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अफगानिस्तान में मारे गए फोटो जर्नलिस्ट सिद्दीकी की मौत से जामिया सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर

यादों में दानिश सिद्दीकी.

यादों में दानिश सिद्दीकी.

दानिश सिद्दीकी ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के एजेके मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर में 2005 से 2007 तक पढ़ाई की है. उनकी मौत की खबर से पूरे जामिया इलाके में शोक की लहर है.

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नई दिल्ली. जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) ने कंधार के स्पिन बोल्डक जिले की हिंसा में मारे गए रॉयटर्स के फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी के दुखद और असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया. इस खबर से जामिया एजेके मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर में शोक की लहर दौड़ गई, जहां दानिश ने 2005-2007 तक पढ़ाई की और मास कम्युनिकेशन में परास्नातक किया.

जामिया मिल्लिया की वाइस चांसलर ने कहा - पत्रकारिता जगत की बड़ी क्षति

जामिया की कुलपति ने इसे पत्रकारिता और जामिया बिरादरी के लिए एक बड़ी क्षति बताया. इस दुखद घटना की खबर मिलते ही उन्होंने दानिश के पिता प्रो. अख्तर सिद्दीकी से बात की. उन्होंने बताया कि दानिश ने दो दिन पहले उनसे बात की थी और अफगानिस्तान में वह जो काम कर रहा था, उसके बारे में चर्चा की थी. जामिया से सेवानिवृत्त प्रो. अख्तर सिद्दीकी शिक्षा संकाय के डीन थे. वह राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के निदेशक भी थे.

दानिश सिद्दीकी के घर पर शोक और मातम का माहौल

जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र दानिश सिद्दीकी अपने पिता प्रोफेसर मोहम्मद अख्तर सिद्दीकी के साथ विश्वविद्यालय के पास के ही इलाके गफ्फार मंजिल में रहते थे. दानिश की फैमिली लगभग 70 साल से इसी क्षेत्र में रह रही थी. इससे पहले वह पुरानी दिल्ली में रहते थे. दानिश की मौत के बारे में पता चलते ही घर आस-पड़ोस और पूरे गफ्फार मंजिल में शोक की लहर दौड़ गई. क्षेत्र के लोग शोक व्यक्त करने के लिए दानिश के घर पहुंचने लगे. जामिया विश्वविद्यालय के पीआरओ अहमद अजीम भी मौके पर मौजूद रहे. दानिश सिद्दीकी के पिता ने मीडिया से कहा है कि भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से उनकी बातचीत हुई है. दानिश की बॉडी को भारत लाने के प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि दानिश से उनकी हमेशा बातचीत होती रहती थी और कल भी हुई थी. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं लगा था कि इस तरह का हादसा हो जाएगा, जिसमें दानिश की मौत हो जाएगी.

जामिया मास कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट ने विशिष्ट छात्र के पुरस्कार से भी सम्मानित किया

2018 में एमसीआरसी ने दानिश को विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार से सम्मानित किया था. प्रोफेसर और कार्यवाहक निदेशक शोहिनी घोष कहती हैं 'यह एमसीआरसी के जीवन के सबसे दुखद दिनों में से एक है. दानिश हमारे हॉल ऑफ फेम में सबसे चमकीले सितारों में से एक थे और एक सक्रिय पूर्व छात्र थे, जो छात्रों के साथ अपने काम और अनुभव साझा करने के लिए अपने अल्मा मेटर में लौटते रहे. हम उनकी कमी पूरी नहीं कर सकते, लेकिन उनकी याद जिंदा रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं.'

2018 में मिला था पुलित्जर पुरस्कार

दानिश ने अपने काम के लिए 2018 में पुलित्जर पुरस्कार सहित 7 सदस्यीय रॉयटर्स टीम के हिस्से के रूप में कई पुरस्कार जीते थे. उन्होंने म्यांमार के अल्पसंख्यक रोहिंग्या समुदाय द्वारा की गई हिंसा और अगस्त 2017 से बांग्लादेश में उनके सामूहिक पलायन का दस्तावेजीकरण किया था. जिस फोटो के लिए उन्हें पुलित्जर अवॉर्ड दिया गया था, उसमें उन्होंने एक शरणार्थी महिला को बंगाल की खाड़ी के तट पर अपने घुटनों के बल डूबते हुए, थका हुआ और उदास दिखाया था. कुछ ही दूरी पर पुरुषों का एक समूह एक छोटी नाव में अपने साथ लाए गए सामान उतार रहा था, जब वे म्यांमार में अपने घरों से सुरक्षा के लिए बांग्लादेश गए थे.

जामिया के मास कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट से संपर्क में रहते थे सिद्दीकी

एमसीआरसी के छात्रों के साथ उनकी आखिरी बातचीत 26 अप्रैल 2021 को हुई थी, जब सोहेल अकबर ने उन्हें कन्वर्जेंट जर्नलिज्म के छात्रों से बात करने के लिए आमंत्रित किया था. सोहेल अकबर याद करते हैं, 'कोविड-19 दूसरे उछाल के घातक चरम पर था और दानिश बहुत व्यस्त था' लेकिन हमेशा की तरह, उन्होंने एमसीआरसी के छात्रों के लिए समय निकाला.

कैमरे में रोहिंग्या से लेकर पैराक्यूट तक

एक फोटो जर्नलिस्ट के रूप में दानिश ने एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप में कई महत्वपूर्ण कहानियां कवर की हैं. उनके कुछ कार्यों में अफगानिस्तान और इराक में युद्ध, रोहिंग्या शरणार्थियों का संकट, हांगकांग विरोध, नेपाल भूकंप, उत्तर कोरिया में सामूहिक खेल और स्विट्जरलैंड में शरण चाहने वालों की रहने की स्थिति शामिल है. उन्होंने इंग्लैंड में धर्मान्तरित मुस्लिमों पर एक फोटो शृंखला भी तैयार की है. उनका काम व्यापक रूप से पत्रिकाओं, समाचार पत्रों, स्लाइडशो और दीर्घाओं में प्रकाशित हुआ है - जिसमें नैशनल ज्योग्राफिक पत्रिका, न्यूयॉर्क टाइम्स, द गार्जियन, द वाशिंगटन पोस्ट, वॉल स्ट्रीट जर्नल, टाइम मैगजीन, फोर्ब्स, न्यूजवीक, एनपीआर, बीबीसी, सीएनएन शामिल हैं. अल जजीरा, साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट, द स्ट्रेट्स टाइम्स, बैंकॉक पोस्ट, सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड, द एलए टाइम्स, बोस्टन ग्लोब, द ग्लोब एंड मेल, ले फिगारो, ले मोंडे, डेर स्पीगल, स्टर्न, बर्लिनर जितुंग, द इंडिपेंडेंट, द टेलीग्राफ, गल्फ न्यूज, लिबरेशन और कई अन्य प्रकाशन शामिल हैं.

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