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...ताकि जामिया नगर पर न लगे मंदिर तोड़ने का दाग, इसलिए सामने आए मुस्लिम

नूर नगर के मंदिर के बाहर बैठी पुलिस सुरक्षा करते हुए.

नूर नगर के मंदिर के बाहर बैठी पुलिस सुरक्षा करते हुए.

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) के इस आदेश से वहां रहने वाले हिन्दू ही नहीं मुसलमानों (Muslim) के बीच भी खासी खुशी है.

  • News18Hindi
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नई दिल्ली. पास में ही रहने वाले हिन्दू परिवार (Hindu family) के कुलदीप राठौर का दावा है कि यह मंदिर 60 साल से भी ज्यादा पुराना है. लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ लोग इस मंदिर और उसी के आहते में बनी धर्मशाला को तोड़कर यहां कॉम्पलेक्स बनाना चाहते हैं. जिसका विरोध यहां रहने वाले मुस्लिम परिवार कर रहे हैं. एमसीडी (MCD) और पुलिस से राहत न मिलती देख स्थानीय निवासी फौजुल अजीम दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) चले गए. कोर्ट के आदेश पर अब पुलिस (Delhi Police) के जवान मंदिर की सुरक्षा में लगा दिए गए हैं. वहीं कोर्ट के इस आदेश से वहां रहने वाले हिन्दू ही नहीं मुसलमानों (Muslim) के बीच भी खासी खुशी है.

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सामाजिक कार्यकर्ता और कारोबारी फौजुल अजीम ने न्यूज18 हिंदी को बताया, “हम लोग यहां कई पीढ़ियों से रह रहे हैं. इसी तरह से यह रहने वाले करीब 40-50 हिन्दू परिवार भी रह रहे हैं. आज तक नूर नगर, जामिया नगर, ओखला में हम लोगों के बीच ऐसा कुछ नहीं हुआ जो अखबारों की सुर्खियां बना हो. दोनों ही वर्ग के लोगों को कभी एक-दूसरे से कोई शिकायत नहीं रही है. हमारे नूर नगर का यह एक इकलौता मंदिर है. यह भी कोई करीब 60 साल पुराना है.

हम नहीं चाहते कि नूर नगर पर किसी मंदिर को तोड़ने का दाग लगे. इसी मंदिर परिसर में धर्मशाला भी है. मंदिर और धर्मशाला यहीं पर रहने वाले एक जौहरी परिवार ने अपनी जमीन पर बनाई थी. अब उन्हीं के परिवार के कुछ लोगों के साथ मिलकर आसामाजिक तत्व इसे तोड़ रहे हैं. धमर्शाला को गिरा दिया गया है. मंदिर से मूर्तियां भी गायब कर दी गई हैं.”

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कुलदीप बोले-जो काम हम नहीं कर सके वो फौजुल आजमी ने किया

कुलदीप राठौर ने बताया, “हमारे दादा यहां रहने आए थे. तभी से हम और हमारे चाचा का परिवार यहां रह रहा है. 6-7 साल पहले तक हम इसी मंदिर में पूजा करते थे. बाद में इस मंदिर के दरवाजे बंद कर दिए गए. हमे पूजा-पाठ के लिए 1.5 किमी दूर ओखला या फिर 3 किमी दूर कालकाजी के मंदिर जाना पड़ता था. जिसके चलते हमारी सुबह-शाम होने वाली पूजा में खलल पड़ने लगा.

दूर की वजह हर रोज जाना मुमकिन नहीं हो पाता था. फिर एक दिन गेट बंदकर मंदिर के अंदर धर्मशाला में तोड़फोड़ की जाने लगी. जिसका विरोध फौजुल आजमी के साथ ही स्थानीय लोगों ने किया. दबंग लोगों के चलते हम लोग कुछ बोल नहीं पाते थे. लेकिन फौजुल आजमी और स्थानीय लोगों ने मंदिर को बचाने में हमारे बहुत मदद की है.”

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