क्‍या वास्‍तव में बच्‍चों को प्रभावित करेगी कोरोना की तीसरी लहर, जानिए क्‍या कहते हैं आंकड़े

कोरोना की तीसरी लहर में बच्‍चों के प्रभावित होने के खतरों पर विशेषज्ञों का कहना है कि इसके स्‍पष्‍ट संकेत नहीं हैं.  (तस्वीर: )

कोरोना की तीसरी लहर में बच्‍चों के प्रभावित होने के खतरों पर विशेषज्ञों का कहना है कि इसके स्‍पष्‍ट संकेत नहीं हैं. (तस्वीर: )

आईसीएमआर में टास्‍क फोर्स ऑपरेशन ग्रुप फॉर कोविड हेड डॉ. एन के अरोड़ा कहते हैं कि पिछले साल के आंकड़े देखें तो कोरोना की पहली लहर में कुल कोरोना मरीजों में 10 साल से कम उम्र के 3.5 फीसदी बच्‍चे कोरोना की चपेट में आए थे. जबकि अगर कोरोना की 2021 में आई दूसरी लहर को देखें तो 2.8 फीसदी बच्‍चों को कोरोना हुआ है.

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नई दिल्‍ली. देशभर में कोरोना की दूसरी लहर (Corona Second Wave) ने हाहाकार मचा दिया है. 2020 में आई पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर में न केवल कोरोना के रिकॉर्ड तोड़ मामले सामने आए, वहीं इसी अनुपात में मौतें भी हुई हैं. हालांकि अब देश में कई स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ और वैज्ञानिक तीसरी लहर को लेकर आगाह कर रहे हैं. इतना ही नहीं उनका कहना है कि यह लहर छोटे बच्‍चों को अपना शिकार बना सकती है.

दूसरी लहर में अपनों को खोने के बाद पहले से डरे हुए लोगों को तीसरी लहर (Covid 19 Third wave) का खतरा और ज्‍यादा डरा रहा है. हालांकि विशेषज्ञों की बच्‍चों को लेकर बताए गए खतरे पर विशेषज्ञों का एक तबका और आंकड़े कुछ और ही बयां कर रहे हैं. इनका कहना है कि तीसरी लहर को लेकर लोगों को डरने की जरूरत नहीं है लेकिन सरकारों को सबक लेने के साथ ही इस हिसाब से तैयारियां करने की बड़ी आवश्‍यकता है.

कोरोना की पहली लहर और दूसरी लहर के आंकड़े देखें तो इनके आधार पर तीसरी लहर में बच्‍चों के ज्‍यादा प्रभावित होने की संभावना नहीं है. हालांकि खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के टास्‍क फोर्स ऑपरेशन ग्रुप फॉर कोविड के प्रमुख डॉ. एन के अरोड़ा का कहना है कि तीसरी लहर को लेकर कही जा रही सभी बातें सही नहीं हैं.

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दोनों लहरों में बच्‍चों के संक्रमित होने का आंकड़ा

डॉ. अरोड़ा कहते हैं कि पिछले साल के आंकड़े देखें तो कोरोना की पहली लहर में कुल कोरोना मरीजों में 10 साल से कम उम्र के 3.5 फीसदी बच्‍चे कोरोना की चपेट में आए थे. जबकि अगर कोरोना की 2021 में आई दूसरी लहर को देखें तो 2.8 फीसदी बच्‍चों को कोरोना (Corona) हुआ है. लेकिन बच्‍चों के संक्रमित होने की संख्‍या इस बार इसलिए ज्‍यादा दिखाई दे रही है क्‍योंकि इस बार कोरोना संक्रमितों (Corona Infected) का कुल आंकड़ा काफी ज्‍यादा बढ़ा है. हालांकि प्रतिशत पहली लहर के मुकाबले कम है.

दोनों लहरों में बच्‍चों की मौत



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बताया जा रहा है कि बच्चों को वैक्सीन (Vaccine) लगवाने से कोविड-19 से निपटने में बहुत मदद मिलेगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

वहीं 10 साल से कम उम्र के बच्‍चों की मौत के आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले साल और इस  साल पहली और दूसरी लहर में बच्‍चों की मौत का प्रतिशत .3 फीसदी रहा है. यानी कि दोनों ही लहरों में बच्‍चों की मौतें समान प्रतिशत में हुई हैं.

इसलिए दिखाई दी हैं दूसरी लहर में बच्‍चों की मौतें

डॉ. अरोड़ा कहते हैं कि आंकड़े के उलट कोरोना की दूसरी लहर में युवाओं और बच्‍चों की मौतें ज्‍यादा दिखाई दे रही हैं जबकि प्रतिशत दोनों लहरों में बराबर रहा है. इसकी वजह डिनोमिनेटर इफैक्‍ट है. यानि की इस बार कोरोना के कुल मरीजों की संख्‍या इस बार बढ़ी है. इसलिए उस हिसाब से बच्‍चों की मौतों की संख्‍या भी बढ़ी है. हालांकि केंद्र और राज्‍य सरकारें अगर संक्रमितों की कुल संख्या को नियंत्रित करती हैं, साथ ही साथ बच्‍चों के लिए सुविधाएं तैयार करती हैं तो तीसरी लहर में भी बच्‍चों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा.

डॉ. अरोड़ा कहते हैं कि अभी कोरोना की वैक्‍सीन भी लगना शुरू नहीं हुई है, इसलिए भी विशेषज्ञ बच्‍चों को लेकर खतरे के लिए आगाह कर रहे हैं. हालांकि बच्‍चों के परिजनों को भयभीत होने की जरूरत नहीं है. बल्कि सरकारों को और प्रशासन को तैयारियां करनी चाहिए.

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