दिल्ली सरकार के आदेश पर HC ने लगाई रोक, 33 प्राइवेट हॉस्पिटलों में ICU बेड रिजर्व करने का मामला

दिल्ली हाईकोर्ट ने निजी अस्पतालों में 80 फीसदी बेड कोरोना मरीजों के लिए  आरक्षित करने वाले आदेश पर रोक लगा दी है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने निजी अस्पतालों में 80 फीसदी बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित करने वाले आदेश पर रोक लगा दी है.

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High court) ने एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार (Delhi Government) के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि 33 निजी अस्पताल (Hospital) 80 फीसदी ICU बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित करें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 4:38 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High court) ने आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा 33 बड़े निजी अस्पतालों (Hospitals) को कोविड-19 मरीजों के लिए 80 प्रतिशत आईसीयू बेड (ICU Bed) आरक्षित रखने के आदेश पर रोक लगाते हुए इसे मनमाना और अनुचित बताया है. न्यायमूर्ति नवीन चावला ने कहा कि दिल्ली सरकार का 13 सितम्बर का आदेश प्रथम दृष्ट्या ‘मनमाना, अनुचित एवं नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन’ प्रतीत होता है. उच्च न्यायालय ने आईसीयू बिस्तर आरक्षित रखने के आदेश को खारिज करने वाली ‘एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स’ की याचिका पर दिल्ली सरकार और केन्द्र को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है.

हाईकोर्ट ने कहा, ‘प्रथम दृष्ट्या यह आदेश मनमाना, अनुचित एवं नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होता है. मामले की अगली सुनवाई तक इस आदेश के क्रियान्वयन पर रोक रहेगी.’ अदालत ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 16 अक्टूबर की तारीख तय की है. एसोसिएशन ने कहा कि यह 33 अस्पताल उसके सदस्य हैं और दिल्ली सरकार के आदेश को रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि यह विवेकहीन तौर पर पारित किया गया है.

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दिल्ली सरकार ने अपने आदेश का बचाव करते हुए कहा कि यह केवल 33 अस्पताल हैं और 20 प्रतिशत आईसीयू बिस्तर अन्य मरीजों (जिन्हें कोरेाना वायरस नहीं है) के लिए आरक्षित रहेंगे. साथ ही आदेश पारित करते समय वायरस के अचानक बढ़ते मामलों को भी ध्यान में रखा गया है.
बता दें कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में बढ़त कोरोना संक्रमण के मामलों को देखते हुए 33 निजी अस्पतालों में 80 फीसदी आईसीयू बेडों को कोरोना संक्रमितों के लिए आरक्षित करने का आदेश दिया था. इस बात की जानकारी दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने मीडिया को दी थी. इस पर निजी अस्पतालाों में आपत्ति जताई थी. साथ ही केजरीवाल सरकार से इल फैसले को बदलने के लिए कहा था. सरकार ने जब उनकी बात नहीं सुनी तो एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ने फैसले के विरोध दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी.
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