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Corona Vaccine: कोवैक्‍सीन की कमी से दूसरी डोज में हो रही देरी, विशेषज्ञ बोले-घबराएं नहीं

Corona Vaccine: कोवैक्‍सीन की कमी से दूसरी डोज में हो रही देरी, विशेषज्ञ बोले-घबराएं नहीं

कोवैक्सिन की सप्‍लाई और तेज करने की कोशिश की जा रही है हालांकि कई जगहों पर दूसरी डोज के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है.  . (file pic)

कोवैक्सिन की सप्‍लाई और तेज करने की कोशिश की जा रही है हालांकि कई जगहों पर दूसरी डोज के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है. . (file pic)

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना से उबरे हुए व्‍यक्ति के लिए कोरोना की किसी भी वैक्‍सीन की एक डोज भी काफी है. इससे व्‍यक्ति में कोरोना से लड़ने के लिए पर्याप्‍त एंटीबॉडी बन जाती हैं. ऐसे में अगर उसे दूसरी डोज नहीं मिल रही है तो कोई चिंता की बात नहीं है.

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  • News18Hindi
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नई दिल्‍ली. देश में कोरोना के खिलाफ वैक्‍सीनेशन (Vaccination) का आंकड़ा रोजाना नए रिकॉर्ड बना रहा है. हाल ही में देश में एक करोड़ से ज्‍यादा वैक्‍सीन की डोज एक दिन में लगाई गई हैं. कोरोना की तीसरी लहर (Covid Third Wave) की आशंका के बीच वैक्‍सीन को लेकर लोगों की जागरूकता और सरकारों का प्रयास दोनों ही बेहतर हो रहे हैं. हालांकि देश में कई जगहों पर सीरम इंस्‍टीट्यूट की कोविशील्‍ड (Covishield) के मुकाबले भारत बायोटेक की कोवैक्‍सीन (Covaxin) की कमी भी देखी गई है.

कोवैक्‍सीन की कमी के कारण सबसे ज्‍यादा दिक्‍कत उन लोगों को हो रही है जिन्‍होंने पहली डोज कोवैक्‍सीन की ली है लेकिन दूसरी डोज के लिए 28 दिन की समय अवधि पूरी होने के बाद भी उन्‍हें कोवैक्‍सीन नहीं मिल पा रही है. शहरों से ज्‍यादा गांवों में ऐसी परेशानियां देखी जा रही हैं जिसके चलते कोवैक्‍सीन की दूसरी डोज लेने के लिए लोगों को काफी दूर तक भी जाना पड़ रहा है. साथ ही लोगों में डर भी है कि अगर दूसरी डोज को लेने में देरी हुई तो इसका प्रभाव एंटीबॉडी बनने में भी पड़ सकता है.

कोवैक्‍सीन की कमी और दूसरी डोज को लेने में हो रही देरी पर न्‍यूज 18 हिंदी ने ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के पूर्व निदेशक डॉ. एम सी मिश्र से बात की है. डॉ. मिश्र का कहना है कि कोविशील्‍ड के मुकाबले कोवैक्‍सीन का उत्‍पादन कम है. जहां अभी तक कोविशील्‍ड की हर महीने 11 करोड़ डोज तैयार हो रही थीं वहीं कोवैक्‍सीन की अनुमानित ढाई करोड़ डोज बन रही थीं. ऐसे में यह समस्‍या हो सकती है.

डॉ. मिश्र ने बताया कि सरकार ने हाल ही में लोकसभा में भी जानकारी दी है कि दोनों ही वैक्‍सीन की खुराकों के उत्‍पादन को बढ़ाने की तैयारी की जा रही है. हालांकि अभी लोगों को दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है इसमें भी दोराय नहीं है. वो कहते हैं कि अगर कोवैक्‍सीन की पहली डोज लेने वाले लोगों को 28 दिन में वैक्‍सीन की दूसरी डोज नहीं मिल रही है तो घबराने की जरूरत नहीं है.

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डॉ. एमसी मिश्र कहते हैं कि दूसरी डोज लगवाने में अगर 10-20 दिन भी ऊपर हो रहे हैं तो परेशान न हों और कोविड अनुरूप व्‍यवहार (Covid Appropriate Behaviour) के साथ ही मास्‍क (Mask) और सोशल डिस्‍टेंसिंग का विशेष ध्‍यान रखें. इस दौरान कोशिश करें कि कोवैक्‍सीन की ही दूसरी डोज मिल जाए लेकिन अगर यह दायरा एक महीने या उससे ऊपर बढ़ रहा है और कोवैक्‍सीन की पहली डोज के 60 दिन तक दूसरी डोज नहीं मिल पा रही है तो व्‍यक्ति कोई अन्‍य वैक्‍सीन की दूसरी डोज भी ले सकता है. अभी तक जो देखा गया है इससे उसे कोई नुकसान नहीं होगा. हालांकि 28 दिन के बाद एक महीने का अंतराल काफी है और इस समयावधि में कोवैक्‍सीन मिलने की संभावना बढ़ जाती है..

कोविशील्‍ड और कोवैक्‍सीन को लेकर आई है स्‍टडी
डॉ. कहते हैं कि हाल ही में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की एक स्टडी में सामने आया है कि पहली डोज कोविशील्ड (Covishield) और दूसरी डोज कोवैक्सीन (Covaxin) की देने से कोरोना वायरस के खिलाफ बेहतर इम्यूनिटी (Immunity) देखी गई है. आईसीएमआर ने यह स्टडी मई और जून महीने में की थी जिसमें सामने आया कि एडिनोवायरस वेक्टर पर आधारित दो अलग-अलग वैक्सीन का कॉम्बिनेशन न सिर्फ कोरोना के खिलाफ असरदार है बल्कि वायरस के अलग-अलग वैरिएंट्स (Variants) के खिलाफ भी काफी हद तक प्रभावी है. इसी तरह अगर कोवैक्‍सीन के बाद भी कोविशील्‍ड दे दी जाए तो नुकसान करने की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए.

कोरोना हुआ है तो एक डोज ही काफी
डॉ. मिश्र कहते हैं कि अगर व्‍यक्ति को कोरोना हुआ है और उसके बाद उसने कोवैक्‍सीन की पहली डोज लगवाई है और उसे दूसरी डोज के लिए कोवैक्‍सीन नहीं मिल रही है. ऐसी स्थिति में वह बिल्‍कुल भी परेशान न हो. कोरोना से उबरे हुए व्‍यक्ति के लिए कोरोना की किसी भी वैक्‍सीन की एक डोज भी काफी है. इससे व्‍यक्ति में कोरोना से लड़ने के लिए पर्याप्‍त एंटीबॉडी बन जाती हैं. ऐसे में अगर उसे दूसरी डोज नहीं मिल रही है तो कोई चिंता की बात नहीं है.

कई देशों में पहले से ही वैक्‍सीन का कॉकटेल दिया जा रहा है
डॉ. मिश्र कहते हैं कि कनाडा, इटली, वियतनाम, भूटान, थाइलैंड, फ्रांस, नार्वे और स्‍पेन जैसे देशों में पहले से ही मिक्‍स वैक्‍सीन दी जा रही है. यहां एस्‍ट्रेजेनेका की कोविशील्‍ड के साथ फाइजर या मॉडर्ना आदि वैक्‍सीनों को दिया जा रहा है. डॉ. कहते हैं कि चूंकि इन वैक्‍सीन का काम वायरस के खिलाफ काम करना है ऐसे में इनके मिश्रण से नुकसान की गुंजाइश भी कम होती है. पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने वैक्सीन के मिश्रण में जारी एक अध्ययन में कहा कि है कि लोगों को कोवैक्सीन (Covaxin) और कोविशील्ड (Covishield) के मिश्रण की एक खुराक एक वैक्सीन की दो खुराक से कहीं ज्यादा प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ती है.

Tags: Corona vaccine, Covaxin, Covaxine, Covishield, Vaccine Mixing

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