दिल्ली में ऑक्सीजन संकट पर जब आया जजों को गुस्सा तो कहा- लटका देंगे...! विस्तार से पढ़ें HC में सुनवाई की रिपोर्ट

दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन संकट को लेकर हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती. (सांकेतिक तस्वीर)

दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन संकट को लेकर हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती. (सांकेतिक तस्वीर)

HC Hearing on Oxygen Crisis: दिल्ली हाईकोर्ट में ऑक्सीजन संकट के मामले पर सुनवाई के दौरान जजों ने हालात को आपराधिक बताते हुए दिल्ली सरकार से पूछा कि वह खुद का ऑक्सीजन प्लांट क्यों नहीं लगाती है. केंद्र से कहा- बताएं दिल्ली को कितनी ऑक्सीजन मिलेगी और कैसे आएगी.

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  • Last Updated: April 25, 2021, 3:18 PM IST
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नई दिल्ली. महाराजा अग्रसेन अस्पताल ने ऑक्सीजन दिलाए जाने की मांग लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की तो जज का गुस्सा सातवें आसमान पर चला गया. उन्होंने कहा कि अगर किसी ने ऑक्सीजन की आपूर्ति में खलल डाली तो उसे फांसी की सजा सुनाई जाएगी वो चाहे कोई भी हो. दरअसल, मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने कोर्ट में कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में दूसरे राज्यों से ऑक्सीजन की सप्लाई में बाधा डाली जा रही है. इस पर जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की बेंच ने काफी सख्त टिप्पणियां की. आप भी पढ़ें कोर्ट में हुई सुनवाई का पूरा ब्योरा...

HC -  क्या ऑक्सीजन टैंक निकल गए हैं?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव - हां टैंकर निकल गए हैं. सरकार की तरफ से कोशिशों में जरा भी कमी नहीं है.

जस्टिस सांघी- 3 दिनों से हम एक ही तरह की कहानी देख रहे हैं. हमें पता है कि हालात क्या है.
दिल्ली सरकार-  हमें जितनी ऑक्सीजन मिलेगी, वही हम सप्लाई कर सकेंगे. हम दिल्ली में ऑक्सीजन नहीं बना पा रहे हैं. केंद्र सरकार की ओर से महज भरोसे दिए जा रहे हैं.

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जज (दिल्ली सरकार से) - लेकिन मिस्टर राहुल मेहरा (दिल्ली सरकार के वकील) आप एक जिम्मेदार सरकार होने के चलते इस जिम्मेदारी से बच नहीं सकते. हमें पता है कि स्थिति क्या है. अगर ऐसा कोई उदाहरण है तो साफ-साफ बताएं. हम छोड़ेंगे नहीं उस अधिकारी को, क्योंकि हम साफ अपने आदेश में कह चुके हैं, जिसने भी ऑक्सीजन आपूर्ति में रुकावट डाली, उसे हम फांसी पर लटका देंगे.



राहुल मेहरा -  दिल्ली में 100 एमटी ऑक्सीजन की कमी है. बावजूद इसके हमारे 100 एमटी कम कर दिए जाएंगे, जो इस वक्त की सबसे ज्यादा जरूरत है तो हम क्या करेंगे.

जज - क्यों यह कमी आ रही है जब आपको 480 एमटी आवंटित है? सप्लाई क्यों नहीं हो पा रही है?

राहुल मेहरा - 24 घंटे में हालात नहीं सुधरे तो स्थिति हाथ से निकल जाएगी. केंद्र सरकार के अधिकारियों की तरफ से किसी भी तरह का भरोसा लिखित में आना चाहिए. नोडल ऑफिसरों पर बहुत ज्यादा बर्डन है. 4-5 अधिकारियों से कुछ नहीं होने वाला है. कम से कम 10 आईएएस अधिकारी मॉनिटरिंग के काम पर लगाए जाने चाहिए. इसके अलावा 24 अफसरों को रोज इस काम में लगाया जाए. हमारे पास 140 अस्पताल और नर्सिंग होम्स हैं.दूसरे राज्यों में सड़कों पर अब टैंकरों को नहीं रोका जा रहा है, क्योंकि यह साफ दिखने लगता है. अब फैक्ट्रियों पर राशनिंग हो रही है, जहां उत्पादन होता है. केंद्र को चाहिए कि राज्यों से कहे कि सप्लाई में रुकावट पैदा न करें.

जज - अगर ऐसा कोई उदाहरण है तो साफ-साफ बताएं हम छोड़ेंगे नहीं उस अधिकारी को, क्योंकि हम अपने आदेश में कह चुके हैं कि जिसने भी ऑक्सीजन की आपूर्ति में रिकॉर्ड डाली हम उसको फांसी पर लटका देंगे.

डाबरा (केंद्र सरकार के अधिकारी) - बाहर से सप्लाई दिल्ली तक आ चुकी है. समस्या लोकल लॉजिस्टिक में आ रही है. दिल्ली सरकार को देखना होगा जहां तक मेरी जानकारी है. मांग कई गुणा बढ़ चुकी है. लेकिन दिल्ली सरकार के साथ आज बैठक है जिसमें इन सभी मुद्दा पर चर्चा की जाएगी. लॉजिस्टिक सिस्टम को और एफिशियंट बनाने की जरूरत है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली सरकार के वकील से कहा - बाहर की बातें न करें, अदालत को बताएं.

राहुल मेहरा (दिल्ली सरकार के वकील) -  हमें अगर आवंटित कोटे से ही कम ऑक्सीजन मिलेगी तो हम क्या करेंगे. हम प्रोरेटा बेसिस पर अस्पतालों को ऑक्सीजन का आवंटन करना होगा. क्योंकि हमें तीन दिन से ही कम ऑक्सीजन मिल रही है, जितनी हमारी जरूरत है.

तुषार मेहता सॉलिसिटर जनरल -  मैं मुद्दे को सेंशनालाइज नहीं करना चाह रहा, क्योंकि यह मानवता से जुड़ा है. दूसरा हमें पैनिक क्रिएट नहीं करना है. इसीलिए मैं कोई नैरेटिव नहीं देता. इसीलिए मैं अनुरोध करता हूं कि दिल्ली सरकार के किसी सीनियर अधिकारी को अदालत के सामने लाया जाए.

जज - उदित (नोडल ऑफिसर) कहां हैं?

राहुल मेहरा (दिल्ली सरकार के वकील) - वह लगातार काम कर रहे हैं क्योंकि वे कई घंटों से काम कर रहे हैं इसलिए उन्हें रिलीव किया गया है.

तुषार मेहता सॉलीसीटर जनरल- क्या यह कारण हो सकता है राहुल? उदित न आ सके तो चीफ सेक्रेटरी को बुलाया जा सकता है.

राहुल मेहरा दिल्ली सरकार के वकील -  जब शहर में ऐसी स्थिति हो और चीफ सेक्रेटरी की एक-एक मिनट की अहमियत हो, तो क्या यह सही होगा? हमें बस केंद्र सरकार की ओर से यह बता दिया जाए कि 100 एमटी ऑक्सिजन कब तक हमारे यहां पहुंचेगी, जैसा कि वादा किया गया.

तुषार मेहता सॉलीसीटर जनरल - मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है. चीफ सेक्रेटरी पर काम का बहुत बोझ है. वह 22 घंटे काम कर रहे हैं एक दिन में. उनके कंधों पर दिल्ली की जिम्मेदारी है और हमारे अधिकारियों पर पूरे देश की. फिर भी उनकी मौजूदगी इसीलिए जरूरी है क्योंकि मामला मानवता का है.

जज-  हम कभी अधिकारियों को अदालत में नहीं बुलाना चाहते हैं, लेकिन यह इमर्जेंसी सिचुएशन है.

बत्रा अस्पताल -  हमारे यहां 33 कोरोना मरीज आईसीयू में हैं. हमारे पास इस वक्त सिर्फ इतनी ऑक्सीजन है कि एक घंटे का काम चल जाए.

जज - हम उन्हें (अस्पतालों) इसीलिए सुन रहे हैं क्योंकि वे आपात स्थिति में आ रहे हैं. पर वे भी जानते हैं कि वे सरकार द्वारा रेगुलेट होते हैं. सारे अधिकारी समस्या का समाधान निकालने में जुटे हैं.

गोल्डन अस्पताल - हमने ऑक्सिजन की कमी के वजह से कल 25 जिंदगियों को खो दिया है. मरीजों की जानें जा रही हैं. हमें अब उन मरीजों की चिंता है जो हमारे अस्पताल में भर्ती हैं. मामले की गंभीरता को समझना बहुत जरूरी है.

राहुल दिल्ली सरकार के वकील - सरकार को आज नहीं पता कि किस सप्लायर से किस अस्पताल को कितनी ऑक्सीजन मिलती है. हमें सिर्फ वॉट्सऐप पर मैसेज मिल रहा है कि सप्लाई नहीं हो रही है. क्योंकि अस्पतालों के सप्लायर्स के साथ पहले से कॉन्ट्रैक्ट चल रहे हैं. हमें ऐंड टु ऐंड चेक करना होगा कि शॉट-फॉल कहां है. दूसरा मुद्दा रीफिलिंग यूनिट को भी बताना होगा कि किस अस्पतालों को कितनी ऑक्सीजन दी गई. डॉक्यूमेंटेशन की जरूरत है. तभी स्ट्रीमलाइन करना होगा.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता -  यही मैं कह रहा हूं कि दिल्ली सरकार को स्ट्रीम लाइन करना होगा. एफिशियंट मकैनिजम बनाना होगा दिल्ली सरकार को.

पीयूष गोयल - मैंने उपसमिति के साथ बात की है, भारी वृद्धि के कारण टैंकरों की कमी है, इसलिए आयात में दिक्कत आ रही है. यहां तक कि राज्य सरकार की मेहनत से काम कर रही हैं, उद्योगपतियों से बात की है, दिल्ली, केंद्र को एक साथ काम करना है

जज - इस मामले में केंद्र और दिल्ली को मिलकर काम करना होगा अगर किसी राज्य में जरूरत कम है तो दिल्ली को ऑक्सीजन दे दी जाए केंद्र का यही काम होना चाहिए.

जयपुर गोल्डन अस्पताल - दिल्ली सरकार के अधिकारी पूरी तरह उदासीन है.

जज - महाराजा अग्रसेन अस्पताल की याचिका पर नोटिस जारी.
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