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किसानों का 'दिल्ली मार्च' रोकने के लिए हरियाणा में किलेबंदी, दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर सील

केंद्र के बनाए कृषि कानूनों के विरोध में किसान 26 और 27 नवंबर को 'दिल्ली मार्च' करने वाले हैं (फाइल फोटो)
केंद्र के बनाए कृषि कानूनों के विरोध में किसान 26 और 27 नवंबर को 'दिल्ली मार्च' करने वाले हैं (फाइल फोटो)

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (CM Manohar Lal Khattar) ने प्रस्तावित किसान आंदोलन (Farmers Agitation) के मद्देनजर 26 और 27 नवंबर को दिल्ली से लगते तमाम बॉर्डर एरिया को सील करने के आदेश जारी किए हैं

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 25, 2020, 5:37 PM IST
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गुरुग्राम. किसान आंदोलन (Farmers Agitation) को देखते हुए दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर (Delhi-Gurugram Border) पर पुलिसबल की तैनाती शुरू हो गई है. बैरिकेडिंग लगाने के साथ ही यहां दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस की तैनाती का सिलसिला शुरू हो गया है. प्रशासन का कहना है कि किसी भी सूरत में दिल्ली की शांति व्यवस्था और कोरोना महामारी (Corona Virus) को लेकर जारी आदेशों की अवहेलना नहीं करने दी जाएगी. तमाम वाहनों को खाकी की पैनी नजरों से होकर गुजरना होगा.

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (CM Manohar Lal Khattar) ने प्रस्तावित किसान आंदोलन के मद्देनजर 26 और 27 नवंबर को दिल्ली से लगते तमाम बॉर्डर एरिया को सील करने के आदेश जारी किए हैं. 27 नवंबर को किसान अध्यादेशों को लेकर दिल्ली में प्रस्तावित बड़ा किसान आंदोलन है. पिपली में हुए लाठीचार्ज के बाद सरकार किसानों को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है.

गुरुग्राम के उपायुक्त अमित खत्री ने बताया कि मंगलवार को मुख्यमंत्री खट्टर ने स्पष्ट रूप से कोरोना महामारी को लेकर जारी एडवाइजरी को लेकर सख्त निर्देश जारी किए थे. विशेष तौर पर पुलिस को कहा गया है कि तमाम ऐसे लोग जो किसानों के नाम पर दिल्ली की शांति व्यवस्था को भंग कर सकते है उनकी नजरबंदी की जाए.



वहीं बॉर्डर बंदी के बाद रजोकरी बॉर्डर पर जयपुर से दिल्ली जाने वाले रास्ते पर वाहनो की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई हैं.
बता दें कि कृषि कानूनों को वापस लिए जाने को लेकर दबाव बनाने के लिए अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC), राष्ट्रीय किसान महासंघ और भारतीय किसान यूनियन के विभिन्न धड़ों ने हाथ मिलाया है और एक संयुक्त किसान मोर्चा का गठन किया है. 26 और 27 नवंबर को दिल्ली में बुलाए गए इस प्रदर्शन को 500 से ज्यादा किसान संगठनों का समर्थन मिला है.

किसानों को आशंका है कि नए कानूनों से न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म हो जाएगी और वो बड़े कारोबारियों की दया पर निर्भर हो जाएंगे.
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