कोविड मरीज को अस्‍पताल में नहीं मिल रहा वेंटीलेटर तो घबराएं नहीं, घर पर ऐसे बढ़ाएं ऑक्‍सीजन लेवल

ये एक वैज्ञानिक तरीका है. डॉक्टर पिछले 10 साल से इसे अपना रहे हैं. (AP)

Prone Position For Covid Patient: कोरोना मरीजों में ऑक्‍सीजन की कमी को दूर करने के लिए स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ प्रोन पोजिशन को अपनाने की सलाह दे रहे हैं. यह घर पर ही की जाने वाली मुफ्त प्रक्रिया है. अस्‍पतालों में वेंटीलेटर के लिए चक्‍कर काटने के बजाय कोविड मरीज इस प्रक्रिया से भी ऑक्‍सीजन स्‍तर बढ़ा सकते हैं.

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नई दिल्‍ली. देशभर में कोरोना मरीजों के बढ़ने के साथ ही जो सबसे बड़ी समस्‍या बनकर उभरी है वह है अस्‍पतालों में ऑक्‍सीजन (Oxygen) की कमी. पिछले कुछ दिनों से दिल्‍ली, महाराष्‍ट्र, यूपी के कई शहरों में अस्‍पतालों में कोविड मरीजों (Covid Patients) के लिए ऑक्‍सीजन की कमी सामने आई है.

दिल्‍ली के सरकारी और प्राइवेट दोनों ही प्रकार के अस्‍पतालों में हजारों की संख्‍या में ऑक्‍सीजन बेड (Oxygen bed) पर भर्ती कोविड मरीजों की सांसों पर उस वक्‍त संकट गहरा गया जब दिल्‍ली के उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया (Deputy CM Manish Sisodia) ने अस्‍पतालों में ऑक्‍सीजन स्‍टॉक न होने की बात कही. वहीं कई अस्‍पतालों ने बताया कि उन‍के यहां दो घंटे का भी स्‍टॉक नहीं बचा था.

हालांकि देशभर के विशेषज्ञ इस कठिन समय से उबरने के लिए ऑक्‍सीजन की पूर्ति किए जाने की मांग के साथ ही कुछ ऐसी चीजों के बारे में भी लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे कोविड मरीजों की अस्‍पतालों में मौजूद ऑक्‍सीजन वेंटिलेशन (Oxygen Ventilation) की जरूरत कम रह जाए और वे खुद भी अपनी जान बचाने में अपनी मदद कर सकें.

oxygen cylinder coronavirus
नोएडा और गाजियाबाद के तमाम अस्‍पताल ऑक्‍सीजन की कमी से जूझ रहे हैं. (Photo- moneycontrol)


इनका कहना है कि लोगों को घबराने के बजाय विकल्‍पों पर ध्‍यान देना होगा. कोविड मरीजों के लिए प्रोन पोजिशन (Prone Position) उसी विकल्‍प में से एक है या कहें कि यह संजीवनी है. यह ऑक्‍सीजन वेंटिलेटर का सरल विकल्‍प है जिसे अपनाकर 80 फीसदी तक मरीज के ऑक्‍सीजन स्‍तर को ठीक रखा जा सकता है और मृत्‍यु के डर से भी बचा जा सकता है.

क्‍या है प्रोन पोजिशन (What Is Prone Position)

प्रोन पोजिशन एक प्रक्रिया है. इसमें व्‍यक्ति को पेट के बल लिटाया जाता है. इसके बाद उसकी गर्दन के नीचे एक तकिया रखा जाता है. साथ ही पेट और घुटनों से ऊपर दो तकिए लगाए जाते हैं. साथ ही एक तकिया मरीज के पंजों के नीचे भी लगाया जाता है. मरीज को आराम से लेटने और सांस लेने के लिए कहा जाता है. ऐसा कम से कम 40 मिनट तक करने से शरीर में ऑक्‍सीजन की मात्रा बढ़ने लगती है. फेफड़ों को आराम मिलता है और पूरी सांस आती है.

इस पोजिशन को सेल्‍फ वेंटीलेशन भी कहते हैं. चूंकि कोरोना में भी फेफड़ों पर असर पड़ता है और सांस टूटने लगती है, ऑक्‍सीजन की कमी होने लगती है, ऐसे में यह प्रक्रिया अपनाने से शरीर में ऑक्‍सीजन की कमी को दूर किया जा सकता है.

ऐसे काम करती है प्रोन पोजिशन प्रक्रिया 

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