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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष : दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल की शान हैं छंदा

छंदा मजुमदार को प्रेसीडेंट मेडल मिल चुका है.

छंदा मजुमदार को प्रेसीडेंट मेडल मिल चुका है.

कई आतंकवादी ऑपरेशन में अहम भूमिका निभा चुकी हैं छंदा मजुमदार. बटला हाउस एनकाउंटर मामले में गिरफ्तार आतंकियों के खिलाफ पुख्ता तकनीकी सबूत इन्होंने ही जुटाए थे.

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नई दिल्ली. महिला दिवस पर पहली बार कैमरे के सामने आईं दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल (Delhi Police special cell) की एक जांबाज महिला अफसर. इन्हें 2020 में देश के गृह मंत्री (Home Minister) ने प्रेसीटेंड मेडल (President's Medal) से नवाजा है. आपको बता दें कि यह जांबाज महिला अफसर मोहन चन्द्र शर्मा (बटला हाउस एनकाउंटर में शहीद) के साथ कई आतंकवादी ऑपरेशन में अहम भूमिका निभा चुकी है. बटला हाउस एनकाउंटर मामले में गिरफ्तार आतंकियों के खिलाफ पुख्ता तकनीकी सबूत इन्होंने ही जुटाए थे. एनकाउंटर के वक्त मौके पर मौजूद थीं यह महिला अफसर. इनका नाम है छंदा मजुमदार सेजवानी.

स्पेशल सेल में डेटा एनालिस्ट

दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल काउंटर इंटेलीजेंस यूनिट में डेटा एनालिस्ट के पद पर काम करती हैं छंदा. उनका काम आतंकि गतिविधियों पर नजर रखने का है. वे तकनीक की मदद से कुख्यात आतंकियों के फोन कॉल इंटरसेप्ट करती हैं, देश विरोधी गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाती हैं. कई खूंखार आतंकियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में इनकी सूझबूझ बहुत काम आई है. इनके काम ने इन्हें स्पेशल सेल की तेज तर्रार महिला अधिकारी के तौर पर पहचान दिलाया है. छंदा ने अपने तकनीकी स्किल से लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, इंडियन मुजाहिद्दीन, हिज्बुल मुजाहिद्दीन, IS, जैसे आतंकवादी संगठनों की रीढ़ तोड़ चुकी हैं. इसी जांबाज अधिकारी की कहानी आज हम आपसे साझा कर रहे हैं.



डेटा से खेलना हो या पिस्तौल से - हर काम में माहिर हैं दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल की छंदा मजुमदार.
डेटा से खेलना हो या पिस्तौल से - हर काम में माहिर हैं दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल की छंदा मजुमदार.

छंदा की कहानी, उन्हीं की जुबानी
18 साल से स्पेशल सेल में : छंदा मजुमदार पिछले 18 साल से स्पेशल सेल में कार्यरत हैं. इनका कहना है काफी टफ था स्पेशल सेल के साथ काम करना. फिर जब टेरर पर काम करना शुरू किया तो पीछे मुड़कर नही देखा. हर बड़े छोटे ऑपरेशन में हमारा योगदान रहा. टेक्निकल विंग में काम कर रही हूं अब तक.
बाटला हाउस केस में टेक्निकल टीम की खास भूमिका : छंदा बताती हैं कि इंडियन मुजाहिद्दीन के नाम से अल हिन्द का मेल आया करता था उस वक्त. गुजरात से लिंक दिल्ली के लक्ष्मी नगर तक मुझे इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिये मिला, जिससे हम बाटला हाउस तक पहुंच पाए. टेक्निकल इंटरसेप्ट के जरिये इस केस के तह तक हम पहुंच पाए.
बाटला हाउस में हमारा बड़ा नुकसान : बाटला हाउस में मोहन चन्द्र शर्मा जब शहीद हुए तो यह हमारा बहुत बड़ा नुकसान था. उस वक्त हम पर सवाल भी खड़े हुए. कहा गया कि हमने कॉलेज के इनोसेंट लड़कों को मार दिया. तब भी मैं स्पेशल सेल में टेक्निकल अफसर थी. हमने तमाम टेक्निकल सबूत इकट्ठा किए. अंत में कोर्ट ने माना की यह आतंकी थे.
बॉर्डर पर भी रहीं : मैं कई आतंकी ऑपरेशन में बॉर्डर पर मौजूद रही. अपनी ऑपरेशनल टीम के साथ जम्मू-कश्मीर में भी रही. तब हम अपने घर की ओर देखते भी नहीं थे. लश्कर-ए-तैयबा, जैश, सिमी, इंडियन मुजाहिद्दीन पर सबसे ज्यादा काम किया मैंने. इंडियन मुजाहिद्दीन को हमने ही खत्म भी किया.
अंडरवर्ल्ड नार्को टेरर पर भी काम किया : अंडरवर्ल्ड नार्को टेरर पर टेक्निकल काफी काम किया मैंने. 2003 में छोटा शकील का एक ऑपरेशन हमने क्रेक डाउन किया. छोटा शकील से जुड़ी एक महिला को दिल्ली से गिरफ्तार किया. शालनी ज्योति नाम था उसका. उस केस को खोला.
हम मेडल के लिए काम नहीं करते : गर्व की बात है मेडल मिलना. लेकिन हम मेडल के लिए काम नहीं करते, हम देश देश से प्यार करते हैं. बहुत रिस्क है हमारे काम में. परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में घर भी देखना होता है एक महिला को और स्पेशल सेल जैसी यूनिट में के टफ मोर्चे से भी जूझना होता है.
मूल रूप से बंगाल की हैं छंदा : बता दें कि छन्दा मजूमदार सेजवानी मूल रूप से बंगाल की रहनेवाली हैं. घर में पति और दो बच्चे हैं. छंदा के पास टेलीकम्युनिकेशन और इंजीनियरिंग की डिग्री है. साल 2002 से स्पेशल सेल में कार्यरत हैं छन्दा सेजवानी.
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