दिल्ली के सबसे छोटे छह गज के मकान में रह रहे परिवार ने कोरोना-लॉकडाउन में कैसे काटे दिन,जानिए

दिल्‍ली के सबसे छोटे घर में रहने वाले परिवार ने बताया कैसे बीते कोरोना लॉकडाउन में दिन..
दिल्‍ली के सबसे छोटे घर में रहने वाले परिवार ने बताया कैसे बीते कोरोना लॉकडाउन में दिन..

महज छह गज में बने दिल्‍ली के सबसे छोटे घर (Smallest house of delhi) में सोशल डिस्‍टेंसिंग (Social Distancing) के नाम पर पिंकी हंसते हुए कहती हैं कि यह पूछना चुटकुले से कम नहीं है. सब घर के सदस्‍यों के बीच भी एक मीटर दूरी की बात कह रहे हैं, हमारे तो पूरे घर में ही कुल एक मीटर की जगह है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 6:07 PM IST
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नई दिल्‍ली. दिल्‍ली के अजूबे के नाम से मशहूर बुराड़ी के संतनगर स्थित राजधानी का सबसे छोटा मकान तो आपको याद ही होगा. मात्र छह गज जमीन में बने इस तीन मंजिला मकान को देखकर अच्‍छे अच्‍छे आर्किटेक्‍ट और बिल्‍डरों ने दांतों तले उंगली दबा ली थी. काफी समय से इसमें पूरा का पूरा एक परिवार रह रहा है. देश में फैले कोरोना के बाद जहां लोग दिल्‍ली और अन्‍य शहरों के किराए के मकानों को छोड़-छोड़कर अपने गांव चले गए. वहीं इस सबसे छोटे घर में किराए पर रहने वाला परिवार कोरोना-लॉकडाउन से लेकर अभी तक वहीं रह रहा है. ऐसे में कोरोना के प्रकोप के बीच लॉकडाउन में घर में बंद रहने का कैसा अनुभव रहा और सोशल डिस्‍टेंसिंग के आदेशों के बीच इन लोगों ने कैसे छह गज के मकान में एक मीटर की दूरी का पालन किया यह जानना काफी दिलचस्‍प है.

इस सबसे छोटे घर में किराए पर रहने वाली पिंकी ने न्‍यूज 18 से बातचीत की. उन्‍होंने कोरोना के कहर के बीच हुए लॉकडाउन और फिर अनलॉक में दिन काटने को लेकर बेहद मजेदार बातें बताईं. पिंकी ने बताया कि वे लोग लखनऊ के एक गांव के रहने वाले हैं. दिल्‍ली के इस मकान में पिछले दो साल से रह रहे हैं. उनके पति संजय सिंह गुरुग्राम की एक कंपनी में ड्राइवर का काम करते थे लेकिन लॉकडाउन तो 24 मार्च को लगा था लेकिन कंपनी 21 को ही बंद हो गई और पति का काम छूट गया. जब तक वे कुछ समझ पाते, लॉकडाउन की घोषणा हो गई.





पिंकी बताती हैं, ‘24 मार्च से मैं, दोनों बेटे और पति घर पर ही थे. लॉकडाउन लग चुका था.हमें बहुत अंदाजा भी नहीं था कि सब बंद हो जाएगा. एक-दो हफ्ते तक ऐसे रहे जैसे छुट्टियां चल रही हैं लेकिन फिर हालात खराब होने लगे तो गांव जाने के लिए सोचा. लेकिन तब पता चला कि सब ट्रेनें और बसें पूरी तरह बंद हो गई हैं. जाने का कोई साधन नहीं था. फिर इसी घर में रुकना ही था. बच्‍चों को बाहर जाने से मना कर दिया गया था.
the smallest house of delhi and its bedroom
दिल्‍ली के सबसे छोटे मकान का यह है बैडरूम, जिसमें सोते हैं चार लोग.


बड़ा बेटा 19 साल का है, छोटा 11 साल का. दोनों बेटे बाहर जाने के लिए परेशान होते थे लेकिन क्‍या करें बीमारी का डर था तो इसी छह गह के बैडरूम में रहना पड़ता था. मेरा ज्‍यादातर समय रसोई में गुजरने लगा. बच्‍चों के स्‍कूल भी बंद हो गए. अब घर के उस सिंगल बैड वाले कमरे में बैठकर ही बच्‍चों को ऑनलाइन क्‍लास लेनी होती थी, उसी के एक कोने में मैं और मेरे पति बैठे रहते थे. जब बच्‍चों की क्‍लास बंद होती तो टीवी चलाते.’

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