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JNU हिंसा: आरटीआई पर VC की सफाई-तोड़फोड़ की बात नहीं की, सर्वर रूम में घुसने में हमें एक दिन लग गया

News18India
Updated: January 22, 2020, 4:27 PM IST
JNU हिंसा: आरटीआई पर VC की सफाई-तोड़फोड़ की बात नहीं की, सर्वर रूम में घुसने में हमें एक दिन लग गया
JNU हिंसा को लेकर RTI पर विश्विविद्यालय प्रशासन ने दी सफाई.

JNU में जनवरी के पहले सप्ताह में हुई हिंसा को लेकर दायर RTI आवेदन को लेकर छपी खबरों पर विश्वविद्यालय ने दी सफाई.

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  • Last Updated: January 22, 2020, 4:27 PM IST
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नई दिल्ली. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने 5 जनवरी से पहले हुई हिंसा के मामले में दायर सूचना का अधिकार आवेदन (RTI) को लेकर मीडिया में छपी खबरों पर सफाई दी है. JNU प्रशासन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने कभी भी 3 जनवरी को सर्वर डैमेज (server damage) की बात नहीं कही थी. प्रशासन की तरफ से कहा गया कि मास्क पहने लोग 3 जनवरी को सीआईएस (CIS) में घुसे और वहां कार्यरत तकनीकी कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया. इसके बाद लोगों ने सिस्टम का सर्वर ऑफ कर दिया. CIS परिसर में तोड़फोड़ की घटना अगले दिन हुई.

विश्वविद्यालय द्वारा दी गई जानकारी में कहा गया है कि सेंटर फॉर इन्फॉर्मेशन सिस्टम (सीआईएस) में जेएनयू का मुख्य सर्वर तीन जनवरी को बंद हुआ था और अगले दिन यह ‘विद्युत आपूर्ति में बाधा की वजह से’ठप हो गया. जवाब में यह भी कहा गया है कि पांच जनवरी को अपराह्न तीन बजे से रात 11 बजे तक जेएनयू परिसर के उत्तरी/मुख्य द्वार पर लगे कैमरों की कोई पूरी सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं है, जिस दिन नकाबपोश लोगों ने परिसर में प्रवेश किया था और छात्रों तथा शिक्षकों पर हमला किया था.



JNU ने कहा- 4 जनवरी को हुई तोड़फोड़
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से RTI आवेदन के बाद छपी खबरों को लेकर कहा गया कि 3 जनवरी को CIS परिसर में कोई तोड़फोड़ नहीं हुई. जब 4 जनवरी को प्रशासन के लोग वहां पहुंचे तो सिस्टम को रि-स्टोर करने में 4 घंटे लगे. CIS डाटा सेंटर के सर्वर रूम में जो नुकसान हुआ, वह 4 जनवरी को किया गया. विवि प्रशासन की ओर से कहा गया कि मास्क पहने लोग दो दरवाजा-खिड़की तोड़कर रूम में घुसे और सर्वर बंद कर दिया. इसके बाद फाइबर ऑप्टिकल केबल के साथ-साथ पावर सप्लाई सिस्टम को भी प्रभावित किया. इसके अलावा बायोमीट्रिक सिस्टम को भी तोड़ दिया. मास्क पहने हुए लोग नारेबाजी करते रहे और टेक्निकल स्टाफ को रूम में घुसने नहीं दिया.इसमें यह भी कहा गया, ‘सीसीटीवी कैमरों की अवस्थिति का विवरण सुरक्षा कारणों से उपलब्ध नहीं कराया जा सकता.’आवेदन में यह भी पूछा गया कि 25 दिसंबर 2019 से आठ जनवरी 2020 तक तकनीकी खामी या समस्या की वजह से जेएनयू की वेबसाइट कितनी बार बंद हुई.इसके जवाब में कहा गया कि इस अवधि में वेबसाइट वैकल्पिक बैकअप प्रबंधों की वजह से लगातार चलती रही. विश्वविद्यालय से इस बारे में तत्काल कोई टिप्पणी उपलब्ध नहीं हुई है.

वीसी बोले-3 को नहीं 4 जनवरी को पता चला तोड़फोड़ हुई
सर्वर रूम में तोड़फोड़ के मुद्दे पर जेएनयू के वीसी जगदीश कुमार ने कहा, हमने 3 जनवरी को जो शिकायत की थी, उसमें सर्वर रूम में तोड़फोड की बात नहीं की. हमें सर्वर रूम में घुसने में पूरा एक दिन लग गया. जब हम 4 जनवरी को सर्वर रूम में घुसे तब पता लगा कि उसे बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया गया. हमने पुलिस और आरटीआई को जो भी जानकारियां दी हैं, वह पूरी तरह से सच हैं.

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First published: January 22, 2020, 3:20 PM IST
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