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दिल्ली आग की दर्दनाक दास्तां: 'एक साल पहले हुई है शादी, प्लीज मुझे बचा लो' कहते-कहते थम गई सांसें

News18Hindi
Updated: December 9, 2019, 11:59 AM IST
दिल्ली आग की दर्दनाक दास्तां: 'एक साल पहले हुई है शादी, प्लीज मुझे बचा लो' कहते-कहते थम गई सांसें
अनाज मंडी में लगी आग में घायल हुए लोगों का एलएनजेपी अस्पताल में हाल जानते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल. साथ हैं सत्येंद्र जैन और इमरान हुसैन. (PTI)

Delhi Anaj Mandi Fire: हादसे वाली इमारत में चल रही अवैध फैक्ट्री (Bag Factory) में काम करने वाले ज्यादातर मजदूर बिहार के हैं. वे अपना काम खत्म कर के इसी बिल्डिंग में सो जाते थे. शनिवार रात जब वे सोने गए तो उन्हें इसका अंदाजा नहीं था कि एक बेहद खौफनाक सुबह उनका इंतजार कर रही है.

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  • Last Updated: December 9, 2019, 11:59 AM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली की अनाज मंडी (Anaj Mandi) में लगी आग से 43 जिदंगियां काल के गाल में समा गईं. इस भीषण आग की दर्दनाक दास्तां को शायद ही लोग भूलें. रविवार सुबह लगभग पांच बजे हुए हादसे ने कई परिवारों को कभी न भरने वाला जख्म दिया है. पांच मंजिला इमारत में चल रही अवैध फैक्ट्री में काम करने वाले ज्यादातर मजदूर बिहार के हैं. वे अपना काम खत्म कर के इसी बिल्डिंग में सो जाते थे. शनिवार रात जब वे सोने गए तो उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि एक बेहद खौफनाक सुबह उनका इंतजार कर रही है. घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बताए दास्तां को सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं.

'जो मैंने देखा वो पूरी जिंदगी नहीं भूल सकता'
19 साल के अरशद शेख दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र हैं. रविवार की सुबह जब उनकी बहन ने उन्हें जगाया तो वे हादसे वाली जगह पहुंचे. उस समय एनडीआरएफ और दमकल विभाग के लोग बचाव कार्य में लगे हुए थे. उन्होंने देखा कि ये लोग इमारत की तीसरी मंजिल से दो लोगों को लेकर आ रहे हैं. शेख बताते हैं, 'उनमें से एक शख्स को मैंने पानी दिया. दूसरा शख्‍स रोते और चीखते हुए कह रहा था कि एक साल पहले मेरी शादी हुई है, प्लीज मुझे बचा लो.' लेकिन, एम्बुलेंस के पहुंचने के कुछ देर पहले ही उनकी सांसें थम गईं. अरशद शेख भारी गले से कहते हैं, 'जो मैंने देखा वो मैं पूरी जिंदगी नहीं भूल सकता. इससे मुझे गहरा सदमा पहुंचा है.'

वहीं, बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले मोहम्मद सोनू की जब नींद से उठे तो वे धुएं के कारण हांफ रहे थे. हादसे वाली इमारत में लगी एक फैक्ट्री में सोनू के भाई मोहम्मद दुलारी काम करते हैं. वे कहते हैं, 'मैं जब उठा तो देखा कि लोग बचाओ-बचाओ चिल्ला रहे थे. वे तब तक चिल्लाते रहे जब तक बेहोश न हो गए.' राम मनोहर लोहिया अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मौजूद सोनू ने कहा कि वहां काफी लोग थे. आग गेट में लगी और देखते ही देखते रूम तक पहुंच गई.

दिल्ली की आग का शिकार बने परिवार के सदस्य रानी झांसी रोड पर लोक नायक हॉस्पिटल के शवगृह के बाहर इंतजार करते हुए. (फोटो- PTI)


मदद के लिए चिल्ला रहे लोगों की आवाज सुनकर इमारत के पास रहने वाले 45 वर्षीय मोहम्मद आरिफ की नींद खुली. वे बताते हैं, 'ये लगभग 4.45 और 5.15 के बीच का समय रहा होगा. मैं अपने छत पर गया और देखा की तीन से पांच लोग अंदर थे.'

आरिफ के साथ लगभग 10 लोग छत पर इकट्ठा हुए और लड़की से एक ब्रिज बनाने लगे, जिससे की वहां मौजूद लोगों की मदद की जा सके. बाद में जब एनडीआरएफ की टीम वहां पहुंची तो उसने इसी के माध्यम से बचाव कार्य को अंजाम दिया. उन्होंने दो लोगों को वहां निकाला और अस्पताल पहुंचाए. वे बताते हैं कि 5.20 के आसपास दमकल विभाग को कॉल किया गया, लेकिन रास्ता संकरा होने के कारण दमकल की गाड़ियों को मौके पर पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी.(news18.com के लिए अंगना चक्रवर्ती की रिपोर्ट)

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First published: December 9, 2019, 11:16 AM IST
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