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दिल्ली: सुपरटेक के MD की सजा पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, खरीदार को 50 लाख देने का दिया निर्देश

एनसीडीआरसी का यह मामला यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास क्षेत्र में कंपनी के एक प्रोजेक्ट में विला का कब्जा देने में देरी को लेकर है. (File)

एनसीडीआरसी का यह मामला यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास क्षेत्र में कंपनी के एक प्रोजेक्ट में विला का कब्जा देने में देरी को लेकर है. (File)

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा कि कंपनी के एमडी को 3 साल की कैद की सजा को लेकर एनसीडीआरसी के आदेश पर सुनवाई की अगली तारीख तक रोक लगाई जाती है. अदालत इस मामले पर अब 4 अक्टूबर को सुनवाई करेगी.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. सुपरटेक के एमडी मोहित अरोड़ा (Supertech MD Mohit Arora) को 3 साल जेल की सजा पर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने रोक लगा दी है. हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी. एक घर खरीदार द्वारा दायर एक मामले में आदेश का पालन न करने को लेकर NCDRC ने मोहित अरोड़ा को 3 साल की कारावास की सजा सुनाई थी. साथ ही उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था. जस्टिस अमित बंसल ने रियल्टी फर्म को बकाया 1.75 करोड़ रुपए में से 50 लाख रुपए एक सप्ताह के भीतर घर खरीदार के खाते में जमा करने का निर्देश दिया, ताकि अदालत को उसकी प्रामाणिकता का पता चले.

    इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि कंपनी के एमडी को 3 साल की कैद की सजा को लेकर एनसीडीआरसी के आदेश पर सुनवाई की अगली तारीख तक रोक लगाई जाती है. अदालत इस मामले पर अब 4 अक्टूबर को सुनवाई करेगी. हाईकोर्ट ने कंपनी और घर खरीदार, दोनों को एनसीडीआरसी के आदेश के अनुसार बकाया राशि का विवरण दर्ज करने का भी निर्देश दिया. हाईकोर्ट ने 20 सितंबर के उस आदेश को चुनौती देने वाली सुपरटेक की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें अरोड़ा को जेल की सजा हुई थी. साथ ही एनसीडीआरसी के निर्देशों का पालन न करने के लिए उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था.

    खरीदार की शिकायत पर आयोग ने सुनवाई की
    एनसीडीआरसी का यह मामला यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास क्षेत्र में कंपनी के एक प्रोजेक्ट में विला का कब्जा देने में देरी को लेकर है. घर खरीदार की शिकायत पर आयोग ने सुनवाई की थी. यह विला 1 करोड़ रुपये से अधिक में अलॉट किया गया था. हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सुपरटेक का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने दलील दी कि एनसीडीआरसी का आदेश उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 27 के प्रावधानों से अलग था. ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसमें कि कंपनी के डिफॉल्ट होने पर एमडी को आपराधिक या दीवानी मामले में जिम्मेवार बताता हो.

    50 लाख जमा करने का निर्देश दिया
    याचिका का विरोध करते हुए घर खरीदार कंवल बत्रा के वकील ने कहा कि कंपनी एनसीडीआरसी के आदेश की अनदेखी कर रही है. साथ ही फोरम से किए गए अपने वादे से भी पीछे हट रही है. बत्रा के वकील शैलेश मडियाल ने कहा कि कंपनी हर बार एनसीडीआरसी को अंडरटेकिंग देती है और फिर अगली बार पेश होने में विफल रहती है. आखिरकार वारंट जारी करना पड़ता है. सुनवाई के दौरान सुपरटेक के वकील ने अपनी वचनबद्धता साबित करने के लिए एक हफ्ते के भीतर घर खरीदार को 40 लाख रुपए देने की बात कही. इस पर शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि यह बहुत कम राशि है. अदालत ने तब कंपनी को एक सप्ताह के भीतर 50 लाख रुपए जमा करने का निर्देश दिया.

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