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दिल्ली में फिर मंडराने लगा पॉल्यूशन का खतरा? केंद्र ने की बैठक, केजरीवाल सरकार ने भी दिए तर्क

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में वायु प्रदूषण के संबंध दिल्ली-एनसीआर के राज्यों के साथ आज ऑनलाइन आयोजित संयुक्त बैठक में हिस्सा लिया.

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में वायु प्रदूषण के संबंध दिल्ली-एनसीआर के राज्यों के साथ आज ऑनलाइन आयोजित संयुक्त बैठक में हिस्सा लिया.

Delhi-NCR Air Pollution News: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-एनसीआर में पराली मामले (Stubble Burning) पर गुरुवार को एक अहम बैठक की है. इस बैठक में दिल्ली-एनसीआर के सभी राज्यों ने ऑनलाइन हिस्सा लिया. दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने सरकार के एक्शन प्लान के बारे में बताया.

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नई दिल्ली. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में पराली मामले (Stubble Burning) पर गुरुवार को एक अहम बैठक की है. इस बैठक में दिल्ली-एनसीआर के सभी राज्यों ने ऑनलाइन हिस्सा लिया. दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने इस बैठक में दिल्ली सरकार के एक्शन प्लान के बारे में बताया. साथ ही वायु प्रदूषण (Air Pollution) को नियंत्रित करने को लेकर अहम सुझाव भी दिए.

गोपाल राय ने दिल्ली से सटे सभी राज्यों से युद्ध स्तर पर बायो डि-कंपोजर का छिड़काव करने की अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकारें बायो डि-कंपोजर का घोल बनाने से लेकर खेतों में छिड़काव तक की जिम्मेदारी अपने हाथ में लें, तभी पराली की समस्या का जड़ से समाधान संभव है. गोपाल राय ने कहा कि कुछ राज्य किसानों को केवल कैप्सूल बांटने की योजना बना रहे हैं, इससे यह काम जमीन पर नहीं उतर पाएगा. अगर दिल्ली सरकार घोल तैयार करने से लेकर छिड़काव करने तक की जिम्मेदारी अपने हाथ में नहीं लेती, तो दिल्ली में पराली की समस्या का समाधान नहीं हो पाता.

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में वायु प्रदूषण के संबंध दिल्ली-एनसीआर के राज्यों के साथ आज ऑनलाइन आयोजित संयुक्त बैठक में हिस्सा लिया. इस बैठक में एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन के चेयरमैन एम एम कुट्टी, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान के पर्यावरण मंत्री और पंजाब के मुख्य सचिव भी शामिल हुए.

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बैठक में एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन के चेयरमैन एम एम कुट्टी, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान के पर्यावरण मंत्री और पंजाब के मुख्य सचिव भी शामिल हुए.

बैठक में दिल्ली सरकार ने यह सुझाव दिया
बैठक में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री के समक्ष दिल्ली सरकार की तरफ से कई सुझाव दिए. राय ने कहा कि संयुक्त बैठक में सभी राज्यों और केंद्र सरकार ने अपनी बात रखी. बैठक में मुख्य तौर पर जाड़े के समय में बढ़ने वाले प्रदूषण स्तर को लेकर के चर्चा हुई. चूंकि प्रदूषण का दिल्ली केंद्र बिंदु है. उत्तर भारत के इलाकों में जितनी गतिविधियां होती हैं, भौगोलिक बनावट के कारण उन सबका सबसे ज्यादा प्रभाव दिल्ली पर पड़ता है. दिल्ली के अंदर जो प्रदूषण होता है, उसमें दिल्ली में पैदा होने वाले प्रदूषण की भी हिस्सेदारी होती है, लेकिन उससे ज्यादा दिल्ली में प्रदूषण स्तर बढ़ने का कारण बाहर का प्रदूषण है.

दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर क्यों बढ़ जाता है
बता दें कि हरियाणा और पंजाब में पराली जलने की घटनाएं बढ़ते ही दिल्ली में पीएम-10 और पीएम-2.5 का स्तर बढ़ जाता है. दिल्ली सरकार ने बैठक में कहा है कि अक्टूबर का महीना आने वाला है. हमने सितंबर महीने कुछ दिनों के पीएम-10 और पीएम-2.5 के स्टेटस पर करीब से नजर रखा, जिसमें पाया कि 18 सितंबर को पीएम-10 का स्टेटस 67 था, जबकि पीएम-2.5 का लेवल 27 था. इसी तरह 19 सितंबर को पीएम-10 का लेवल 85 व पीएम-2.5 का लेवल 35, 20 सितंबर को पीएम-10 78 व पीएम-2.5 31, 21 सितंबर को पीएम-10 81 व पीएम-2.5 31 और 22 सितंबर को पीएम-10 64 व पीएम-2.5 27 था.

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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री के साथ बैठक में गोपाल राय ने दिल्ली का पक्ष रखा.

दिल्ली सरकार ने की है ये तैयारी
दिल्ली सरकार ने कहा कि पिछले साल पीएम-10 और पीएम-2.5 के इंडेक्स को लगातार वॉर रूम से मानिटर किया जा रहा था. किस तरह से उसका ग्राफ बढ़ रहा है. उसमें हमने बहुत सारी गतिविधियों के साथ-साथ एक चीज को मॉनिटर किया कि पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा राज्य में पराली जलने की घटनाएं जैसे ही बढ़नी शुरू होती हैं, दिल्ली के पीएम-10 और पीएम-2.5 का ग्राफ भी बढ़ता जाता है. इसलिए आज की बैठक में मैंने सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार से सबसे पहले यही अपील की है कि पराली की समस्या को जड़ से समाधान के लिए इमरजेंसी कदम के तौर पर सभी सरकारें बायो डि-कंपोजर का युद्ध स्तर पर छिड़काव करने की तैयारी करें.

इन राज्यों ने भी अपना पक्ष रखा
बैठक में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई सरकारों ने बताया कि वे बायो डि-कंपोजर के उपयोग का निर्णय ले रहे हैं, लेकिन कई जगह से हमें सूचना मिली है कि वे कैप्सूल खरीद कर किसानों में बांटने की योजना बना रहे हैं. मैं सभी राज्यों से अनुरोध करना चाहता हूं कि किसानों को केवल कैप्सूल बांटने से यह काम जमीन पर नहीं उतर पाएगा. अगर दिल्ली सरकार यह जिम्मेदारी अपने हाथ में नहीं लेती, तो दिल्ली के अंदर भी यह काम नहीं हो पाता.

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हरियाणा और पंजाब में पराली जलने की घटनाएं बढ़ते ही दिल्ली में पीएम-10 और पीएम-2.5 का स्तर बढ़ जाता है.

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गोपाल राय ने कहा, दिल्ली के अंदर तीन जिलों में खेती होती है, वहां कृषि विभाग के अधिकारी काम करते हैं. हमने हर जिले के कृषि अधिकारी की टीम को जिम्मेदारी दी है. हम कैप्सूल लेकर खुद घोल तैयार करा रहे हैं. साथ ही घोल को किसानों के खेत में छिड़काव करने तक की सारी जिम्मेदारी सरकार अपने हाथ में ले रही है. अगर सिर्फ कैप्सूल या घोल बांट दिया जाएगा तो उससे जिस जिम्मेदारी के साथ इमरजेंसी स्तर पर काम करने की जरूरत है, वह काम जमीन पर लागू नहीं हो पाएगा. इसलिए सरकारों को आगे बढ़ कर इस काम को करने की जरूरत है.

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