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Delhi Violence: कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को लगाई फटकार, कहा- आरोप तय करवाने के लिए पर्याप्‍त सबूत होने चाहिए

Delhi Violence: कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को लगाई फटकार, कहा- आरोप तय करवाने के लिए पर्याप्‍त सबूत होने चाहिए

कड़कड़डूमा कोर्ट ने एक और मामले में दिल्‍ली पुलिस को फटकार लगाई है.

कड़कड़डूमा कोर्ट ने एक और मामले में दिल्‍ली पुलिस को फटकार लगाई है.

Delhi Violence: दिल्‍ली हिंसा मामले की सुनवाई करते हुए कड़कड़डूमा कोर्ट (Karkardooma Court) ने पुलिस (Delhi Police) को फटकार लगाई है. यही नहीं, कोर्ट ने दुकान में आग लगाकर लूटपाट करने के आरोपी जावेद के खिलाफ आईपीसी की धारा 436 के तहत आरोप तय करने से मना करते हुए कहा कि पुलिस के पास पर्याप्‍त सबूत होने चाहिए.

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  • News18Hindi
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    नई दिल्‍ली. दिल्ली हिंसा मामले (Delhi Violence Case) में सुनवाई करते हुए कड़कड़डूमा कोर्ट (Karkardooma Court) ने दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को फटकार लगाते हुए कहा कि दिल्ली हिंसा मामले की जांच बहुत सावधानी से करनी है, ऐसा नहीं है कि आप जांच के दौरान कॉमन सेंस का इस्तेमाल ही नहीं करें. इसके साथ कोर्ट ने कहा कि पुलिस या जांच अधिकारी को ये भी समझने की जरूरत है कि आरोप तय करवाने के लिए उनके पास पर्याप्‍त सबूत होने चाहिए. इसके साथ कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने कहा कि जिस महिला की शिकायत पर आरोपी जावेद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उसमें एक भी ऐसा शब्द नहीं लिखा है, जो बता रहा हो कि हिंसा करने वाले ने आग लगाकर उसकी दुकान में लूटपाट की.

    दरअसल, दयालपुर थाने में दर्ज एफआईआर 102/2020 में आरोपी जावेद के खिलाफ कड़कड़डूमा कोर्ट ने आईपीसी की धारा 436 के तहत आरोप तय करने से मना कर दिया. आईपीसी की धारा 436 का मतलब है कि कोई व्यक्ति किसी के घर या संपत्ति को किसी विस्‍फोटक या आग से जलाने या नष्ट करने का काम करता है. इस पर 10 साल या फिर आजीवन कारावास की सजा है.

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    इन धाराओं में दर्ज हुआ था केस
    हालांकि आरोपी जावेद के खिलाफ मामला धारा 147, 148, 149, 427, 436, 380, 454, 120B और 34 के तहत दर्ज किया गया था. कोर्ट ने कहा कि आईपीसी की धारा 436 को छोड़ कर बाकी मामलों में आरोप तय किये जा सकते हैं. इसके अलावा कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा है कि शिकायतकर्ता ने 161 के तहत अपना बयान दर्ज कराया था. साथ ही कहा कि इस मामले को कवर करने के लिए अब पुलिस कोई सप्लीमेंट्री बयान न दे.

    Tags: Delhi police, Delhi Police Commissioner, Delhi Violence Case, Karkardooma Court

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