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Sludge Treatment Plant: अब द‍िल्‍ली के नालों से न‍िकलने वाली गाद से तैयार होंगी टाइल्‍स, जानें क्‍या है प्‍लान

Sludge Treatment Plant: अब द‍िल्‍ली के नालों से न‍िकलने वाली गाद से तैयार होंगी टाइल्‍स, जानें क्‍या है प्‍लान

द‍िल्‍ली के नालों से न‍िकलने वाली गाद का न‍िपटान करने के ल‍िए अब केजरीवाल सरकार ने योजना तैयार की है. (File Photo)

द‍िल्‍ली के नालों से न‍िकलने वाली गाद का न‍िपटान करने के ल‍िए अब केजरीवाल सरकार ने योजना तैयार की है. (File Photo)

Sludge Treatment Plant: द‍िल्‍ली जल बोर्ड (DJB) हर रोज एसटीपी से 700-800 टन गाद का उत्पादन करती है, जिसे आधुनिक तकनीक का उपयोग करके संसाधन में परिवर्तित किया जाएगा. अगले 2 साल के भीतर दिल्ली के सभी एसटीपी में एक स्वतंत्र गाद उपचार संयंत्र होगा. इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद सीवेज से निकालने वाले गाद का उपचार किया जा सकेगा और सिर्फ 5 फीसदी गाद अवशेष ही बचेंगे. ज‍िसका उपयोग आगे टाइल बनाने और मिट्टी की कंडीशनिंग करने में किया जाएगा.

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नई द‍िल्‍ली. द‍िल्‍ली के नालों से न‍िकलने वाली गाद का न‍िपटान करने के ल‍िए अब केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) ने योजना तैयार की है. नई तकनीक को लागू कर इस गाद का न‍िपटान कर इसको बायोचार में बदलने के ल‍िए गाद उपचार संयंत्र (Sludge Treatment Plant) लगाए जाएंगे.

पायलेट प्रोजेक्‍ट के तौर पर इसकी शुरूआत पूर्वी द‍िल्‍ली के कोंडली इलाके से की जाएगी. अगर यह प्रोजेक्‍ट सफल हो जाता है तो द‍िल्‍लीभर के सभी 36 एसटीपी (STP) पर इस मॉडल को लागू क‍िया जाएगा. इससे बड़ी मात्रा में गाद का न‍िपटान हो सकेगा. वहीं एमसीडी लैंडफ‍िल साइट्स (MCD Landfill Site) पर भी गाद का ढेर नहीं लगेगा.

इस बीच देखा जाए तो द‍िल्‍ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) हर रोज एसटीपी से 700-800 टन गाद का उत्पादन करती है, जिसे आधुनिक तकनीक का उपयोग करके संसाधन में परिवर्तित किया जाएगा. अगले 2 साल के भीतर दिल्ली के सभी एसटीपी में एक स्वतंत्र गाद उपचार संयंत्र होगा, ताकि भविष्य में एमसीडी पर लैंडफ‍िल के लिए जमीन मुहैया कराने की किसी प्रकार की कोई भी निर्भरता न रहेगी.

ये भी पढ़ें: वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स की क्षमता बढ़ाने की तैयारी में केजरीवाल सरकार, ग्राउंड वाटर लेवल बढ़ाने की भी योजना 

दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष व उद्योग मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendar Jain) का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र के 13 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांटों (CETP) में इसी तरह के समाधान लागू किए जाएंगे, जहां औद्योगिक संयंत्रों से उत्पन्न गाद प्रकृति को हानि पहुंचा सकते हैं. अपशिष्ट जल और गाद प्रबंधन सभी विकासशील देशों के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय बन गया है.

डीजेबी एसटीपी में भी गाद का प्रबंधन एक प्रमुख मुद्दा है, क्योंकि यह एक तो दुर्गंध पैदा करता है और लैंडफिल साइट पर इसका लैंडफिल निपटान एक अतिरिक्त चुनौती है. पिछले कुछ वर्षों में, डीजेबी को कीचड़ के निपटान में गंभीर मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि भाजपा के नेतृत्व वाली दिल्ली नगर निगम (MCD) गाद के निपटान के लिए लैंडफिल साइट प्रदान करने में असमर्थ रहा है.

इस तरह से होगा गाद का न‍िपटारा
नए स्लज ट्रीटमेंट प्लांट में, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से उत्पन्न गाद को बायोगैस बनाने के लिए बायो-गेस्टर में डाला जाएगा, जिससे आगे बिजली बनाने में उपयोग किया जाएगा. इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में गाद बच जाता है. इस कीचड़ को ‘डाइजैस्टएड गाद’ कहा जाता है जिसे निपटाना मुश्किल हो जाता है और पारंपरिक तरीके से डिसपोस करने पर दुर्गंध पैदा होती है. लेकिन नई तकनीक के तहत इस कूड़े को बायोचार में बदला जाएगा.

कोंडली में 31 मार्च तक पूरा होगा गाद उपचार संयंत्र बनाने का काम
मंत्री जैन का कहना है क‍ि कोंडली में गाद उपचार संयंत्र बनने का काम 31 मार्च 2022 तक पूरा हो जाएगा. एक बार सफल होने के बाद, यह मॉडल दिल्ली के सभी 36 एसटीपी पर लागू किया जाएगा, जो न केवल बड़ी मात्रा में गाद को निपटाने में मदद करेगा, बल्कि निवासियों को प्रदूषित हवा से भी राहत दिलाएगा.

उपचार के बाद बचे गाद के अवशेष से बनेगी टाइल
नया गाद उपचार संयंत्र गर्म हवा के ऑक्सीडाइजेशन की तकनीक पर आधारित है, जिसमें गर्म हवा का उपयोग करके गाद को सुखाया जाता है और बायोचार में परिवर्तित किया जाता है. इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद सीवेज से निकालने वाले गाद का उपचार किया जा सकेगा और सिर्फ 5 फीसदी गाद अवशेष ही बचेंगे. अवशेषों का उपयोग आगे टाइल बनाने और मिट्टी की कंडीशनिंग करने में किया जाएगा.

डीजेबी की पहली हाइब्रिड मॉडल परियोजना
यह डीजेबी की पहली हाइब्रिड मॉडल परियोजना है, जहां टेक्नोलॉजी मुहैया कराने वाली कंपनी द्वारा 40 फीसदी निवेश किया जाएगा. इस परियोजना में 15 साल की संचालन और रखरखाव की अवधि होगी, जिसका अर्थ है कि संबंधित एजेंसी द्वारा 15 सालों तक रखरखाव का काम किया जाएगा और इस दौरान किसी भी तरह की आने वाली खामी को कंपनी ही दुरुस्त करेगी.

Tags: Delhi Government, Delhi MCD, Delhi news, Satyendra jain, STP

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