मास्‍क पहनने में की लापरवाही तो हो सकता है फेफड़ों पर डबल अटैक

मास्‍क न पहनने से कोरोना और प्रदूषण का फेफड़ों पर हो सकता है डबल अटैक. कॉन्‍सेप्‍ट इमेज.
मास्‍क न पहनने से कोरोना और प्रदूषण का फेफड़ों पर हो सकता है डबल अटैक. कॉन्‍सेप्‍ट इमेज.

दिल्‍ली सफदरजंग अस्‍पताल (Delhi Safdarjung Hospital) में रेस्पिरेटरी विभाग में ऑफिसर डॉ. नीरज कुमार गुप्‍ता का कहना है कि कोरोना तो एक बड़ा फैक्‍टर है ही लेकिन अब प्रदूषण (Pollution) की वजह से भी मास्‍क लगाना बेहद जरूरी है. अगर लोग मास्‍क लगाने में ढील बरत रहे हैं तो प्रदूषण कोरोना के साथ मिलकर लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य पर डबल अटैक कर सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 22, 2020, 2:53 PM IST
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नई दिल्‍ली. दिल्‍ली में प्रदूषण (Pollution) का स्‍तर दिनोंदिन बढ़ रहा है. राजधानी में पार्टिकुलेट मैटर की मात्रा बढ़ने से हवा की गुणवत्‍ता भी खराब हो रही है और इस हवा में सांस लेना मुश्किल हो रहा है. आज सिर्फ कोरोना (Corona) की वजह से ही नहीं बल्कि प्रदूषण और धुंध (Smog) से बचने के लिए भी मास्‍क (Mask) पहनने की अपील की जा रही है. जबकि कई जगहों पर लोगों को बिना मास्‍क के देखा जा रहा है. विशेषज्ञों की मानें तो मास्‍क न पहनना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है.

दिल्‍ली सफदरजंग अस्‍पताल में रेस्पिरेटरी विभाग में ऑफिसर डॉ. नीरज कुमार गुप्‍ता का कहना है कि कोरोना तो एक बड़ा फैक्‍टर है ही लेकिन अब प्रदूषण की वजह से भी मास्‍क लगाना बेहद जरूरी है. अगर लोग मास्‍क लगाने में ढील बरत रहे हैं तो प्रदूषण कोरोना के साथ मिलकर लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य पर डबल अटैक कर सकता है.

डॉ. गुप्‍ता बताते हैं कि प्रदूषण सांस की नली में मौजूद प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है साथ ही अंदर सूजन को जन्‍म देता है या उसे बढ़ाने का काम करता है. ऐसी स्थिति में अगर प्रदूषण की चपेट में आए व्‍यक्ति को कोरोना हो जाता है तो उस स्थिति में पीड़ि‍त व्‍यक्ति की हालत ज्‍यादा खराब हो सकती है बजाय उसके जो बिना प्रदूषण के कोरोना की चपेट में आया है. प्रदूषण के साथ कोरोना होने से फेफड़ों की हालत ज्‍यादा खराब होने की संभावना है. मास्‍क के बिना संक्रमण की प्रक्रिया तेजी से बढ़ सकती है. देखा गया है कि पार्टिकुलेट मैटर कोरोना को शरीर में प्रवेश कराने के लिए वाहन का काम कर सकते हैं. जो काफी खतरनाक है.



डॉ. नीरज कहते हैं कि इटली के अनुभव से यह देखा गया है कि जहां प्रदूषण ज्‍यादा था, वहां पर कोरोना की वजह से मौतें ज्‍यादा हुई हैं. वहां मौतों के लिए प्रदूषण को बड़ा फैक्‍टर माना गया है. तो यह कहा जा सकता है कि प्रदूषण के साथ कोरोना की चपेट में आने से लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य को बड़ी हानि हो सकती है.
ट्रिपल लेयर मास्‍क पहनना इसलिए सबसे ठीक

बाजार में मौजूद कई प्रकार के मास्‍क पर वे कहते हैं कि दिल्ली में जो प्रदूषण की चादर तन रही है, उसमें पीएम 2.5 सबसे ज्‍यादा है. इसे रोकने के लिए एन 95 मास्‍क सबसे अच्‍छा है क्‍योंकि यह पार्टिकुलेट मैटर को रोकने में सक्षम है लेकिन सभी के लिए एन-95 मास्‍क पहन पाना भी संभव नहीं है क्‍योंकि इसकी भी अपनी परेशानियां हैं, ज्‍यादा देर तक लगाने से घबराहट और बेचैनी जैसी समस्‍याएं लोगों को होती हैं. ऐसे में ट्रिपल लेयर मास्‍क लगाना ठीक है. कपड़े के तीन लेयर के मास्‍क पहनना भी उपयोगी रहेगा.

सरकार तय कर चुकी है मास्‍क के दाम

बता दें कि केंद्र सरकार मास्‍क के दाम भी तय कर चुकी है. इससे ज्‍यादा कीमत पर मास्‍क की बिक्री नहीं की जा सकती है. केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के ट्विटर हैंडल से जारी किए गए बयान में कहा गया कि खुदरा बाजार में दो प्‍लाई मास्‍क आठ रुपये जबकि तीन प्‍लाई मास्‍क 10 रुपये से ज्‍यादा कीमत पर नहीं बेचा जा सकता है. वहीं मास्‍क के फैब्रिक के दाम भी फरवरी 2020 के अनुसार ही रहेंगे.
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