

इतना भ्रम बना कि कांग्रेसियों ने इन्हें देखकर उत्साह में पटाखे छोड़ने शुरू कर दिए. लेकिन 12 बजे जाकर मीडिया ने अपनी ग़लती सुधारी,

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    देश में जब भी कोई चुनाव होता है, न्यूज़18 नेटवर्क और ईटीवी की बेजोड़ पकड़ साबित हो जाती है. इस बार भी ग्राउंड पर मौजूदगी और देश के आख़िरी आदमी तक पहुँच के मामले में नेटवर्क सबसे आगे रहा.

    इस बार न्यूज़18 को छोड़ बाक़ी मीडिया की जल्दबाज़ी ने कुछ ऐसे निष्कर्ष निकाल दिए जिन्हें राजनीतिक पंडित सही नहीं मानते.

    सुबह 6 बजे न्यूज़18 हिंदी ने लाइव ब्लॉग के ज़रिए गुजरात और हिमाचल प्रदेश से चुनाव रुझान देने शुरू किए. दोनों सूबों के सियासी गणित की परतें खुलने लगी थीं. न्यूज़18 और ईटीवी के रिपोर्टर्स सीट और विधानसभा क्षेत्रों से अपडेट दे रहे थे. हिमाचल में न्यूज़18 हिंदी संवाददाता विनोद कुमार शिमला में तो अहमदाबाद में न्यूज़18 गुजराती के संपादक संजय कचोट अपनी टीम के साथ मौजूद थे. काउंटिंग सेंटर पर ईटीवी रिपोर्टर्स ने आंखों देखा हाल दर्ज कराना शुरू कर दिया था.

    राजधानी दिल्ली में एक्जिट पोल की खुमारी के चलते प्रवक्ताओं ने टीवी स्टूडियोज़ पहुँचकर ऊंची और आत्मविश्वास भरी आवाज में बोलना शुरू कर दिया था. पहले 40-50 मिनट के बाद जैसे ही ग्रामीण इलाकों के अपडेट मिलने शुरू हुए कांग्रेस प्रवक्ताओं की बांछें खिलने लगीं.

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    ईवीएम से पहले पोस्टल वोटों की जानकारी मिली. हमने रुझान दिखाए, पर कोई फ़ैसला सुनाने से परहेज़ किया. ईटीवी टीम का इनपुट पक्का और भरोसेमंद था, सो कुछ अलग कहने की गुंजाइश ही नहीं थी. यानी असल में जो नज़र आ रहा था, वही वेबसाइट और टीवी स्क्रीन पर चमक रहा था. हालांकि कई टीवी चैनलों ने बढ़त को ही आधार बनाकर भविष्यवाणियां शुरू कर दी थीं.

    तभी साढ़े 10 बजे. और इस दौरान जो-जो चैनल बीजेपी को बहुमत देते दिख रहे थे, अचानक पाला बदलकर कांग्रेस की जीत बताने लगे. हमने फिर संयम बरता और ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद संवाददाताओं की जानकारी को ही सबसे उचित माना, जिन पर भरोसा न करने की कोई वजह नहीं थी. नतीजा यह कि हमारी टैली में बदलाव धीमे दिखाई देने लगे. हालांकि बाद में हम सही साबित हुए क्योंकि वो पुख़्ता भी थे.

    ईवीएम से निकले रुझानों ने साफ़ कर दिया था कि अब तक मुक़ाबला कांटे का था. आसान जीत या करारी हार जैसी कोई चीज़ नहीं दिख रही थी. ईटीवी की पुष्ट सूचनाएं यही संकेत दे रही थीं. मगर साढ़े 10 बजे से 11 बजे के बीच कुछ टीवी चैनल बीजेपी को 110 सीटों की बढ़त दिखाने लगे. न्यूज़18 हिंदी की टैली 104-105 तक ही सीमित रही.

    यह वो वक़्त था जब एक एक सीट पर बढ़त राजनीतिक पटल पर पासा पलटने जैसी भविष्यवाणी होती. मगर संयम फिर काम आया. न्यूज़18 गुजराती ने पूरे राज्य में मौजूद अपने सहयोगी ईटीवी रिपोर्टर्स पर भरोसा किया. कांग्रेस की बढ़त की ख़बर के 10 मिनट भीतर ही कांग्रेस कवर करने वाले न्यूज़18 इंडिया के रिपोर्टर अरुण सिंह ने इनपुट दिया कि राहुल गांधी साढ़े 11 बजे, 24 अकबर रोड पर मीडिया से बात कर सकते हैं. साफ़ था कि कांग्रेस को रुझानों में उम्मीद दिखने लगी थी.

    न्यूज़18 इंडिया के स्टूडियो में कांग्रेस प्रवक्ताओं से लेकर सड़क पर मौजूद हर कार्यकर्ता को लगा कि बड़ा उलटफेर होने जा रहा है. ये प्रवक्ता जीत के बाद शालीन रहने की बात कहने लगे क्योंकि कई जगह कांग्रेस ने बीजेपी को पछाड़ दिया था. गुजरात कांग्रेस मुख्यालय से जीत का निशान बनाए कार्यकर्ताओं की खुशनुमा तस्वीरें भी मिलने लगीं.

    एंकर सुमित अवस्थी और किशोर अजवाणी ने फ़ेसबुक लाइव के दौरान गुजरात की ताज़ा स्थिति अपडेट की. 11 बजते-बजते चैनलों की टैली बदलने लगीं. जो बीजेपी को 110 सीटों तक दिखा रहे थे उनके नंबर गिरकर वही होने लगे जो अब तक न्यूज़18 के रिपोर्टर्स बता रहे थे. धीरे-धीरे ज़्यादातर टेलीविज़न चैनलों के आंकड़ों की टेबल सही हो गईं.

    भ्रम ने छुटवाए पटाखे-

    इस असमंजस, जल्दबाज़ी और उहापोह के दौरान कई चैनलों पर सूचनाएं और ख़बरें गड्डमड्ड हो गए. कुछ तो रुझानों को जीत बताकर एकतरफ़ा जीत का ऐलान करने लगे. नतीजा यह कि इतना भ्रम बना कि कांग्रेसियों ने इन्हें देखकर उत्साह में पटाखे छोड़ने शुरू कर दिए.



    12 बजे जाकर मीडिया ने अपनी ग़लती सुधारी, मगर तब तक अफ़वाह और ग़लत सूचनाओं ने लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी. न्यूज़18 हिंदी की वेबसाइट पर आंकड़े बेशक धीमी रफ़्तार से अपडेट हुए मगर उन्हें ग़लती करने की ज़रूरत नहीं पड़ी. और इसके पीछे था ईटीवी नेटवर्क का सालों का चुनाव अनुभव.

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