क्या समाजवादी पार्टी से भी बड़े हैं आजम खान?
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क्या समाजवादी पार्टी से भी बड़े हैं आजम खान?
क्‍या समाजवादी पार्टी से भी बड़े हैं आजम खान?

मुस्लिम-यादव वोट को बेस वोट बैंक मानने वाली समाजवादी पार्टी आजम खान को नाराज नहीं करना चाहती. शायद आजम इस बात को अच्छी तरह समझते हैं इसलिए अक्सर वो अपने आपको पार्टी से ऊपर दिखाने की कोशिश भी करते नजर आते हैं.

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कई दिनों तक चले हंगामे के बाद आखिर समाजवादी पार्टी (एसपी) सांसद आजम खान ने रमा देवी मामले में माफी मांग ली है. आजम के बयान के बाद समाजवादी पार्टी बैकफुट पर नजर आ थी. आजम खान का बचाव करते हुए एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी लोकसभा अध्यक्ष के गुस्से का शिकार होना पड़ा. ऐसे में सवाल है कि क्या आजम खान समाजवादी पार्टी की मजबूरी हैं. क्योंकि पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष मुलायम सिंह के दौर में अमर सिंह बनाम आजम खा की लड़ाई अक्सर चर्चा में रहती थी. इस लड़ाई में मुलायम के सबसे करीबी समझे जाने वाले अमर सिंह पर आजम खान भारी पड़े. पार्टी के कई अल्पसंख्यक नेता भी आजम के विरोध में खड़े रहे. एक दौर ऐसा भी था जब आजम खान ने पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ जमकर मोर्चा खोला था. लेकिन हर बार आजम पार्टी पर भारी पड़ते हैं. इस बार तो आजम खान के बयान ने समाजवादी पार्टी की महिला विरोधी छवि बना दी, लेकिन पार्टी नेतृत्व इस पर चुप्पी साधे हुए है.

अखिलेश के खिलाफ भी मोर्चा खोल चुके हैं आजम खान
2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद आजम खान ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. राज्य सरकार में मंत्री रहते हुए आजम लगातार 6-7 कैबिनट बैठकों में शामिल नहीं हुए. बाद में पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया था. 5 साल की सरकार में आजम खान मंत्री रहते हुए अक्सर ही सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को संकट में डाल देते थे.

विवादों से अपनों को ही संकट में डाल देते हैं आजम



2012 में जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनी तो वो शपथ ग्रहण करते ही विवादों में आ गई. दरअसल आजम ने अपनी शपथ के दौरान सिर्फ गोपनीयता की शपथ ली और पद की शपथ छोड़ दी. दो बार टोके जाने के बाद भी आजम ने शपथ पूरी नहीं की और मामला अदालत में पहुंच गया. सरकार की फजीहत होता देख अखिलेश ने बीच बचाव किया और आजम ने दोबारा मंत्री पद की शपथ ली. लेकिन इस बार उन्होंने पार्टी के दूसरे मुस्लिम कद्दावर नेता शाकिर अली के साथ शपथ लेने से इनकार कर दिया. बाद में शाकिर अली ने आजम खान को पांच एम का दुश्मन बताया. शाकिर अली ने कहां कि आजम मुसलमान, मौलाना, मदरसा, मदारिस और मुलायम के दुश्मन हैं.



विवादों के कारण पार्टी से निकाले भी जा चुके हैं आजम खान
2009 में आजम खा अपनी ही पार्टी की उम्मीदवार जयाप्रदा के खिलाफ रामपुर में खुलकर सामने आ गए थे. इस चुनाव में जयाप्रदा के टिकट को लेकर समाजवादी पार्टी के तत्कालीन महासचिव अमर सिंह और आजम खान आमने-सामने आ गए थे. आजम खान के विरोध के बाद भी 2009 के लोकसभा चुनाव में जयाप्रदा रामपुर से चुनाव जीतीं और उसके बाद पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया. हालांकि बाद में आजम पार्टी में वापस आ गए थे.

साफ है मुस्लिम-यादव वोट को बेस वोट बैंक मानने वाली समाजवादी पार्टी आजम खान को नाराज नहीं करना चाहती. शायद आजम इस बात को अच्छी तरह समझते हैं इसलिए अक्सर वो अपने आपको पार्टी से ऊपर दिखाने की कोशिश भी करते नजर आते हैं.

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