HC में केंद्र सरकार ने कहा, सेंट्रल व‍िस्‍टा कंस्ट्रक्शन की जो तस्‍वीर दिखाई गई उसमें तथ्‍यों को छ‍िपाया

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्‍ट पर द‍िल्‍ली हाईकोर्ट ने रोक लगाने से क‍िया इनकार

Delhi News: द‍िल्‍ली हाईकोर्ट में केन्‍द्र सरकार का पक्ष रखते हुए तुषार मेहता ने कहा क‍ि किसी न किसी बहाने से कुछ लोग सेंट्रल विस्टा की कंस्ट्रक्शन का विरोध कर रहे हैं और इसके लिए किसी बहाने से जनहित याचिका का सहारा लिया जा रहा है.

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नई दिल्ली. सेंट्रल विस्टा की कंस्ट्रक्शन पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाइकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखा. हाईकोर्ट में तुषार मेहता ने कहा कि परियोजना को लेकर कई चुनौतियां हैं. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इस पर विचार किया और कई दिनों लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस परियोजना को मंजूरी दी. वहीं इस मामले की पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा था कि जनवरी में इसको पास किया गया. केंद्र सरकार की ज़िम्मेदारी लोगों की जान बचाने की है और जब देश में मेडिकल इमरजेंसी की स्‍थ‍ित‍ि है तो इस तरह की कंस्ट्रक्शन कैसे किया जा सकता है, जब लेबर हेल्‍थ कैंप में हालात बेहद खराब है. इस मामले में हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख ल‍िया है.

मेहता ने हाईकोर्ट में सोमवार को कहा क‍ि यह निर्माण लंबे समय से चल रहा है, लेकिन जिन लोगों को प्रोजेक्ट पसंद नहीं है वो लोग अदालत के सामने दूसरे तरीके की दलीलें अपनाकर रोकने की मांग कर रहे हैं. उन्‍होंने अप्रैल की अधिसूचना के बारे में कोर्ट को बताया कि इसमें किसी भी निर्माण गतिविधि को प्रतिबंधित नहीं किया गया था. तब रेस्तरां और कई अन्य गतिविधियों की अनुमति थी. निर्माण को लेकर सीमित प्रतिबंध 19 अप्रैल 2021 को आया, लेकिन यह केवल उन निर्माण पर था जहां ऑनसाइट श्रमिक नहीं रहते थे.

मेहता ने कहा क‍ि किसी न किसी बहाने से कुछ लोग इस निर्माण का विरोध कर रहे हैं और इसके लिए किसी बहाने से जनहित याचिका का सहारा लिया जा रहा है. उन्‍होंने कहा कि जो तस्वीरें कोर्ट को दिखाई गई हैं उसमें याचिकाकर्ता ने तथ्यों को छिपाने का काम किया है. कंस्ट्रक्शन साइट पर चिकित्सा सुविधा है और श्रमिकों को चिकित्सा सुविधा हमेशा मिल रही है.

तुषार मेहता ने कहा क‍ि दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले को एक सप्ताह के लिए स्थगित किया तो सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी ये असामान्य घटना है, जबकि उन्हें दूसरे प्रोजेक्ट में लगे अन्य कामगारों की परवाह नहीं है. उन्‍होंने कहा क‍ि इस मामले में जनहित याचिका को बहुत सीमित रखा गया है. याचिका में 2 या 3 किमी दूर अन्य श्रमिको की परवाह नहीं की गई है. याचिकाकर्ता ने कुछ अन्य परियोजनाओं पर आपत्ति नहीं की है.