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UNGA में पाकिस्तान की धज्जियां उड़ाने वाली विदिशा मैत्रा बनना इतना आसान क्यों नहीं!

UNGA में पाकिस्तान की धज्जियां उड़ाने वाली विदिशा मैत्रा बनना इतना आसान क्यों नहीं!

इस समय देश में पीएम मोदी के बाद सबसे ज्यादा चर्चा आईएफएस अधिकारी विदिशा मैत्रा की हो रही है

इस समय देश में पीएम मोदी के बाद सबसे ज्यादा चर्चा आईएफएस अधिकारी विदिशा मैत्रा की हो रही है

देश की तमाम सोशल साइट्स (Social Sites) और न्यूज चैनलों (News Channels) पर भारतीय विदेश सेवा (Indian Foreign Service) की अधिकारी विदिशा मैत्रा (Vidisha Maitra) के यूएन (United Nations) में भाषण के क्लिपिंग को बार-बार दिखाया जा रहा है. लोग जानना चाहते हैं कि विदिशा मैत्रा कहां की रहने वाली है? किस बैच की आईएफएस (IFS) अधिकारी हैं? साथ ही आईएफएस अधिकारी को किस-किस तरह की सुविधाएं मिलती हैं?

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  • News18Hindi
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नई दिल्ली. संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) में पाकिस्तान (Pakistan)  के पीएम इमरान खान (Imran Khan) के भाषण पर करारा जवाब देने वाली एक आईएफएस (IFS) अधिकारी विदिशा मैत्रा (Vidisha Maitra) की इस समय खूब चर्चा हो रही है. भारत की तरफ से पाकिस्तान को बेनकाब करने वाली इस महिला अधिकारी के बारे में लोग जानना चाह रहे हैं. लोग यह भी जानना चाह रहे हैं कि एक आईएफएस अधिकारी विदेशों में क्या काम करते हैं? बता दें कि बीते शुक्रवार को यूएन में भारत की तरफ से एक ऐसे अधिकारी ने पाकिस्तान को बेनकाब किया है, जिसको 24 घंटे पहले तक देश की जनता तो छोड़ दीजिए विदेश सेवा से जुड़े अधिकांश अधिकारी भी ठीक से नहीं जानते थे. देश में अगर इस समय पीएम मोदी के बाद किसी की चर्चा हो रही है तो वह विदिशा मैत्रा की हो रही है.

कैसे बनते हैं एक आईएफएस अधिकारी

विदिशा मैत्रा की यूएन में दिए भाषण की क्लिपिंग देश की तमाम सोशल साइट्स और न्यूज चैनलों पर तेजी से वायरल हो रहा है. मैत्रा के भाषण की क्लिपिंग को बार-बार दिखाया जा रहा है. अपने भाषण में मैत्रा ने पाकिस्तानी पीएम इमरान खान के यूएन में दिए 50 मिनट के भाषण का जवाब मात्र 5 मिनट में दे दिया.  लोग जानना चाहते हैं कि विदिशा मैत्रा कहां की रहने वाली है? एक आईएफएस अधिकारी को किस-किस तरह की सुविधाएं मिलती हैं? खासकर यूएन और विदेशों में इन अधिकारियों का काम क्या होता है? देश के आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बारे में अमूमन लोगों को पता है कि वह क्या काम करते हैं, लेकिन आईएफएस अधिकारी के काम और काम करने के तरीके के बारे में बहुत कम लोगों को ही पता है.

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पाकिस्तान की आतंकी हरकतों पर दुनिया भर की नजर है. (फाइल फोटो)


विदिशा मैत्रा वर्तमान में यूएन में भारत की प्रथम सचिव हैं. मैत्रा यूएन में भारत की सबसे नई अधिकारी हैं. विदिशा मैत्रा 2009 बैच की भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) की अधिकारी हैं. मैत्रा ने साल 2008 में सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास की थी. यूपीएसी परीक्षा में विदिशा मैत्रा ने 39वां रैंक हासिल किया था. मैत्रा के पास नीति नियोजन और अनुसंधान (PP & R) प्रभाग के उप सचिव (DS) का आधिकारिक पोस्ट भी है. उन्हें 2009 में बिमल सान्याल मेमोरियल प्राइज गोल्ड मेडल बेस्ट ऑफिसर ट्रेनी से सम्मानित किया जा चुका है.

विदेशों में काम क्या होता है

भारतीय विदेश सेवा में चयनित छात्र ही विदेशों में भारत सरकार के आधिकारिक नुमाइंदे होते हैं. भारत के मौजूदा विदेश मंत्री एस जयशंकर भी विदेश सेवा के अधिकारी रह चुके हैं. भारत का विदेश सचिव भी आईएफएस अधिकारी ही होता है. एस जयशंकर भी भारत के विदेश सचिव रह चुके हैं.

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इंडियन फॉरेन सर्विसेज काफी ग्लेमरस सर्विसेज मानी जाती है. यूपीएससी (UPSC) परीक्षा में भाग लेने वाले एक परिक्षार्थी न्यूज 18 हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, 'एक जमाना था जब लोग आईएएस सर्विसेज में जाने से ज्यादा आईएफएस सर्विसेज में जाते थे. बीच का दौर एक ऐसा आया जब यूपीएसी इग्जाम पास करने वाले छात्र आईएएस सर्विसेज को ही प्राथिमिकता देने लगे. लेकिन, हाल के कुछ सालों से एक बार फिर से यूपीएससी इग्जाम पास करने वाले आईएफएस को प्राथमिकता दे रहे हैं.'

किस तरह की ट्रेनिंग मिलती है

आईएफएस सर्विसेज क्वालिफाई करने वाले छात्रों को मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिशट्रेशन (LBSNAA) में तीन महीने की ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है. जब यह कोर्स पूरा हो जाता है तो फिर सभी कैंडिडेट को दिल्ली स्थित फॉरेन सर्विस इंस्टीच्यूट ट्रेनिंग दिलाई जाती है. यहां पर ट्रेनी अपने मनपसंद की कोई एक विदेशी भाषा सेलेक्ट करते हैं. कभी-कभी ट्रेनी को उनके रैंक के हिसाब से विदेशी लेंग्वेज दी भी जाती है. अरबी, चाइनीज, जर्मन, फ्रेंच और स्पेनिश जैसी कई लेंग्वेजज होती हैं, जिसे ट्रेनी को सीखना होता है. जब ट्रेनिंग पूरी हो जाती है तो इन लोगों को इंडियन मिशन एज थर्ड सेक्रेटरी नियुक्त किया जाता है. सामान्य तौर पर हर साल 10 से 15 कैंडिडेट को ही फॉरेन सर्विसेज में चुना जाता है. आईएएस और आईपीएस की तुलना में आईएफएस कैंडिडेट काफी कम लिए जाते हैं.

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पाक पीएम इमरान खान 74वें UNGA को संबोधित करते हुए.


भारत में सेंट्रल सर्विसेज की नौकरी में सरकारी अधिकारियों को दो तरह से सैलेरी जुड़ती है. पे-बैंड और ग्रेड-पे से आंका जाता है कि उस अधिकारी की कितनी सैलेरी होगी. पे-बैंड और ग्रेड-पे जोड़ने पर सभी आईएफएस, आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की शुरुआती सैलेरी 56 हजार 500 रुपए बनती है. साथ ही इन अधिकारियों के वेतन में अलाउंस भी जुड़ता है. भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों को भी आईएएस और आईपीएस की तरह ही सैलेरी मिलती है. सिर्फ फर्क जो देखा जाता है वह अलाउंस को लेकर होता है. आईएफएस अधिकारी के सैलिरी में जो अंतर आता है वह है विदेशी अलाउंस. फॉरन अलाउंस अलग-अलग देशों में अलग-अलग होते हैं. यूएसए में फॉरेन अलाउंस अलग रहेगा, चाइना में फॉरेन अलाउंस रहेगा. फॉरेन अलाउंस उस देश की परचेजिंग पावर से आंका जाता है. आईएफएस अधिकारियों का फॉरेन अलाउंस तय होता है.

अमेरिका में और दूसरे देशों में क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं

अगर कोई नया आईएफएस अधिकारी अगर अमेरिका में नियुक्त होता है तो उसकी एक महीने की सैलिरी लगभग तीन लाख रुपये होती है. यूएस में फॉरेन अलाउंस एक नए आईएफएस अधिकारी को 4 हजार डॉलर प्रति माह होता है. इस लिहाज से देखें तो एक नए आईएफएस अधिकारी अगर अमेरिका में नियुक्त होता है तो उसकी सैलिरी 3 लाख के आस-पास हो जाएगी. साथ ही कई सुविधाएं भी फ्री में मिलती है. ज्यों-ज्यों आईएफएस अधिकारियों की रैंक बढ़ती है उनको सुविधाएं बढ़ती जाती है. विदेशों में आईएफएस अधिकारियों को मोबाइल बिल नहीं देना पड़ता है. इलेक्ट्रीसिटी बिल नहीं देना पड़ता है. साथ ही सबसे खास बात यह होती है कि आपको कोई आसानी से निकाल या संस्पेंड भी नहीं कर सकता है. आईएफएस अधिकारियों को हाईलेवल ऑफ जॉब सिक्योरिटी प्रदान की जाती है. डिप्लोमेट पासपोर्ट मुहैया कराया जाता है, जो अलग क्लर का होता है. आप किसी भी दूसरे देश में स्टडी लिव पर जा सकते हैं. इस दौरान भी आपको सारी सुविधाएं मिलती रहेंगी. साथ ही लाइफ टर्फ पेंशन भी मिलता रहेगा.

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संयुक्तराष्ट्र संघ के कई देशों के प्रतिनिधि भाग लेते हैं(फाइल फोटो)


आईएफएस अधिकारियों का काम होता है कि डिफरेंट कंट्री के साथ भारत का संबंध कैसे बनाना है और उस देश के साथ कैसे वर्ताव करना है. भारत सरकार के मंत्री या लीडर्स उस देश में जाते हैं तो उनको बताना होता है कि इस देश के साथ हमारा किस तरह का रिलेशन है और आपको कैसे वर्ताव करना है. कौन-कौन सी चीज इस देश से हम ले सकते हैं. साथ ही उस देश से अपने देश को क्या-क्या फायदा होंगे. ये सारी जानकारी आईएफएस अधिकारी को रखना होता है. एक आईएफएस अधिकारी को पीस और पॉलिसी को भी फॉर्मूलेट करने का काम होता है. हालांकि, आईएफएस अधिकारी के साथ कुछ समस्याएं भी तीन साल पर आती रहती है. हर तीन साल के बाद आईएफएस अधिकारी का ट्रांसफर हो जाता है. इस कारण दूसरे देशों में सेटलमेंट भी बहुत तेजी से करना होता है. इनको कुछ सावधानियां भी बरतनी पड़ती है दूसरे देशों के डिप्लोमेट के साथ अच्छा संबंध बनाना पड़ता है, क्योंकि इंडिया का नाम आपके नाम के साथ जुड़ा है.

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Tags: Ministry Of Foreign Affairs, Pakistan, PM Modi, United nations, United States of America, Vidisha

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