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मनसुख मांडविया कैसे बने मोदी मंत्रिमंडल के इतने ताकतवर मंत्री, प्रधानमंत्री क्यों करते हैं उन पर इतना भरोसा?

मनसुख मंडाविया के बारे में 9 साल पहले की गई पीएम मोदी की भविष्यवाणी आज सच साबित हुई है.

मनसुख मंडाविया के बारे में 9 साल पहले की गई पीएम मोदी की भविष्यवाणी आज सच साबित हुई है.

मनसुख मांडविया (Mansukh Bhai Mandaviya) 2016 में ही केंद्रीय मंत्री बन गए थे, लेकिन उस वक्त उन्हें मोदी सरकार (Modi Government) में राज्य मंत्री बनाया गया था. रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अलावा उनके पास सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का प्रभार था. 2019 में जब मोदी सरकार ने वापसी की तो मांडविया रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में तो राज्यमंत्री ही रहे, लेकिन साथ ही उन्हें पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दिया गया.

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नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिपरिषद के हालिया विस्तार (Modi Cabinet Expansion 2021) में जिन बड़े चेहरों को अहम जिम्मेदारी मिली है उनमें केंद्रीय मंत्री और गुजरात से राज्यसभा सांसद मनसुख मांडविया (Mansukh Bhai Mandaviya) की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है. 49 साल के मनसुख मांडविया के बारे में आज से 9 साल पहले पीएम मोदी (PM Modi) ने एक भविष्यवाणी की थी, जो अब सच साबित हुई है. 2012 में मांडविया जब पहली बार गुजरात से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए थे, तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी ने उनके बारे में एक भविष्यवाणी की थी. पीएम मोदी ने कहा था, 'उनको मांडविया में बहुत अधिक संभावनाएं दिख रही हैं. यह इतनी छोटी घटना नहीं है, जितना आपलोग समझ रहे हैं. आपलोग डायरी में नोट करके रख लें मांडविया का भविष्य काफी उज्ज्वल है और मुझे पूरा भरोसा है कि मैं सच साबित होऊंगा.' बुधवार को कैबिनेट विस्तार में मनसुख मांडविया को देश के नए स्वास्थ्य मंत्री के साथ-साथ रसायन एवं उर्वरक मंत्री का भी प्रभार दिया गया है, जो बताता है कि मनसुख मांडविया का कद देश की राजनीति में कैसे बढ़ा है. बीते कुछ दिनों से मांडविया के बारे में मीडिया में कई तरह की बातें हो रही हैं, लेकिन न्यूज 18 हिंदी आपको मनसुख मांडविया के बारे में वह बताने जा रही है जो आज तक किसी भी नेशनल मीडिया ने न दिखाया है और न ही लिखा है.

मनसुख मांडविया का कद ऐसे बढ़ता चला गया
जब मनसुख मांडविया को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में डॉ. हर्षवर्धन की जगह नया कैबिनेट मंत्री बनाया तो उसके बाद मीडिया ने उनके बारे में पता करना शुरू किया. जो जानकारियां सामने आईं, उससे उनके व्यक्तित्व के बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं मिलती. जो बुनियादी बातें सामने आईं, उनमें यह बताया गया कि उनका जन्म 1 जून, 1972 को गुजरात के भावनगर जिले के पालिताना तालुक के हनोल गांव में हुआ था. 20 साल की उम्र में वे 1992 में अखिल भारतीय विधार्थी परिषद से जुड़े और बहुत जल्द ही प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य बन गए. यहां से जो उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ, वह अभी भारत सरकार के दो प्रमुख मंत्रालयों के कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी तक पहुंचा है. मांडविया स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अलावा रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के भी कैबिनेट मंत्री हैं. पहले वे इसी मंत्रालय में राज्य मंत्री थे. मांडविया मोदी सरकार के उन 7 मंत्रियों में शामिल हैं, जिनको इस बार के कैबिनेट विस्तार में प्रमोट किया गया है.

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केंद्रीय मंत्री और गुजरात से राज्यसभा सांसद मनसुख मांडविया की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है.


केंद्र में कब मंत्री बनाए गए
वैसे तो मनसुख मांडविया 2016 में ही केंद्रीय मंत्री बन गए थे, लेकिन उस वक्त उन्हें मोदी सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया था. रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अलावा उनके पास सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का प्रभार था. 2019 में जब मोदी सरकार ने वापसी की तो मांडविया रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में तो राज्यमंत्री ही रहे, लेकिन साथ ही उन्हें पतन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दिया गया.

कब पहली बार विधायक बने थे?
2002 में जब मनसुख मांडविया गुजरात के पालिताना से विधायक बने थे तो उस वक्त उनकी उम्र महज 30 साल थी. उस वक्त वे गुजरात के सबसे युवा विधायक थे. एक दिन अपने विधानसभा क्षेत्र में जब वे लोगों से मिल रहे थे तो एक गांव के लोगों ने उनसे अपनी बहुत सारी शिकायतें कीं. किसी ने कहा विधायक जी मेरे घर के सामने नाली का पानी बाहर आ जाता है और आने-जाने में बहुत दिक्कत होती है. मनसुख मांडविया ने नाली को देखा और यह पाया कि नाली तो अच्छी बनी हुई है, लेकिन उसकी सफाई नहीं हुई है और इस वजह से पानी बाहर आ रहा है. उन्होंने शिकायत करने वाले को कहा कि शनिवार और इतवार को मैं और मेरी पत्नी आएंगे और आपके घर के सामने की नाली साफ कर देंगे ताकि आपको आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं हो.

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2002 में जब मनसुख मांडविया गुजरात के पालिताना से विधायक बने थे तो उस वक्त उनकी उम्र महज 30 साल थी. (फाइल फोटो- केशुभाई के साथ मांडविया)


पहली बार विधायक बनने पर लोगों के दिल में ऐसे बनाई जगह
मनसुख मांडविया की इस बात ने शिकायत करने वाले और उस गांव के दूसरे लोगों को कर्तव्यबोध का अहसास कराया और उन लोगों को लगा कि ये मामूली काम तो उनका अपना है और गांव के लोगों ने खुद ही नाली की सफाई शुरू कर दी. काम करने के उनके इस अंदाज ने स्थानीय स्तर पर उन्हें लोगों के बीच काफी लोकप्रिय बनाया. जहां सरकारी योजनाओं के तहत और विधायक निधि के जरिए काम होना होता था, वहां वे इन रास्तों को अपनाते थे और जहां जन भागीदारी से काम हो सकता था, वहां वे लोगों को एकजुट करके काम कराते थे.

मोदी कैबिनेट में ऐसे दिखाई काम करने वाले मंत्री की पहचान
गुजरात की तरह केंद्र में भी पहली बार केंद्रीय मंत्री बनने के बाद मनसुख मांडविया ने अपनी पहचान काम करके दिखाने वाली मंत्री की बनाई. आम तौर पर राज्य मंत्रियों के पास कोई खास जिम्मेदारी नहीं होती. ऐसे में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के राज्य मंत्री के तौर पर उन्होंने एक ऐसी योजना को अपने हाथ में लिया जिस पर किसी का कोई खास ध्यान नहीं था और जो योजना बहुत बुरी स्थिति में थी. इस योजना का अब नाम है प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना. इस योजना के तहत जनऔषधि केंद्र चलाए जाते हैं जहां बहुत कम कीमत पर जेनरिक दवाएं मिलती हैं. जब 2014 में केंद्र में मोदी सरकार बनी थी तो उस वक्त तक जनऔषधि केंद्रों की संख्या सिर्फ 99 थी. जब मनसुख मांडविया ने इस योजना का काम अपने हाथों में लिया तो उस वक्त इन केंद्रों की संख्या 300 के आसपास थी.

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जब 2014 में केंद्र में मोदी सरकार बनी थी तो उस वक्त तक जनऔषधि केंद्रों की संख्या सिर्फ 99 थी.


भारतीय जनऔषधि केद्रों को लेकर किया बड़ा काम
मनसुख मांडविया ने इस योजना के विभिन्न आयामों का विस्तृत अध्ययन किया और पहले अपने कैबिनेट मंत्री अनंत कुमार से बात की. बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह इच्छा जाहिर की, वे गरीबों को सस्ती दवा उपलब्ध कराने वाली इस योजना पर काम करना चाहते हैं. मनसुख मांडविया ने इस योजना का कायापलट कर दिया. इस योजना का क्रियान्वयन करने वाली ब्यूरो ऑफ फार्मा पीएसयूज ऑफ इंडिया में उन्होंने कई स्तर पर सुधार किए और इसे बाजार की प्रतिस्पर्धा में टिकने के लायक बनाया. आपूर्ति और भंडारण की व्यवस्था का दुरुस्त किया. आज पूरे देश में जनऔषधि केंद्रों का बहुत बड़ा नेटवर्क है. हर जिले में जनऔषधि केंद्र खुल गए हैं. मनसुख मांडविया ने जब यह काम शुरू किया था, उस वक्त सिर्फ 300 जनऔषधि केंद्र थे, 6 जुलाई, 2021 तक इनकी संख्या बढ़ाकर मनसुख मांडविया ने 7,891 कर दी.

कोरोना की दूसरी लहर में रेमडेसिविर की उत्पादन क्षमता बढ़ा दी
केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपने पांच साल के सफर में मनसुख मांडविया प्रधानमंत्री मोदी की पसंद के तौर पर उभरे हैं तो उसकी सबसे प्रमुख वजह यह है कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे उन्होंने बहुत ईमानदारी से निभाया है और काम करके दिखाया है. जब कोरोना की दूसरी लहर में देश को रेमडेसीविर की जरूरत पड़ी तो उन्होंने फार्मा विभाग के मंत्री के तौर पर यह सुनिश्चित किया 24 घंटे के अंदर देश की उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी हो. उन्होंने निजी कंपनियों से खुद ही संपर्क साधा और हर दिन मॉनिटरिंग करके यह सुनिश्चित किया कि कम से कम समय में इसकी आपूर्ति कैसे सुधरे.

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मनसुख मांडविया के बारे में कहा जाता है कि वह बेहद सरल स्वभाव के हैं--फाइल फोटो- (पिता के साथ)


कोरोना काल में इस तरह निभाई अपनी जिम्मेवारी
ऐसे ही जब ब्लैक फंगस बढ़ा तो उन्होंने इसकी इंजेक्शन एंफोटेरिसिन-बी के भारत में हो रहे उत्पादन को सिर्फ दो महीने में बढ़ाकर छह गुना करना सुनिश्चत किया. अप्रैल में जहां सिर्फ 62,000 एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन का उत्पादन भारत में हो रहा था, जून में इसका उत्पादन बढ़कर 3.75 लाख वाइल हो गया. ऑक्सिजन किल्लत दूर करने से लेकर हर दिन के साथ वैक्सीन आपूर्ति बेहतर करने की दिशा में भी उन्होंने लगातार काम किया है. प्रधानमंत्री मोदी ने अगर उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी दी तो दवाओं और खास तौर पर कोरोना संकट के दौरान जरूरी इंजेक्शन और दवाओं के मोर्चे पर मनसुख मांडविया ने जो काम किए हैं, वह एक मुख्य वजह रही.

राज्य मंत्री के तौर पर क्या किया
पोत परिवहन मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री के तौर पर उन्होंने कई बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत की. इस क्षेत्र में सुधार के लिए कई विधेयकों को संसद से पारित करवाकर कानून बनवाया. जलमार्ग विकास के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किए. उनके कार्यकाल में भारत की पहली नियमित सीप्लेन सेवा अहमदाबाद से केवड़िया के बीच शुरू हुई. साथ ही देश के कई अन्य मार्गों पर सीप्लेन उड़ाने की योजना पर क्रियान्वयन शुरू हुआ.

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मनसुख मांडविया की एक पहचान ‘साइकिल वाले मंत्री’ की भी रही है.


इस तरह बनाई अपनी पहचान
मनसुख मांडविया की एक पहचान ‘साइकिल वाले मंत्री’ की भी रही है. जब वे पहली बार मंत्री बने तो शपथ ग्रहण के लिए साइकिल से राष्ट्रपति भवन गए थे. दूसरी बार भी शपथ ग्रहण के लिए वे साइकिल से ही गए थे. लेकिन, बहुत कम लोगों को यह मालूम है कि मंत्री बनने से पहले भी वे बतौर राज्यसभा सांसद अक्सर साइकिल से ही संसद जाते थे.

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मांडविया कभी पैदल तो कभी साइकिल से संसद जाते हैं
देश के नए स्वास्थ्य मंत्री अपनी सादगी के लिए भी जाने जाते हैं. पार्लियामेंट कवर करने वाले पत्रकार संसद सत्र के दौरान अक्सर यह देखते थे कि पोत परिवहन मंत्री के पद पर रहने के बावजूद मनसुख मांडविया परिवहन भवन स्थिति अपने कार्यालय से पैदल ही सड़क पार करके संसद भवन पहुंच जाते थे. केंद्रीय मंत्री रहने के बावजूद एयरपोर्ट मेट्रो में भी वे अक्सर आते-जाते दिख जाते थे. मंत्री बनने पर बंगले की पात्रता रखने के बावजूद बतौर सांसद उन्हें जो फ्लैट मिला था, उसी में वे लंबे समय तक रहे. ऐसा लगता है कि सादगी के साथ लो प्रोफाइल रहते हुए बेहतर प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री को परिणाम देने की जो छवि मनसुख मांडविया ने बनाई है, यही वजह रही कि सरकार में भी लगातार उनका प्रमोशन हुआ और राजनीतिक हैसियत भी लगातार बढ़ती गई.

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