आत्मनिर्भरता के लिए प्रशिक्षण केंद्र की ओर महिलाओं ने बढ़ाए कदम, सीख रहीं नया हुनर
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आत्मनिर्भरता के लिए प्रशिक्षण केंद्र की ओर महिलाओं ने बढ़ाए कदम, सीख रहीं नया हुनर
महिलाओं का प्रशिक्षण केंद्रों पर जाने का मकसद हुनर सीख कर आय का नया जरिया ढूंढना है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोरोना संकट (Corona Virus) के दौर में आत्मनिर्भरता के लिए महिलाएं प्रशिक्षण केंद्रों (Training Center) की ओर बढ़ रही हैं. खुद को सबल बनाने और रोजगार (Employment) के लिए वो यहां कई तरीके के प्रशिक्षण ले रही हैं

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Corona Virus) महामारी से उबर कर अब जिंदगी को पटरी पर वापस लाने के लिए जद्दोजहद शुरू हो गई है. कोरोना काल (Corona Crisis) ने हर किसी के जीवन को प्रभावित किया है. आत्मनिर्भरता के लिए महिलाएं अब प्रशिक्षण केंद्रों (Training Center) की ओर बढ़ रही हैं. खुद को सबल बनाने और रोजगार (Employment) के लिए महिलाएं कई तरीके के प्रशिक्षण ले रही हैं

इस मुश्किल समय में घरों में कामकाज करने वाली महिलाओं का काम चौपट हो गया और उनके सामने बेरोजगारी की नौबत आ गई. ऐसे में बस्तियों में रहने वाली यह महिलाएं रोजगार के लिए खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण केंद्र जाकर अलग-अलग तरीके की ट्रेनिंग ले रही हैं. जिससे कि आने वाले वक्त में इन्हें किसी पर निर्भर न रहना पड़े. साथ ही यह रोजगार का भी जरिया बने. सेवा भारती की सदस्य गुंजन नरूला ने बताया कि उनके यहां कई महिलाएं आती हैं जो अचार और पापड़ बनाने का काम करती हैं. उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस से घरों में कामकाज करने वाली महिलाओं की नौकरी चली गई. जिसके बाद वो अब रोजगार का जरिया ढूंढने के लिए अलग-अलग तरीके की ट्रेनिंग ले रही हैं.

घर-घर में बनाई जा रही है राखी
जब मुश्किल घड़ी आती है तो हालात सब कुछ सिखा देता है. कुछ ऐसी ही कहानी प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण ले रही महिलाओं की है. ज्यादातर महिलाओं ने बताया कि काम-धंधा चौपट हो जाने के कारण उन्हें कुछ नया सीखने के लिए कदम बढ़ाना पड़ा और वो अब राखियां बना रही हैं. स्वदेशी राखी बनाने के पीछे एक और मकसद दुश्मन चीन को आर्थिक रूप से कमजोर करना है. साथ ही रोजगार हासिल करना भी है. इसीलिए महिलाओं ने प्रशिक्षण केंद्रों की तरफ कदम बढ़ाया और राखी बनाने का काम सीखा.
प्रशिक्षण केंद्र के साथ ऑनलाइन ले रही है ट्रेनिंग


प्रशिक्षण केंद्रों में महिलाएं सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए विविध प्रकार की ट्रेनिंग ले रही हैं. जिसमें ब्यूटी कोर्स, सिलाई-कढ़ाई के साथ राखी बनाना, मिट्टी की मूर्तियां बनाना, अचार-पापड़ बनाना शामिल है. कुछ महिलाओं ने बताया कि लॉकडाउन के चलते उनकी नौकरी चली गई और घर में खाने-पीने की दिक्कत हो गई. तब उन लोगों ने घर में ही बैठ कर काम शुरू किया और सेवा भारती के जरिए ऑनलाइन प्रशिक्षण लिया. इसके अलावा बहुत सी महिलाएं प्रशिक्षण केंद्र में जाकर राखी बनाने का काम कर रही हैं. वो यहां लिफाफे बनाने का काम कर रही हैं. साथ ही नए-नए और भी काम सीख रही हैं ताकि खुद को आत्मनिर्भर बना कर रोजगार के नए जरिए ढूंढ सकें.

सेवा भारती और कैट के जरिए दिया जा रहा है प्रशिक्षण
जिन महिलाओं को कुछ और सीखने की ललक है उनके लिए सेवा भारती के जरिए कई प्रशिक्षण केंद्र चलाए जा रहे हैं. वहीं व्यापारी संगठन संस्था के आठ भी महिलाओं को राखी बनाना सिखा रहा है ताकि आत्मनिर्भर भारत की तरफ यह महिलाएं अपने कदम बढ़ाएं और अपने लिए आय का जरिया बना सकें. इतना ही नहीं विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) से संबद्ध संस्था भी महिलाओं को राखी बनाने का काम सिखा कर उन्हें रोजगार की राह दिखा रही है.
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