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गुरुग्राम: धांधलेबाज अफसरों पर मेयर की टेढ़ी नजर, लापरवाह अधिकारियों व कर्मचारियों की लिस्ट तैयार

Dharmbir Sharma | News18 Haryana
Updated: January 17, 2020, 6:31 PM IST
गुरुग्राम: धांधलेबाज अफसरों पर मेयर की टेढ़ी नजर, लापरवाह अधिकारियों व कर्मचारियों की लिस्ट तैयार
मेयर व अधिकारी के बीच खींचतान में पीस रही है गुरुग्राम की जनता

गुरुग्राम (Gurugram) में विकास को लेकर 7 साल पहले नगर निगम (Municipal Corporation) का गठन हुआ था, लेकिन 7 साल बाद भी गुरुग्राम के विकास में वो तेजी नहीं आ पाई जिसकी उम्मीद गुरुग्राम की जनता को थी. आज भी गुरुग्राम में हल्की बारिश होने से विकास कार्यों की पोल खुल जाती है.

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गुरुग्राम. हरियाणा के सबसे धनवान नगर निगम गुरुग्राम (Gurugram Municipal Corporation) एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार अधिकारियों पर सदन की मेयर (Mayor) की टेढ़ी नजर है. गुरुग्राम की मेयर मधु आजाद (Madhu Azad) की माने तो नगर निगम में ऐसे कई अधिकारी हैं जो काम की जगह धांधलेबाजी करते हैं. बीते कुछ दिन पहले ही निगम के अधिकारी को कैबिनेट मंत्री अनिल विज (Anil Vij) ने निलंबित कर दिया था. उसके बाद भी अधिकारियों की धांधलेबाजी कम होने का नाम ले रही है. गुरुग्राम की मेयर मधु आजाद जल्द ही प्रदेश के मुखिया मनोहर लाल (Manohar Lal Khattar) से मुलाकात कर लापरवाह अधिकारियों की लिस्ट सौंपने वाली हैं. बता दें कि नगर निगम में आउटसोर्स अधिकारियों की बहुत बड़ी धांधली सामने आई था जिसकी जांच चल रही है.

7 साल में भी विकास कार्यों में तेजी नहीं आई

गुरुग्राम में विकास को लेकर 7 साल पहले नगर निगम का गठन हुआ था, लेकिन 7 साल बाद भी गुरुग्राम के विकास में वो तेजी नहीं आ पाई जिसकी उम्मीद गुरुग्राम की जनता को थी. आज भी गुरुग्राम में हल्की बारिश होने से विकास कार्यों की पोल खुल जाती है. आज भी जगह-जगह गंदगी देखने को मिलती है और
पीने के लिए साफ पानी भी नहीं मिलता है. गुरुग्राम के नगर निगम होने के बावजूद इलाके में लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं.

मेयर मधु आजाद जल्द ही प्रदेश के मुखिया मनोहर लाल से मुलाकात कर लापरवाह अधिकारियों की लिस्ट सौंपने वाली हैं. (File Photo)


नगर निगम टीम और अधिकारियों के बीच खींचतान का ये कोई पहला मामला नहीं हैं. शुरू से ही मेयर टीम और अधिकारियों के बीच काम काज को लेकर आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता आ रहा है. कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि अमूमन निगम के अधिकारी प्रदेश सरकार के रहते हैं तो वहीं गुरुग्राम मेयर पद
पर गुरुग्राम के सांसद राव इंद्रजीत के चहेते का दबदबा रहा है. इतना ही नहीं प्रदेश सरकार और राव इंद्रजीत के बीच छत्तीस का आंकड़ा प्रायः देखने को मिलता है. इस मनमुटाव का सीधा असर गुरुग्राम की जनता पर पड़ता है.CM के सामने खुलेगा अधिकारियों का कच्चा चिट्ठा

कई बार पार्षद और मेयर आरोप लगा चुके हैं कि प्रदेश सरकार के चहेते अधिकारी विकास कार्यों को लेकर लापारवाही करते हैं. हैरानी की बात तो ये है कि इस मनमानी पर प्रदेश सरकार कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती है. अब एक बार फिर अधिकारियों का कच्चा चिट्ठा मुख्यमंत्री के सामने खुलने वाला है. अब ऐसे में देखना होगा की मुख्यमंत्री इस पर क्या एक्शन लेते हैं.

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First published: January 17, 2020, 6:31 PM IST
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