ए‍क दिन में 75 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमित पर विशेषज्ञ बोले, इस वजह से अभी और बढ़ेंगे मामले
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ए‍क दिन में 75 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमित पर विशेषज्ञ बोले, इस वजह से अभी और बढ़ेंगे मामले
देश में एक दिन में कोरोना के 75 हजार से ज्‍यादा मरीज सामने आए हैं.

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लोग अब कोरोना (Corona) को स्‍वीकार कर चुके हैं. साथ ही उनके अंदर कोरोना को लेकर रिस्‍क फैक्‍टर आ गया है. उन्‍हें भरोसा है कि कोविड (Covid-19) का शिकार होने पर वे ठीक हो जाएंगे. इ‍सलिए एहतियात बरतने में लापरवाही भी सामने आ रही है.

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  • Last Updated: August 27, 2020, 8:38 PM IST
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नई दिल्‍ली. भारत में 24 घंटे में आए कोरोना के 75 हजार से ज्‍यादा मामलों ने चिंता की लकीर खींच दी है. एक दिन में आया कोरोना का यह अभी तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि अब हालात बेकाबू होते जा रहे हैं. अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में हर दिन लाखों की संख्या में संक्रमित होंगे. जिन्‍हें नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा. विशेषज्ञ देश में कोरोना के मामले बढ़ने के पीछे कई वजहें बता रहे हैं.

मनोवैज्ञानिक निशा खन्‍ना कहती हैं कि कोविड की वजह से लोगों में स्‍ट्रैस लेवल काफी बढ़ गया है. इस बीमारी को छह महीने से ज्‍यादा का समय होने से लोगों में अब धैर्य नहीं रहा है कि वे चीजों को फॉलो करें और बताई गई एहतियातों को उसी तरीके से बरतें जैसे शुरुआत में कर रहे थे. एक साधारण इंसान को भी अगर एक समय के लिए बंद कमरे रखोगे और उसको लिमिटेड साधन दे दोगे तो उसका व्‍यवहार बदल जाएगा. उसका मन करेगा कि वह बाहर निकले.

साइकॉलोजी के हिसाब से छह महीने एक लंबा समय है. इस दौर में काफी चीजें बदल जाती हैं. अगर व्‍यक्ति किसी चीज के डर में है तो या तो वह और डरने लगेगा या फिर वह डर पर काबू पाने की कोशिश करेगा. यहां यह हो रहा है कि लोग अब खुद को कोविड के लिए तैयार कर रहे हैं. वे इसके लिए मानसिक रूप से तैयार हैं कि बीमारी होगी तो वे देख लेंगे लेकिन बाहर जरूर निकलेंगे.



निशा खन्‍ना कहती हैं कि कोरोना के तेजी से बढ़ रहे मामलों को लेकर दो चीजें हुई हैं. पहली यह कि कोरोना महामारी का डर लोगों के मन से अब निकल रहा है. पिछले छह महीने से चली आ रही चीजों के बाद लोगों को लगता है कि कोरोना अब एक सामान्‍य बीमारी है. इससे बीमार होने पर खुद को बाकी लोगों के संपर्क से अलग करना है जैसा कि अभी तक टायफॉयड, वायरल फीवर, पहले चेचक, माता या खसरा निकलने पर जैसे करते थे. इसके बाद चीजें सामान्‍य हो जाएंगी. लोग आज सिर्फ यही नहीं देख रहे कि रोजाना कितने बीमार बढ़ रहे हैं बल्कि यह भी देख रहे हैं कि मर कितने रहे हैं. उस नंबर को देखकर वे खुद को लेकर रिलेक्‍स हो रहे हैं.
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देश में सबसे ज्यादा एक्टिव केस महाराष्ट्र में हैं. महाराष्ट्र में डेढ़ लाख से ज्यादा संक्रमितों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है.


दूसरी चीज जो महत्‍वपूर्ण है वह यह है कि लोगों के मन में रिस्‍क फैक्‍टर आ गया है. कोरोना के डर के बीच लोगों ने खुद को मजबूत बनाने की कोशिशें कीं. बिना दवा के इस बीमारी से निपटने के लिए खुद को शारीरिक के साथ-साथ मानसिक रूप से भी तैयार किया कि इससे इतना डरना नहीं है. यह तैयारी धीरे-धीरे भरोसे में बदल गई और लोग कोरोना होने पर भी अब चिंतित नहीं होते बल्कि खुद को दिलासा देते हुए मिल जाते हैं कि सब ठी‍क हो जाएगा. इसी के साथ अब वे अपने दैनिक क्रियाकलापों के लिए आगे बढ़ रहे हैं. वे अपने स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर रिस्‍क ले रहे हैं. लोगों के जीवन में दो रिस्‍क हैं, पहला रोजगार का, दूसरा बीमारी का. ऐसे में लोगों ने रोजगार को पहले स्‍थान पर रखकर बीमारी को लेकर रिस्‍क लिया है.

मेरे पास जितने भी मरीज आते हैं, उनके साथ अभी तक यही सामने आया है कि लोग अब इसे स्‍वीकार कर चुके हैं.

75 हजार कुछ नहीं अभी हर दिन और बढ़ेंगे मामले लेकिन घट सकती हैं मौतें

सरोजिनि नायडू मेडिकल कॉलेज आगरा के प्रिंसिपल प्रोफेसर संजय काला कहते हैं कि मनुष्‍य को कब तक घरों में बंद करके रखा जा सकता है. अगर आप रिकॉर्ड देखें तो जितनी मौतें कोरोना से हो रही हैं उससे कहीं ज्‍यादा मौतें भूख, आत्‍महत्‍या या अन्‍य कारणों से हो रही हैं. लोगों को घरों में रहे छह महीने हो गए. अब कहां तक रुकेंगे और नहीं रुकेंगे तो संपर्क बढ़ेगा और कोरोना का ट्रांसमिशन भी बढ़ेगा. हालांकि कोरोना से मौतों की दो वजहें हैं वरना मृत्‍यु दर काफी कम हो सकती है.

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कोरोना महामारी से भारत में बेकाबू होती जा रही है.


कोरोना से मौतों की पहली वजह यह है कि डायबिटीज, हर्ट, लंग्‍स और किडनी वाले मरीज थोड़ी सी परेशानी होने पर कोरोना टेस्‍ट नहीं कराते. वहीं दूसरी वजह यह है कि अगर किसी मरीज में कोरोना के लक्षण भी हैं तो वह पांच से सात दिन तक इंतजार करता है, जब हालत ज्‍यादा बिगड़ जाती है तब डॉक्‍टर के पास जाता है. जिसे निय‍ंत्रित करना बहुत मुश्किल हो जाता है. क्‍योंकि अभी तक कोई सटीक दवा इसके लिए नहीं बनी है. यही बात कोरोना के मरीज बढ़ाने में भी सामने आती है. सर्दी, खांसी, जुकाम होने पर व्‍यक्ति एहतियात नहीं बरतता, सभी से संपर्क में रहता है और जब हालत ज्‍यादा खराब होती है तब कहीं जाकर कोरोना की जांच कराता है. लिहाजा कोरोना का संक्रमण फैलता जाता है.

प्रोफेसर काला कहते हैं कि एक जो बड़ी बात है वह यह भी है कि लोग इस समय लापरवाह हो रहे हैं. वे घरों से बाहर निकल रहे हैं ये ठीक है लेकिन हाथ धोना, मास्‍क पहनना, किसी भी चीज को न छूना आदि चीजों को लेकर लोग ढिलाई बरत रहे हैं. इस बीमारी के बारे में अभी तक किसी को भी बहुत ज्‍यादा पता नहीं है. इसकी वैक्‍सीन नहीं आ जाती और उसकी भी मल्‍टीपल डोज लोगों को नहीं दी जाती तब तक इस पर नियंत्रण बहुत मुश्किल है. यह बीमारी इस साल तक तो जाने वाली नहीं है. इसमें वक्‍त लगेगा. लोगों को अभी संभलना होगा और इससे बचने के तरीकोंं को अपनाना होगा.
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