चर्चा में हैं पवन जल्लाद, जनिए कैसे और कहां से आया शब्द 'जल्लाद'

निर्भया के चारों दोषियों को फांसी देने वाले पवन जल्लाद  (फाइल फोटो)
निर्भया के चारों दोषियों को फांसी देने वाले पवन जल्लाद (फाइल फोटो)

भारतीय कथा-कहानियों में मौत की सजा देने वाले का जिक्र वधिक के रूप में आता है, फिर क्यों फांसी देने वाले को जल्लाद कहते हैं?

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 20, 2020, 9:35 AM IST
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नई दिल्ली. निर्भया को न्याय मिल गया. न्याय की इस पूरी प्रक्रिया में पवन जल्लाद भी लगातार चर्चा में रहा. वैसे तो जल्लाद शब्द किसी बेहद कठोर दिल वाले और कहा जाए तो निर्दयी के लिए प्रयोग किया जाता रहा है. यहां तक कि किसी को जल्लाद कह देने पर वो नाराज हो सकता है, लेकिन इस पूरे मामले में पवन जल्लाद अपनी ड्यूटी निभाने वाले किसी भी दूसरे महत्वपूर्ण व्यक्ति की तरह ही उभरा है.

क्यों नहीं कहते वधिक

अब शब्द जल्लाद आया कहां से. कैसे फांसी देने वाले को जल्लाद कहा जाने लगा. जबकि पुरानी भारतीय या कहें कि संस्कृत की कहानियों में वधिक का जिक्र आता है. वही अपराधियों को दंड दिया करता था. वधिक यानी वध करने वाला. वध का अर्थ काटने से होता है. पहले के जमाने में सिर काट कर ही सजा दी जाती थी. फिर भी मौत की सजा देने वाले को वधिक क्यों नहीं कहा गया?



जिल्द से है रिश्ता?
इस सवाल का उत्तर खोजने के लिए हमें जल्लाद शब्द की उत्पत्ति खोजनी होगी. जल्लाद शब्द वैसे तो जल्दा से बना माना जाता है. जल्दा शब्द जिल्द से आया है. जिल्द का अर्थ हम सब कवर से ही लेते हैं. यानी किताब की हिफाजत करने के लिए उपर लगाए जाने वाला चमड़ा जो बाद में कागज या गत्ते में तब्दील हो गया. लेकिन जिल्द का इस्तेमाल शरीर की त्वचा या कहें चमड़ी के अर्थ में भी होता रहा है. कोड़े लगा कर चमड़ी उधेड़ लेने वाले को जल्लाद कहा गया है.

कुरआन में है जिक्र

पवित्र धार्मिक किताब कुरआन के सूर ए नूरि की चौथी आयत में जिक्र आता है-
“वल्लज़ीना यरमूनअल्-मुह्सनाति सुम्म लम् यअ्तु बिअरबति शुहदाअ फ़जलीदूहुम समानीना जल्दह ला तक़्कबलू लहुम शहादतन अबदन् व उलाइक हुमुल- फ़ासिक़ून”

इसका अर्थ होता है कि ‘जो लोग पाक यानी इज्जतदार महिलाओं पर व्यभिचार या दुराचार के आरोप लगाते हैं और चार गवाह न ला पाएं तो उन्हें 80 कोड़े मारो और कभी उनकी गवाही क़बूल न करो और यही लोग बदकिरदार हैं.'

जानकार मानते हैं कि इस तरह से जल्दा शब्द का जिक्र लिखित साहित्य में आता है. जल्दाह का अर्थ 80 कोड़े की सजा से लिया जाता है. विद्वान मानते हैं कि इसी से जल्लाद शब्द बना.

अरबी फारसी और उर्दू का अदालतों में रहा है इस्तेमाल

दंड के आधुनिक तौर तरीकों में अरबी, फारसी और उर्दू भाषाओं का असर तो रहा ही है. कोर्ट कचेहरी की भाषा हमेशा से यही रही हैं और अब भी अदालतों में बहुत सारे शब्द ऐसे इस्तेमाल किए जाते हैं जो दरअसल अरबी, फारसी और उर्दू के हैं. जल्लाद भी इसी तरह के शब्दों में से एक है. यही कारण है कि इसका इस्तेमाल बहुत कठोर लोगों के लिए किया जाता है. ये अलग बात है कि निर्भया के दोषियों को सजा देने में पवन का नाम उभरा है. वो कोई ऐसे जल्लाद नहीं हैं, जिसका प्रयोग किसी को बेइजत करने वाले शब्द के तौर पर किया जाता है, बल्कि वो तो अपना कर्तव्य निभाने वाले किसी भी दूसरे आदमी की ही तरह एक इज्जतदार इंसान है.


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