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जंतर-मंतर पर फिर गूंजेगा प्रदर्शन और धरने का शोर, SC ने बैन लगाने से किया इनकार

jantar mantar

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली पुलिस से दो हफ्तों के भीतर गाइडलाइंस तैयार करने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस से कहा है कि गाइडलाइंस के अाधार पर पुलिस जंतर-मंतर पर धरनों की अनुमति दे.

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली के जंतर-मंतर पर होने वाले धरने-प्रदर्शनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इलाके की संवेदनशीलता को धरना देने वालों की रुचि के साथ संतुलित करना जरूरी है. ऐसे में धरना देने पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई जा सकती.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने जंतर-मंतर, बोट क्लब समेत अन्य जगहों पर धरना और प्रदर्शन पर लगी रोक को हटाने का फैसला दिया है. बता दें कि 2017 में NGT के आदेश पर पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण और ट्रैफिक जाम की समस्या का हवाला देते हुए जंतर-मंतर इलाके में किसी भी तरीके के धरना प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट में आज के फैसले में पुलिस को आदेश देते हुए कहा है कि 2 हफ्ते के अंदर नई गाइडलाइन जारी की जाए और जंतर मंतर पर धरने प्रदर्शन की इजाजत दी जाए.

जस्टिस सीकरी ने कहा, 'हमने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को कहा है कि वो विरोध प्रदर्शन से संबंधित गाइडलाइन तैयार करें और इन शर्तों के पूरा होने पर ही विरोध प्रदर्शन की अनुमति दे लेकिन इस पर पूरी तरह रोक लगाना ठीक नहीं.'

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मजदूर किसान शक्ति संगठन ने दी थी चुनौती
NGT के आदेश को 'मजदूर किसान शक्ति संगठन' और अन्य संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि पूरी सेंट्रल दिल्ली में दिल्ली पुलिस की ओर से हमेशा के लिए धारा 144 लगाई गई है. ऐसे में लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है. याचिकाकर्ता ने यह भी कहा यह भी था कि रामलीला मैदान दिल्ली से काफी दूर पड़ता है, जिससे प्रदर्शनकारियों को पहुंचने में समस्या होती है. याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में इंडिया गेट के पास बने बोट क्लब पर भी प्रदर्शन की इजाजत मांगी थी.

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ध्वनि प्रदूषण और गंदगी का हवाला देते हुए लगाई गई थी रोक
दरअसल, 2017 में इस क्षेत्र में धरने पर रोक लगाते हुए NGT ने कहा था कि क्षेत्र प्रदर्शनकारियों द्वारा गंदगी फैलाने की अड्डा बन गया है. क्योंकि, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कुछ ऐसे प्रदर्शनकारी हैं, जो गाय संरक्षण के नाम पर बैलगाड़ियों के साथ गायों को लेकर आते हैं, जिससे लोगों के लिए समस्या बढ़ जाती है. NGT ने कहा था कि प्रदर्शनकारियों द्वारा इस क्षेत्र का लगातार इस्तेमाल वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1981 समेत पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन है.

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याचिकाकर्ताओं ने दिए थे ये तर्क
एनजीटी द्वारा लगाए गए इस रोक के खिलाफ दायर की गई एक याचिका में एडवोकेट प्रशांत भूषण ने दलील दी कि दिल्ली के लुटियन ज़ोन में सत्ता की पूरी शक्ति केंद्रित है. इन जगहों पर प्रदर्शन पर रोक लगाना व्यक्ति के मूल अधिकारों के खिलाफ है क्योंकि इन जगहों पर प्रदर्शन करने से लोगों का और सरकार का ध्यान आसानी से खींचा जा सकता है. उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर ऐसी जगह है जहां पर पूरे देश की नज़र रहती है.

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