OPINION: झारखंड चुनाव में इस बार गायब रहे जल, जंगल और जमीन के मुद्दे
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OPINION: झारखंड चुनाव में इस बार गायब रहे जल, जंगल और जमीन के मुद्दे
जल, जंगल और जमीन शब्द नहीं है बल्कि झारखंड की पूरी विरासत इसी पर टिकी है.

झारखंड विधानसभा चुनावों (Jharkhand Assembly Election 2019) के नतीजे सोमवार को आ रहे हैं. इस बार आदिवासी बहुल इस राज्य में नागरिकता संशोधन एक्ट और चुनाव के पहले राममंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने चुनावी राजनीति बदल दी.

  • News18India
  • Last Updated: December 23, 2019, 8:19 AM IST
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झारखंड विधानसभा चुनावों (Jharkhand Assembly Election 2019) के परिणाम सोमवार को आ रहे हैं. इस बार इन चुनावों में झारखंड के स्थानीय मुद्दों को तवज्जो नहीं मिल पाई है. झारखंड राज्य के निर्माण को 19 साल हो गए. झारखंड के लगभग दो दशक की उम्र में इस राज्य ने कई चुनाव देख लिए. इस राज्य में अब तक 10 मुख्यमंत्रियों ने शासन किया. यहां राष्ट्रपति शासन भी रहा. रघुवर दास (Raghuvar Das) राज्य के ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया. ऐसे में राज्य को उम्मीद थी कि केन्द्र सरकार से तालमेल रखने वाली इस सरकार में राज्य के स्थानीय समस्याओं का हल निकल जाएगा, लेकिन लोगों की उम्मीद पर यह सरकार कितनी खरी उतर पाई है, यह कहना अभी मुश्किल है.

जल, जंगल, जमीन नहीं बना मुद्दा
झारखंड के मुख्य मुद्दों की बात करें तो जल, जंगल और जमीन सबसे बड़ा मुद्दा है. आदिवासियों से जुड़े इसी मुद्दे को लेकर शिबू सोरेन ने लड़ाई लड़ी और झारखंड अलग राज्य बना. जल, जंगल और जमीन शब्द नहीं है बल्कि झारखंड की पूरी विरासत इसी पर टिकी है. ये तीन शब्द पूरे आदिवासी इलाके के ताने-बाने को बयान करते हैं.

झारखंड के आदिवासी जंगल और जमीन के बहाने जंगली इलाकों पर दावेदारी करते हैं. इसके साथ ही जल के बहाने नदियों, झरनों और ताल, तलैयों पर अपना हक जताते हैं. सरकारें विकास के नाम पर इन्हीं तीनों को इनसे छीनना चाहती है.



क्यों नहीं स्थानीय मुद्दों को चुनाव में मिली जगह


दरअसल चुनाव प्रचार के बीच में नागरिकता संशोधन एक्ट और चुनाव के पहले राममंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस राज्य की चुनावी राजनीति बदल दी. राज्य में 5 साल से सरकार चला रही बीजेपी को स्थानीय मुद्दों से ज्यादा इन राष्ट्रीय मुद्दे से उम्मीद थी. कांग्रेस भी बीजेपी को इन्हीं मुद्दों पर घेरना चाहती थी.

स्थानीय मुद्दे की बात सिर्फ झारखंड मुक्ति मोर्चा, आजसू तक के चुनावी भाषणों तक ही सीमित रहे, लेकिन बीजेपी सरकार को घरेने के लिए अलद-अलग मंच पर इन पार्टियों ने भी राष्ट्रीय मुद्दे को हवा दी. दूसरी ओर विपक्ष का मोर्चा संभाल रहे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी झारखंड के स्थानीय मुद्दों को उठाने की बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर ही ज्यादा हमलावर दिखे.

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First published: December 22, 2019, 11:27 AM IST
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