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Indian Classical Music: तबला को फ‍िर से दिल्ली शैली से रूबरू कराने का जिम्मा उठाएंगे शास्त्रीय संगीत के नए उस्ताद

Indian Classical Music: तबला को फ‍िर से दिल्ली शैली से रूबरू कराने का जिम्मा उठाएंगे शास्त्रीय संगीत के नए उस्ताद

देश विदेश के अनेक मंचों पर प्रस्तुति तथा तबला के विद्यार्थियों को पुनः दिल्ली शैली से रूबरू कराने का जिम्मा भी उनके उस्ताद ने उन्हें ही सौंप रखा है. (Photo Twitter)

देश विदेश के अनेक मंचों पर प्रस्तुति तथा तबला के विद्यार्थियों को पुनः दिल्ली शैली से रूबरू कराने का जिम्मा भी उनके उस्ताद ने उन्हें ही सौंप रखा है. (Photo Twitter)

Indian Classical Music: दिल्ली घराना शैली (दिल्ली बाज) के वादक सूरज निर्वाण का मानना है कि दिल्ली घराना सभी तबला घरानों में सबसे पुराना है. यहाँ की शैली को लोकप्रिय रूप से "दो अंगलियनों का बाज" (दो अंगुलियों की शैली) के रूप में जाना जाता है. उनका कहना है क‍ि सूरज निर्वाण इस कीमती तबला वादन कला में अपार दक्षता रखते हैं और इसे बजाने की एक अनूठी शैली विकसित की है.

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    नई दिल्ली. भारतीय शास्त्रीय संगीत (Indian Classical Music) पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. प्रसिद्ध तबला और दिल्ली घराना शैली (दिल्ली बाज) के वादक स्वर्गीय पंडित सुभाष निर्वाण के पुत्र सूरज निर्वाण का मानना है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत के इस सच्चे सार को दुनिया भर में प्रचारित किया जाना चाहिए. सूरज को भरोसा है कि वह श्रोताओं की आत्मा को शुद्ध कर सकता है और उन्हें क्षणिक आंतरिक शांति प्रदान कर सकता है.

    अपनी अनूठी वादन शैली (Playing Style) के माध्यम से इसे केवल तकनीकी रचनात्मकता बनाने के अलावा, अपनी सुरीली धुनों के साथ, इस क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं. उनकी परिपक्वता, रागिनी, और भावपूर्ण ध्यान प्रदर्शन ने इतनी कम उम्र में दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई है.

    सूरज न केवल सटीक बोलों को निष्पादित करने के अपने बेजोड़ कौशल के साथ श्रोताओं को आकर्षित करने का हुनर रखते हैं, बल्कि जादुई रूप से गहन तानवाला बनाने के लिए उनके वादन में बहुत कुछ करते हैं, जो आज के तबला वादन की तेज शैली में लगभग खत्म, हो गया है.

    दिल्ली घराना सभी तबला घरानों में सबसे पुराना
    उनका कहना है कि दिल्ली घराना सभी तबला घरानों में सबसे पुराना है. यहाँ की शैली को लोकप्रिय रूप से “दो अंगलियनों का बाज” (दो अंगुलियों की शैली) के रूप में जाना जाता है. सूरज निर्वाण इस क़ीमती तबला वादन कला में अपार दक्षता रखते हैं और इसे बजाने की एक अनूठी शैली विकसित की है. वादन में उनकी प्रवीणता और बायां और दायां के बीच संतुलन बनाए रखने का स्तर बेजोड़ है.

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    जटिल स्याही और किनार के बोलों से लेकर निर्दोष ‘धिर-धिर’ तक और असाधारण रूप से सामंजस्यपूर्ण उपज बनाकर पारंपरिक “क़ायदा” का विस्तार करना उनकी कला में उनके चरित्र का एक आदर्श प्रतिबिंब है. हाल ही में, सूरज को पंडित जसराज संस्थान द्वारा आयोजित “मेवाती संगीत मार्तंड पर्व” उत्सव में दिल्ली घराना तबला की मनमोहक धुनों में दर्शकों को मन्त्रमुग्ध करने का मौका मिला.

    विश्व स्तर पर पारंपरिक भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुंदरता को बढ़ाने जरूरत
    सूरज ने संगीत और ललित कला विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय में तबला संकाय के पद पर भी काम किया है. इसके अलावा, वह अन्य प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों जैसे कला आश्रम, श्री राम भारतीय कला केंद्र, और अन्य में संकाय का हिस्सा थे. वर्तमान में, सूरज निर्वान ढाका, बांग्लादेश में शिक्षक-सह-कलाकार के रूप में तैनात हैं. उन्हें तबला सिखाने और प्रचार करने के लिए आईसीसीआर की ओर से यह असाधारण अवसर दिया गया है. विश्व स्तर पर हमारे पारंपरिक भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुंदरता को बढ़ाने की दृष्टि के साथ, सूरज हर दिन नए मील के पत्थर स्थापित कर रहे हैं.

    आज के जमाने में तबला बजाकर जीविका चला पाना बेहद कठिन
    उनका मानना है क‍ि आज के ज़माने में तबला बजाकर जीविका चला पाना बेहद कठिन है. शास्त्रीय संगीत के कॉन्सर्ट्स होते हैं, परंतु अधिक फीस नहीं मिलने से कई कलाकारों का मनोबल टूट जाता है. इसलिए बहुत से तबला वादक घराने से शिक्षित होते हुए भी, शास्त्रीय संगीत को कम, बल्कि फ़िल्मी या सुगम संगीत में संगत करके अपना गुज़र बसर कर रहे हैं. तबला में अत्यधिक प्रतिस्पर्धा के कारण कई लोग ऐसे भी हैं जो दूसरे पेशे को चुनना ही उचित समझते हैं.

    तबला के दिल्ली घराने की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए अपने उत्तरदायित्व को पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं. देश विदेश के अनेक मंचों पर प्रस्तुति तथा तबला के विद्यार्थियों को पुनः दिल्ली शैली से रूबरू कराने का जिम्मा भी उनके उस्ताद ने उन्हें ही सौंप रखा है.

    Tags: Classical Music, Delhi news

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