दिल्ली सरकार-DU के बीच बढ़ी खींचतान, कल सीएम आवास तक फिर निकालेंगे प्रोटेस्ट मार्च, दो सप्ताह से बंद हैं कॉलेज

दिल्ली सरकार-दिल्ली विश्वविद्यालय के बीच Teachers Salary मामले को लेकर खींचतान और बढ़ गई है.

दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (DUTA) के आह्वान पर दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) के सभी कॉलेजों में 12 मार्च से पूर्ण हड़ताल चल रही है. बावजूद इसके दिल्ली सरकार (Delhi Government) की ओर से इस मामले को समाप्त करने की कोई पहल अभी तक नहीं की गई है. डूटा की ओर से कल 24 मार्च को दिल्ली विश्वविद्यालय से मुख्यमंत्री आवास तक विरोध रैली निकालने का फैसला भी किया है.

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    नई दिल्ली. दिल्ली सरकार के 12 पूर्ण वित्त पोषित कॉलेजों में ग्रांट व वेतन को लेकर मचा घमासान अभी थमा नहीं है. दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के टीचर्स के बीच इस मामले को लेकर खींचतान और ज्यादा बढ़ गई है.

    दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (DUTA) के आह्वान पर दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) के सभी कॉलेजों में 12 मार्च से पूर्ण हड़ताल चल रही है. बावजूद इसके दिल्ली सरकार (Delhi Government) की ओर से इस मामले को समाप्त करने की कोई पहल अभी तक नहीं की गई है. डूटा की ओर से कल 24 मार्च को दिल्ली विश्वविद्यालय से मुख्यमंत्री आवास तक विरोध रैली निकालने का फैसला भी किया है.

    डूटा की ओर से आह्वान किया गया है कि कल 24 मार्च को पूर्वाहन 11 बजे सभी टीचर्स-स्टॉफ डीयू वीसी ऑफिस गेट नं. 1 पर एकत्रित होंगे. इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास तक विरोध रैली निकाली जाएगी. इससे पहले भी टीचर्स सीएम आवास तक रैली नि‍काल चुके हैं.DUTA के आह्वान पर कल 24 मार्च को दिल्ली विश्वविद्यालय से मुख्यमंत्री आवास तक विरोध रैली निकालने का फैसला भी किया है.



    डूटा के आह्वान पर लगातार दूसरे सप्ताह यह विरोध अनियमितता और इन कॉलेजों में आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार द्वारा कॉलेजों पर पैटर्न ऑफ अस्सिटेंस थोपना, सीनियर एकाउंटेंट अधिकारियों की नियुक्ति और निरन्तर हस्तक्षेप के विरोध में किया जा रहा है. दिल्ली सरकार के खिलाफ लगातार दूसरे सप्ताह भी दिल्ली विश्वविद्यालय पूरी तरीके से बंद है.

    विश्वविद्यालय के गेट नंबर एक पर विरोध-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (NDTF) के अध्यक्ष डॉ ए के भागी ने कहा कि दिल्ली सरकार का शिक्षा मॉडल एक छलावा है.
    दिल्ली सरकार के कई पूर्ण रूप से वित्त पोषित कॉलेज जर्जर अवस्था में चल रहे हैं. कई कॉलेजों में  बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है. टॉयलेट जैसी जरूरी सुविधाएं भी जर्जर हाल में पहुंच चुकी है.

    कॉलेजों में कुर्सी और डेस्क जैसी मूलभूत सामग्री भी छात्रों को उपलब्ध नही हो पा रही है. दूसरी ओर दिल्ली सरकार दुनिया भर में अपने शिक्षा मॉडल (Education Model) और शिक्षा बजट का ढिंढोरा पीट रही है.

    डॉ भागी ने इस अवसर पर कहा कि दरअसल दिल्ली सरकार इन कॉलेजों का निजीकरण करना चाहती है. इसलिए वह पैटर्न ऑफ अस्सिटेंस को लागू करने के लिए हस्तक्षेप कर रही है. स्टूडेंट फंड से वेतन देने का दबाव बनाने के लिए प्रबंध समितियों का दुरुपयोग किया जा रहा है.

    उन्होंने कहा कि कि एनडीटीएफ कॉलेज और विश्विद्यालय की स्वायत्तता में किसी भी दखल का पुरजोर विरोध करेगा. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का हस्तक्षेप अवैधानिक और अलोकतांत्रिक है.

    डॉ भागी ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि हुए पैटर्न ऑफ असिस्टेंस  (Pattern of Assistance) के बहाने आम आदमी पार्टी सरकार (AAP Government) छात्रों की फीस से शिक्षक और कर्मचारियों के वेतन देने के लिए दबाव बना रही है है. अगर स्टूडेंट फीस से वेतन दिया जाएगा तो इन कॉलेजों की फीस कई गुना बढ़ जाएगी. इससे गरीब छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो जाएंगे.

    दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) कार्यकारी परिषद सदस्य डॉ वी एस नेगी ने कहा कि पैटर्न ऑफ असिस्टेंट के माध्यम से दिल्ली सरकार इन कॉलेजों की स्वायत्तता को खत्म करना चाहती है. दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान की स्वायत्तता में दखल का एनडीटीएफ विरोध करता है.

    डॉ नेगी ने कहा कि दिल्ली सरकार शिक्षा के प्रति असंवेदनशील है. इसी कारण वैश्विक महामारी में भी शिक्षक-कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है. पेंशन और मेडिकल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए शिक्षक-कर्मचारियों को अनेक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

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