जेएनयू के वीसी ने की शैक्षणिक कैलेंडर की घोषणा, परीक्षाएं 31 जुलाई तक होंगी पूरी
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जेएनयू के वीसी ने की शैक्षणिक कैलेंडर की घोषणा, परीक्षाएं 31 जुलाई तक होंगी पूरी
मानसून सत्र की पंजीकरण प्रक्रिया ऑनलाइन होगी. (फाइल फोटो)

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के शैक्षणिक कैलेंडर (Academic Calendar) की घोषणा कर दी गई है. सभी स्कूलों के डीनों और विशेष केंद्रों अध्यक्षों ने कैलेंडर को सर्वसम्मति से मंजूरी दी है.

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नई दिल्ली. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के शैक्षणिक कैलेंडर (Academic Calendar) की घोषणा कर दी गई है. इसमें 31 जुलाई तक परीक्षाएं पूरी करने की समय सीमा तय की गई है.  जेएनयू के सभी स्कूलों के डीनों और विशेष केंद्रों अध्यक्षों ने कैलेंडर को सर्वसम्मति से मंजूरी दी है. कुलपति एम जगदीश कुमार ने शनिवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा, "विद्यार्थियों के अंदाजन 25 से 30 जून के बीच जेएनयू परिसर लौटने की उम्मीद है, ताकि उनके शेष शैक्षणिक कार्य और परीक्षाएं पूरी हो सकें. परीक्षाएं 31 जुलाई तक पूरी होंगी. " छात्रों के लिए नया सेमेस्टर एक अगस्त से शुरू होगा. भले ही 31 जुलाई तक परीक्षा के परिणाम न आए पाएं, तो भी छात्रों के पास अस्थायी तौर पर पंजीकरण कराने और अगले सेमेस्टर में जाने का मौका होगा.

ऑनलाइन होगा मानसून सत्र की पंजीकरण
कुमार ने कहा कि मानसून सत्र की पंजीकरण प्रक्रिया ऑनलाइन होगी. जिससे छात्रों को सहूलियत होगी और वे घर से ही पंजीकरण करा सकते हैं. शोधार्थियों के लिए अपना शोध कार्य जमा कराने की तारीख 31 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दी गई है.

निश्चित नहीं है शैक्षणिक कैलेंडर
कुलपति ने कहा, " इस वक्त यह शैक्षणिक कैलेंडर निश्चित नहीं है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि पूरे देश में चरणों में लॉकडाउन किस तरह से खत्म किया जाता है और यूजीसी से हमें क्या नए दिशानिर्देश मिलते हैं."



कोरोना संकट के कारण शैक्षणिक संस्थान बंद
देश के ज्यादातर शैक्षणिक संस्थान कोरोना संकट के कारण लागू लॉकडाउन की वजह से फिलहाल बंद हैं. कुलपति के इस बयान से साफ हो गया कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद ही ये निश्चित हो पाएगा कि शैक्षणिक कैलेंडर किस तरीके से लागू होगा.

1969 में हुई थी स्थापना
राजधानी दिल्ली में स्थित जेएनयू सेंट्रल यूनिवर्सिटी है. इसकी स्थापना साल 1969 में हुई थी. इस प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में देश के कई राज्यों के छात्र पढ़ाई करते हैं. देश के पहले प्रधानमंत्री के नाम पर इसका नामकरण किया गया. इसके पहले वीसी जी पार्थसारथी थे. यहां विदेशी भाषाओं, अंतराष्ट्रीय संबंध के अलावा कई विषयों में बीए, एमए के अलावा एमफिल और पीएचडी के अध्ययन के लिए छात्र आते हैं.

 


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